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कोटे से आधे भी नहीं मिल रहे सिलिंडर, ऑक्सीजन बिना कैसे चलें मरीजों की सांसें
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जिले को अलॉट दो एमटी ऑक्सीजन के कोटे में से पिछले कई दिनों में पूरा कोटा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिला प्रशासन को जिले के कोटे को हासिल करने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। कभी कुरुक्षेत्र, कभी अंबाला, कभी जींद और कभी करनाल जाकर जिला प्रशासन की टीम द्वारा ऑक्सीजन के सिलिंडर का प्रबंध करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा कारण जिले में एक भी सिलिंडर रिफिल करने का प्वाइंट नहीं हैं। जिस कारण भी ऑक्सीजन की गाड़ी आने के बावजूद दूसरे जिलों में जाकर सिलिंडर भरवाने पड़ रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिले को अलॉट ऑक्सीजन का कोटा 2 एमटी है। जिसमें करीब 200 से 216 तक सिलिंडर भर सकते हैं। इस कोटे को हासिल करने के लिए प्रशासनिक टीम को आरटीए सचिव सत्यवान मान की अगुवाई में खूब मशक्कत करनी पड़ रही है। एक मई को जिले को 200 में से 93, दो मई को 93, 3 मई को 105 ऑक्सीजन सिलिंडर प्राप्त हुए। पहले कुरुक्षेत्र जिले से ऑक्सीजन के सिलिंडर दिए गए। इसके अगले दिन करनाल, फिर अंबाला और फिर जींद तक भी टीम को जाना पड़ा। 3 मई को अंबाला जाकर टीम को पता चला कि सिलिंडर कुरुक्षेत्र से दिए जाएंगे। इसके बाद डीसी सुजान सिंह ने टीम को अंबाला से कुरुक्षेत्र भेजा। तब जाकर 105 सिलिंडर प्राप्त हुए।
अभी तक कमी नहीं, लेकिन आने वाले समय के लिए जरूरत के लिए पूरा कोटा मिलना जरूरी
जिले में अभी तक ऑक्सीजन की कमी नहीं हैं, लेकिन सरकार द्वारा जो कोटा दिया गया है, वह पूरा मिल जाए तो आने वाले समय की जरूरत को देखते हुए ऑक्सीजन पूरी मात्रा में रिजर्व में रहेगी। जिला प्रशासन द्वारा डीसी की अगुवाई में प्रयास किया जा रहा है कि जिले को पूरा कोटा मिले।
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जिले में ऑक्सीजन टैंकर से सिलिंडर में गैस भरने के लिए एक भी रिफिल प्वाइंट नहीं हैं। जिस कारण सिलिंडर भरवाने के लिए जींद, कुरुक्षेत्र, करनाल या अंबाला जाना पड़ता है। यह भी सिलिंडर हासिल करने में एक बड़ी समस्या आ रही है। डीसी सुजान सिंह ने कहा कि जिले में अभी तक ऑक्सीजन जरूरत के अनुसार उपलब्ध है। एक-दो दिन से कुछ कम कोटा प्राप्त हुआ है। जितनी हमें अभी चाहिए, वह पूरी है। लेकिन जिले के कोटे को बढ़ाया जाए और जो कोटा निर्धारित है, उसे पूरा दिया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को लिखा गया है। सरकारी तौर पर तो रिफिल प्वाइंट बनाए जाने के प्रयास किए ही जाएंगे, साथ ही जिले के उद्यमियों से भी अपील है कि वे ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल प्वाइंट बना सकते हैं।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिले को अलॉट ऑक्सीजन का कोटा 2 एमटी है। जिसमें करीब 200 से 216 तक सिलिंडर भर सकते हैं। इस कोटे को हासिल करने के लिए प्रशासनिक टीम को आरटीए सचिव सत्यवान मान की अगुवाई में खूब मशक्कत करनी पड़ रही है। एक मई को जिले को 200 में से 93, दो मई को 93, 3 मई को 105 ऑक्सीजन सिलिंडर प्राप्त हुए। पहले कुरुक्षेत्र जिले से ऑक्सीजन के सिलिंडर दिए गए। इसके अगले दिन करनाल, फिर अंबाला और फिर जींद तक भी टीम को जाना पड़ा। 3 मई को अंबाला जाकर टीम को पता चला कि सिलिंडर कुरुक्षेत्र से दिए जाएंगे। इसके बाद डीसी सुजान सिंह ने टीम को अंबाला से कुरुक्षेत्र भेजा। तब जाकर 105 सिलिंडर प्राप्त हुए।
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अभी तक कमी नहीं, लेकिन आने वाले समय के लिए जरूरत के लिए पूरा कोटा मिलना जरूरी
जिले में अभी तक ऑक्सीजन की कमी नहीं हैं, लेकिन सरकार द्वारा जो कोटा दिया गया है, वह पूरा मिल जाए तो आने वाले समय की जरूरत को देखते हुए ऑक्सीजन पूरी मात्रा में रिजर्व में रहेगी। जिला प्रशासन द्वारा डीसी की अगुवाई में प्रयास किया जा रहा है कि जिले को पूरा कोटा मिले।
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जिले में ऑक्सीजन टैंकर से सिलिंडर में गैस भरने के लिए एक भी रिफिल प्वाइंट नहीं हैं। जिस कारण सिलिंडर भरवाने के लिए जींद, कुरुक्षेत्र, करनाल या अंबाला जाना पड़ता है। यह भी सिलिंडर हासिल करने में एक बड़ी समस्या आ रही है। डीसी सुजान सिंह ने कहा कि जिले में अभी तक ऑक्सीजन जरूरत के अनुसार उपलब्ध है। एक-दो दिन से कुछ कम कोटा प्राप्त हुआ है। जितनी हमें अभी चाहिए, वह पूरी है। लेकिन जिले के कोटे को बढ़ाया जाए और जो कोटा निर्धारित है, उसे पूरा दिया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को लिखा गया है। सरकारी तौर पर तो रिफिल प्वाइंट बनाए जाने के प्रयास किए ही जाएंगे, साथ ही जिले के उद्यमियों से भी अपील है कि वे ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिल प्वाइंट बना सकते हैं।