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Kaithal News: मौलिक अधिकार, कर्तव्यों की दी जानकारी
Tue, 03 Sep 2024 05:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 03 Sep 2024 05:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दाबा में कानूनी साक्षरता क्लब के तहत मौलिक अधिकार व कर्तव्यों पर एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर विद्यालय के कानूनी साक्षरता क्लब प्रभारी व पंजाबी प्रवक्ता हरजिंद्र सिंह पंजाबी ने विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हमारे संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन भाग 3 वह अनुच्छेद 12 से 35 तक विस्तार से किया है। संविधान के इस भाग को मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि यह शब्द ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है जबकि मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिए गए हैं। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ तब में कुल मिलाकर सात मौलिक अधिकार नागरिकों को प्रदान किए गए थे पर 44वें संवैधानिक संशोधन 1978 के तहत संपत्ति के अधिकार को कानूनी रूप दे दिया गया इसके बाद मौलिक अधिकारों की संख्या छह रह गई।
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उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए पेंटिंग व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी करवाई गई। विद्यार्थियों ने बड़े चाव के साथ इन प्रतियोगिताओं में भाग लिया वह मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी हासिल की। अंत में हिंदी प्रवक्ता सत्यवान ने विद्यार्थियों को
मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी अपने जीवन में लागू करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर सत्यवान, यादवेंद्र
सिंह, अमरजीत सिंह व अन्य स्टाफ मौजूद था।
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गुहला-चीका। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दाबा में कानूनी साक्षरता क्लब के तहत मौलिक अधिकार व कर्तव्यों पर एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर विद्यालय के कानूनी साक्षरता क्लब प्रभारी व पंजाबी प्रवक्ता हरजिंद्र सिंह पंजाबी ने विद्यार्थियों को मौलिक अधिकारों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हमारे संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन भाग 3 वह अनुच्छेद 12 से 35 तक विस्तार से किया है। संविधान के इस भाग को मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
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उन्होंने बताया कि यह शब्द ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है जबकि मौलिक अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिए गए हैं। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ तब में कुल मिलाकर सात मौलिक अधिकार नागरिकों को प्रदान किए गए थे पर 44वें संवैधानिक संशोधन 1978 के तहत संपत्ति के अधिकार को कानूनी रूप दे दिया गया इसके बाद मौलिक अधिकारों की संख्या छह रह गई।
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उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए पेंटिंग व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी करवाई गई। विद्यार्थियों ने बड़े चाव के साथ इन प्रतियोगिताओं में भाग लिया वह मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी हासिल की। अंत में हिंदी प्रवक्ता सत्यवान ने विद्यार्थियों को
मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी अपने जीवन में लागू करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर सत्यवान, यादवेंद्र
सिंह, अमरजीत सिंह व अन्य स्टाफ मौजूद था।