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न्यायालय के आदेशों को 8 साल अनसुना करता रहा प्रशासन
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 22 Jul 2016 12:40 AM IST
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चस्पा किए तालाबों पर चेतावनी बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा हरियाणा सरकार को कलायत नगर में तालाबों से अनधिकृत कब्जों को हटाने के आदेशों पर पहली बार प्रशासन ने कार्रवाई को जमीनी स्तर पर अंजाम दिया। नगरपालिका द्वारा आम जन से तालमेल स्थापित कर जो अभियान चला उसने एक बड़े बवाल को टाल दिया। 2008 में न्यायालय ने इस संदर्भ में प्रदेश सरकार को कार्रवाई के आदेश दिए थे। करीब 8 वर्ष की समयावधि में ऐसा पहली बार है जब नगरपालिका प्रशासन द्वारा तालाबों के बड़े रकबे पर कब्जा लेते हुए चेतावनी बोर्ड लगाए हैं।
सचिव सुशील भुक्कल ने बताया कि नगर में छह तालाबों से कब्जे हटाने का अभियान चलाया गया। इस दौरान भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में ड्यूटि मजिस्ट्रेट के निर्देश पर अवैध निर्माणों को ढहाया गया। इस संदर्भ में कुछ लोगों ने उच्च न्यायालय में पक्ष रखा था कि कलायत नगर पालिका क्षेत्र में गैर मुमकिन तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी नगर पालिका पर है। जलाशयों का उपयोग लोग करते आए हैं। कुछ अधिकारियों की शह पर जहां इन्हें बेचा जा रहा है वहीं इन पर हुए अवैध कब्जों के कारण आम जन के हितों की अनदेखी हो रही है।
उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक नगर पालिका तत्काल अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कदम उठाते हुए इस अचल संपदा को मुक्त करवाए। यह आवश्यक है कि जिला उपायुक्त कैथल दौरा कर गैर मुमकिन तालाब की वस्तु स्थिति का आंकलन करें कि संबंधित क्षेत्र के लोग प्रयुक्त करने से वंचित तो नहीं। लोगों के मुताबिक प्रशासनिक अधिकारियों ने मौका-मुआयना करने बजाए न्यायालय को स्पष्ट रिपोर्ट नहीं भेजी। फलस्वरूप रजिस्ट्री, इंतकाल व अन्य दस्तावेजों के बाद भी आशियानों पर खतरा मंडरा रहा है।
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कब्जे हटवाने के लिए 6 माह की समय सीमा थी तय
16 दिसंबर 2008 को वादी सुभाष और अन्य लोगों के पक्ष की सुनवाई करते हुए सार्वजनिक किए गए महत्वपूर्ण फैसले में प्रतिवादी पक्ष के कुछ लोगों का पक्ष सुनने के आदेश जिला उपायुक्त को पारित किए गए थे। इसमें प्रशासन को 27 मई 2009 तक अवैध कब्जों को हटवाने के आदेश पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने दिए थे। लेकिन इस समयावधि में न तो प्रतिवादियों का पक्ष प्रशासन ने सुना और न ही स्थिति को स्पष्ट किया गया।
प्रशासन ने बनाए एक हांठी में दो पेट
भारतीय संविधान के आर्टिकल 226/227 के तहत जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने कलायत स्थित जलाशयों को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त करवाने के आदेश प्रदेश सरकार को दिए थे। इस अहम फैसले का असर प्रदेश के तालाबों पर किए गए अवैध कब्जों पर होना था। प्रभावितों का आरोप है कि जिला प्रशासन महज कलायत नगर में कार्रवाई को अंजाम देकर सौतेला व्यवहार कर रहा है।
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सचिव सुशील भुक्कल ने बताया कि नगर में छह तालाबों से कब्जे हटाने का अभियान चलाया गया। इस दौरान भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में ड्यूटि मजिस्ट्रेट के निर्देश पर अवैध निर्माणों को ढहाया गया। इस संदर्भ में कुछ लोगों ने उच्च न्यायालय में पक्ष रखा था कि कलायत नगर पालिका क्षेत्र में गैर मुमकिन तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी नगर पालिका पर है। जलाशयों का उपयोग लोग करते आए हैं। कुछ अधिकारियों की शह पर जहां इन्हें बेचा जा रहा है वहीं इन पर हुए अवैध कब्जों के कारण आम जन के हितों की अनदेखी हो रही है।
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उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक नगर पालिका तत्काल अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कदम उठाते हुए इस अचल संपदा को मुक्त करवाए। यह आवश्यक है कि जिला उपायुक्त कैथल दौरा कर गैर मुमकिन तालाब की वस्तु स्थिति का आंकलन करें कि संबंधित क्षेत्र के लोग प्रयुक्त करने से वंचित तो नहीं। लोगों के मुताबिक प्रशासनिक अधिकारियों ने मौका-मुआयना करने बजाए न्यायालय को स्पष्ट रिपोर्ट नहीं भेजी। फलस्वरूप रजिस्ट्री, इंतकाल व अन्य दस्तावेजों के बाद भी आशियानों पर खतरा मंडरा रहा है।
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कब्जे हटवाने के लिए 6 माह की समय सीमा थी तय
16 दिसंबर 2008 को वादी सुभाष और अन्य लोगों के पक्ष की सुनवाई करते हुए सार्वजनिक किए गए महत्वपूर्ण फैसले में प्रतिवादी पक्ष के कुछ लोगों का पक्ष सुनने के आदेश जिला उपायुक्त को पारित किए गए थे। इसमें प्रशासन को 27 मई 2009 तक अवैध कब्जों को हटवाने के आदेश पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय ने दिए थे। लेकिन इस समयावधि में न तो प्रतिवादियों का पक्ष प्रशासन ने सुना और न ही स्थिति को स्पष्ट किया गया।
प्रशासन ने बनाए एक हांठी में दो पेट
भारतीय संविधान के आर्टिकल 226/227 के तहत जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने कलायत स्थित जलाशयों को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त करवाने के आदेश प्रदेश सरकार को दिए थे। इस अहम फैसले का असर प्रदेश के तालाबों पर किए गए अवैध कब्जों पर होना था। प्रभावितों का आरोप है कि जिला प्रशासन महज कलायत नगर में कार्रवाई को अंजाम देकर सौतेला व्यवहार कर रहा है।