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Kaithal News: सनातन परंपरा में ईश्वर से भी ऊंचा माना जाता है गुरु का स्थान

Thu, 10 Jul 2025 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 10 Jul 2025 12:22 AM IST
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In Sanatan tradition, the position of Guru is considered higher than God
संवाद न्यूज एजेंसी
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पूंडरी, कैथल। सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी सम्मान और कृतज्ञता की भावना का प्रतीक है। यह पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन घरों में सत्य नारायण कथा सहित विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि बदलते समय के साथ गुरु-शिष्य संबंधों की परिभाषा भी प्रभावित हुई है। आज अधिकतर लोग गुरु से अपनी निजी समस्याओं—जैसे विवाह, व्यवसाय या पारिवारिक संकट—का समाधान चाहते हैं। जबकि सच्चे गुरु का कार्य चमत्कार नहीं, बल्कि धैर्य, संयम और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाना होता है। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा ही सच्चा चमत्कार होती है, जो शिष्य को जीवन की कठिनाइयों का सामना करने योग्य बनाती है।
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उन्होंने कहा कि सद्गुरु ईश्वर के विधान को नहीं बदलता, बल्कि शिष्य को उस विधान को समझने, स्वीकारने और सहन करने की शक्ति देता है। जैसे एक सुंदर चित्र के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, वैसे ही चरित्र निर्माण के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है।
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गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करता है ः शिव शक्ति धाम मंदिर के पुजारी पंडित प्रेमशंकर शास्त्री ने कहा कि गुरु पूर्णिमा ज्ञान और भक्ति का पर्व है। “गु” का अर्थ है अंधकार और “रू” का अर्थ है उसका नाश करने वाला। इस प्रकार गुरु वह होता है जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर शिष्य को भगवान के साक्षात्कार का मार्ग दिखाता है।


उन्होंने कहा कि जब शिष्य गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण करता है, तभी उसकी ज्ञान दृष्टि खुलती है और जीवन का अंतिम लक्ष्य—मोक्ष—प्राप्त किया जा सकता है। सद्गुरु स्वयं मुक्ति नहीं देता, लेकिन जब भी शिष्य ईश्वर से दूर होता है, वह उसे स्मरण कराता है कि वह भटक रहा है।

इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का पूजन वस्तुतः भगवान का पूजन है। इसी भाव से गुरु भक्त श्रद्धा और भक्ति से अपने गुरु का पूजन, अर्चन और वंदन करते हैं।
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