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Kaithal News: सरकार न देगी साथ तो कैसे बिछेगी बिसात
Sat, 20 Jul 2024 05:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 20 Jul 2024 05:51 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्रदेश में भले ही कुश्ती सहित अन्य खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन शतरंज का खेल अनदेखी का शिकार है। यही कारण है कि जिले में न तो इसके लिए कोई प्रशिक्षण केंद्र है और न ही सरकारी स्तर पर कोच उपलब्ध है। ऐसे में शतरंज के खिलाड़ियों को विभिन्न मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। शतरंज के बढ़ते क्रेज के बीच खिलाड़ी आनलाइन अभ्यास करने को मजबूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस शनिवार को है। यह एक हाई प्रोफाइल खेल है। माना जाता है कि इससे बच्चों का मानसिक विकास होता है। खासतौर पर जो खिलाड़ी कठिन शारीरिक परिश्रम वाले खेल में सक्षम नहीं होते उनके लिए शतरंज अधिक उपयोगी होता है। जिले में भी शतरंज के खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन यहां कोई सरकारी कोच न होने की वजह से अनेक खिलाड़ी कोचिंग लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। खिलाड़ी इस खेल के लिए ऑनलाइन के माध्यम से दूसरे राज्यों के निजी कोच से खेल की बारीकियां सीखने को मजबूर हैं। कई खिलाड़ियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले का नाम रोशन भी किया है। उनका कहना है कि दुर्भाग्यपूर्ण बात है की सरकार की ओर से कैथल में शतरंज खेल का कोई सेंटर और कोच नहीं है। इससे शतरंज के खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है और इस खेल में आगे बढ़ने की राह में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शतंरज खिलाड़ियों के साथ उनके परिजनों की भी सरकार से मांग है कि शतरंज खेल के लिए आवश्यक सुविधाएं जल्द मुहैया कराई जाए। इस संबंध में जिला खेल अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि शतरंज एक अंतरराष्ट्रीय खेल है और ओलंपिक में भी शामिल है, लेकिन हमारे यहां इस खेल का कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं है, जो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलता हो।
कई प्रतियोगिताओं में अक्ष जीत चुके हैं पदक
शतरंज खिलाड़ी अक्ष सातवीं कक्षा में पढ़ता है। वह पिछले दो वर्षों से शतरंज खेल रहा है। कई प्रतियोगिताओं में भाग भी ले चुका है और पदक जीत चुका है। फिलहाल वह मोबाइल और कंप्यूटर पर ऑनलाइन कोचिंग लेकर खेल का अभ्यास करता है। इसके अलावा कई अन्य खिलाड़ी भी यूट्यूब के माध्यम से शतरंज सीख रहे हैं।
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यू-ट्यूब से शतरंज सीख रहा हिमांशु
शतरंज खिलाड़ी हिमांशु वर्मा नौवीं कक्षा में पढ़ता है। वह कुछ वर्षों से शतरंज खेलता है। वह प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका है और फिलहाल यू-ट्यूब के माध्यम से ही शतरंज सीखता है और इसके लिए ऑनलाइन अभ्यास करता है। उसका कहना है कि ऑनलाइन यह खेल सीखने में बड़ी समस्याएं आती हैं। अगर सरकार खेल सेंटर और कोच की व्यवस्था करे तो बेहतर प्रदर्शन संभव है।
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कैथल। प्रदेश में भले ही कुश्ती सहित अन्य खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन शतरंज का खेल अनदेखी का शिकार है। यही कारण है कि जिले में न तो इसके लिए कोई प्रशिक्षण केंद्र है और न ही सरकारी स्तर पर कोच उपलब्ध है। ऐसे में शतरंज के खिलाड़ियों को विभिन्न मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। शतरंज के बढ़ते क्रेज के बीच खिलाड़ी आनलाइन अभ्यास करने को मजबूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस शनिवार को है। यह एक हाई प्रोफाइल खेल है। माना जाता है कि इससे बच्चों का मानसिक विकास होता है। खासतौर पर जो खिलाड़ी कठिन शारीरिक परिश्रम वाले खेल में सक्षम नहीं होते उनके लिए शतरंज अधिक उपयोगी होता है। जिले में भी शतरंज के खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन यहां कोई सरकारी कोच न होने की वजह से अनेक खिलाड़ी कोचिंग लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। खिलाड़ी इस खेल के लिए ऑनलाइन के माध्यम से दूसरे राज्यों के निजी कोच से खेल की बारीकियां सीखने को मजबूर हैं। कई खिलाड़ियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले का नाम रोशन भी किया है। उनका कहना है कि दुर्भाग्यपूर्ण बात है की सरकार की ओर से कैथल में शतरंज खेल का कोई सेंटर और कोच नहीं है। इससे शतरंज के खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है और इस खेल में आगे बढ़ने की राह में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शतंरज खिलाड़ियों के साथ उनके परिजनों की भी सरकार से मांग है कि शतरंज खेल के लिए आवश्यक सुविधाएं जल्द मुहैया कराई जाए। इस संबंध में जिला खेल अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि शतरंज एक अंतरराष्ट्रीय खेल है और ओलंपिक में भी शामिल है, लेकिन हमारे यहां इस खेल का कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं है, जो राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलता हो।
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कई प्रतियोगिताओं में अक्ष जीत चुके हैं पदक
शतरंज खिलाड़ी अक्ष सातवीं कक्षा में पढ़ता है। वह पिछले दो वर्षों से शतरंज खेल रहा है। कई प्रतियोगिताओं में भाग भी ले चुका है और पदक जीत चुका है। फिलहाल वह मोबाइल और कंप्यूटर पर ऑनलाइन कोचिंग लेकर खेल का अभ्यास करता है। इसके अलावा कई अन्य खिलाड़ी भी यूट्यूब के माध्यम से शतरंज सीख रहे हैं।
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यू-ट्यूब से शतरंज सीख रहा हिमांशु
शतरंज खिलाड़ी हिमांशु वर्मा नौवीं कक्षा में पढ़ता है। वह कुछ वर्षों से शतरंज खेलता है। वह प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका है और फिलहाल यू-ट्यूब के माध्यम से ही शतरंज सीखता है और इसके लिए ऑनलाइन अभ्यास करता है। उसका कहना है कि ऑनलाइन यह खेल सीखने में बड़ी समस्याएं आती हैं। अगर सरकार खेल सेंटर और कोच की व्यवस्था करे तो बेहतर प्रदर्शन संभव है।