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गांव सजूमा स्थित सुखदेव मुनि मंदिर की श्रद्धालुओं में अपार आस्था
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historical place
- फोटो : Kaithal
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गांव सजूमा में स्थित ऐतिहासिक सुखदेव मुनि मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर के साथ आसपास के कई गांवों के श्रद्धालुओं की श्रद्धा जुड़ी है। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर में पूजा पाठ करने से लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के साथ तालाब भी बना हुआ है, जिस पर पुल बनाकर मंदिर में जाने का रास्ता तैयार किया गया है। धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान है। श्रद्धालु मंदिर के पास बने तालाब में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं।
करीब 2200 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास : मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुनील ने बताया कि मंदिर का इतिहास लगभग 2200 साल पुराना है। प्राचीन मान्यता के अनुसार मंदिर स्थित गुफा में सुखदेव मुनि ने तपस्या की थी। अभी तक मंदिर की इस गुफा में सुखदेव मुनि की प्राचीन प्रतिमा है। ऐसा माना जाता है कि सुखदेव मुनि के नाम पर ही सजूमा गांव बसा था। तब से लेकर अब तक गांव के लोग मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं। विभिन्न त्योहारों पर यहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मंदिर को जीर्णोद्धार की दरकार: पुजारी ने बताया कि मंदिर को जीर्णोद्धार की जरूरत है, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल का पहचान मिल सके। मंदिर का सरोवर जर्जर होने की कगार पर है। पुजारी ने कहा कि आज तक प्रशासन की ओर से भी तीर्थ की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। कई नेताओं ने मंदिर का कायाकल्प करवाने के दावे किए, लेकिन मंदिर को लेकर कोई कार्य नहीं करवाया गया है। उन्होंने प्राचीन सरोवर के चारों ओर लाइटें लगवाने और इसका सुंदरीकरण करवाने की मांग की है ताकि पूजा पाठ करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को और ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।
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करीब 2200 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास : मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सुनील ने बताया कि मंदिर का इतिहास लगभग 2200 साल पुराना है। प्राचीन मान्यता के अनुसार मंदिर स्थित गुफा में सुखदेव मुनि ने तपस्या की थी। अभी तक मंदिर की इस गुफा में सुखदेव मुनि की प्राचीन प्रतिमा है। ऐसा माना जाता है कि सुखदेव मुनि के नाम पर ही सजूमा गांव बसा था। तब से लेकर अब तक गांव के लोग मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं। विभिन्न त्योहारों पर यहां धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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मंदिर को जीर्णोद्धार की दरकार: पुजारी ने बताया कि मंदिर को जीर्णोद्धार की जरूरत है, ताकि इस ऐतिहासिक स्थल का पहचान मिल सके। मंदिर का सरोवर जर्जर होने की कगार पर है। पुजारी ने कहा कि आज तक प्रशासन की ओर से भी तीर्थ की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। कई नेताओं ने मंदिर का कायाकल्प करवाने के दावे किए, लेकिन मंदिर को लेकर कोई कार्य नहीं करवाया गया है। उन्होंने प्राचीन सरोवर के चारों ओर लाइटें लगवाने और इसका सुंदरीकरण करवाने की मांग की है ताकि पूजा पाठ करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को और ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।
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