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केवल संगठित जन आंदोलनों की भाषा समझती हैं सरकारें : कामरेड राजकुमार
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07 ढांड 01 बैठक में भाग लेते हुए कार्यकर्ता।
- फोटो : 1
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ढांड। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) की राज्य कमेटी की बैठक में किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के मुद्दों के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने यह साबित कर दिया है कि सरकारें केवल संगठित जनआंदोलनों की भाषा समझती हैं। इसलिए गांव से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक जन संघर्ष समितियों का गठन किया जाएगा और किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
संगठन के जिलाध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा और जिला सचिव कामरेड कृष्ण चंद ने कहा कि किसानों को सी 2+50 प्रतिशत फाॅर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्ज मुक्ति, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, बुढ़ापा पेंशन में वृद्धि, बिजली कानून वापस लेने और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में बनाए गए बीज कानून को रद्द करने की मांगों पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी और एकाधिकार पूंजीपतियों के पक्ष में मानी जा रही अमेरिका-भारत डील को भी रद्द किया जाना चाहिए। इन सभी मांगों के लिए प्रदेशभर में एक सशक्त किसान-मजदूर आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता पर बैठक में विस्तार से चर्चा की गई।
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बैठक में संगठन के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें राजकुमार (कैथल), रोहतास (भिवानी), हंसराज राणा (सोनीपत), रामकुमार (रेवाड़ी), व्रतपाल (महेंद्रगढ़), विजय कुमार, जयकरण, सुरेश, सत्यवीर, मास्टर बस्तीराम, फूल सिंह और राजबीर प्रमुख रूप से शामिल रहे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेशभर में जन अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिला संगठनों को एक मंच पर लाने के लिए आगामी समय में रोहतक में प्रदेश स्तरीय महापंचायत आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस महापंचायत के माध्यम से व्यापक जन आंदोलन की नींव रखी जाएगी और सरकार पर जनहित की मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जाएगा।
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संगठन के जिलाध्यक्ष कामरेड राजकुमार सारसा और जिला सचिव कामरेड कृष्ण चंद ने कहा कि किसानों को सी 2+50 प्रतिशत फाॅर्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्ज मुक्ति, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, बुढ़ापा पेंशन में वृद्धि, बिजली कानून वापस लेने और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हित में बनाए गए बीज कानून को रद्द करने की मांगों पर जोर दिया गया।
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उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनविरोधी और एकाधिकार पूंजीपतियों के पक्ष में मानी जा रही अमेरिका-भारत डील को भी रद्द किया जाना चाहिए। इन सभी मांगों के लिए प्रदेशभर में एक सशक्त किसान-मजदूर आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता पर बैठक में विस्तार से चर्चा की गई।
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बैठक में संगठन के विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें राजकुमार (कैथल), रोहतास (भिवानी), हंसराज राणा (सोनीपत), रामकुमार (रेवाड़ी), व्रतपाल (महेंद्रगढ़), विजय कुमार, जयकरण, सुरेश, सत्यवीर, मास्टर बस्तीराम, फूल सिंह और राजबीर प्रमुख रूप से शामिल रहे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेशभर में जन अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिला संगठनों को एक मंच पर लाने के लिए आगामी समय में रोहतक में प्रदेश स्तरीय महापंचायत आयोजित की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि इस महापंचायत के माध्यम से व्यापक जन आंदोलन की नींव रखी जाएगी और सरकार पर जनहित की मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जाएगा।