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Kaithal News: मार्च मेें चार और बसें होंगी जर्जर, घटेगा डिपो का बेड़ा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। रोडवेज डिपो का बस बेड़ा एक बार फिर घटने जा रहा है। मार्च माह में चार और बसें 10 वर्ष की निर्धारित वैधता पूरी करने के बाद जर्जर घोषित कर रूटों से हटा दी जाएंगी। इनके हटने से विशेष रूप से लोकल रूटों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
अगस्त से अब तक कैथल डिपो की कुल 70 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 12 बसें, सितंबर में 30, अक्तूबर में 12, दिसंबर में नौ और जनवरी में सात बसों ने अपनी निर्धारित 10 वर्ष की वैधता पूरी कर ली थी, जिन्हें रूटों से हटा दिया गया।
10 वर्ष की वैधता पूरी कर चुकी बसों का निरीक्षण मुख्यालय द्वारा गठित तकनीकी टीम करती है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही बसों को जर्जर घोषित कर रूट से हटाया जाता है। हालांकि डिपो प्रबंधन की ओर से नई बसों की मांग मुख्यालय को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक पर्याप्त संख्या में नई बसें उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।
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वर्तमान में डिपो के पास 169 बसें ही संचालित हैं, जबकि जनसंख्या और यात्री भार के अनुसार लगभग 250 बसों की आवश्यकता है। इस हिसाब से डिपो को कम से कम 70 नई बसों की दरकार है। इनमें से केवल 73 बसें ही अपेक्षाकृत नई अवस्था में हैं, जबकि शेष बसें पुरानी और जर्जर हालत में हैं, जिन्हें वर्कशॉप से मरम्मत कर चलाया जा रहा है। यात्रियों रमेश, सुरेश, फूल सिंह और रघुबीर का कहना है कि कई बसें खटारा हालत में हैं और बार-बार खराब हो जाती हैं।
नई बसों की जगह कैथल में पुरानी बसें भेजी जा रही हैं। लंबी दूरी के रूटों पर बसें कई बार खराब हो जाती हैं, जिससे चालक और परिचालक को भी कठिनाई होती है। -संदीप कुमार, रोडवेज कर्मचारी नेता
नई बसों की मांग मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। जल्द नई बसें मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। -अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर
इन रूटों पर होगा बसों की कमी का असर
अमृतसर, बीकानेर, सिरसा, हिसार, पंचकूला, चंडीगढ़, जींद, असंध और कुरुक्षेत्र रूटों पर बसों की कमी साफ दिखाई दे रही है। बसों की संख्या घटने के कारण कई रूटों के चक्कर बंद कर दिए गए हैं। दोपहर बाद यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बसों में अत्यधिक भीड़ उमड़ रही है और कई बार यात्रियों को खिड़कियों के पास खड़े होकर या लटककर सफर करना पड़ता है।
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कैथल। रोडवेज डिपो का बस बेड़ा एक बार फिर घटने जा रहा है। मार्च माह में चार और बसें 10 वर्ष की निर्धारित वैधता पूरी करने के बाद जर्जर घोषित कर रूटों से हटा दी जाएंगी। इनके हटने से विशेष रूप से लोकल रूटों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
अगस्त से अब तक कैथल डिपो की कुल 70 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में 12 बसें, सितंबर में 30, अक्तूबर में 12, दिसंबर में नौ और जनवरी में सात बसों ने अपनी निर्धारित 10 वर्ष की वैधता पूरी कर ली थी, जिन्हें रूटों से हटा दिया गया।
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10 वर्ष की वैधता पूरी कर चुकी बसों का निरीक्षण मुख्यालय द्वारा गठित तकनीकी टीम करती है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही बसों को जर्जर घोषित कर रूट से हटाया जाता है। हालांकि डिपो प्रबंधन की ओर से नई बसों की मांग मुख्यालय को भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक पर्याप्त संख्या में नई बसें उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।
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वर्तमान में डिपो के पास 169 बसें ही संचालित हैं, जबकि जनसंख्या और यात्री भार के अनुसार लगभग 250 बसों की आवश्यकता है। इस हिसाब से डिपो को कम से कम 70 नई बसों की दरकार है। इनमें से केवल 73 बसें ही अपेक्षाकृत नई अवस्था में हैं, जबकि शेष बसें पुरानी और जर्जर हालत में हैं, जिन्हें वर्कशॉप से मरम्मत कर चलाया जा रहा है। यात्रियों रमेश, सुरेश, फूल सिंह और रघुबीर का कहना है कि कई बसें खटारा हालत में हैं और बार-बार खराब हो जाती हैं।
नई बसों की जगह कैथल में पुरानी बसें भेजी जा रही हैं। लंबी दूरी के रूटों पर बसें कई बार खराब हो जाती हैं, जिससे चालक और परिचालक को भी कठिनाई होती है। -संदीप कुमार, रोडवेज कर्मचारी नेता
नई बसों की मांग मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। जल्द नई बसें मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। -अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर
इन रूटों पर होगा बसों की कमी का असर
अमृतसर, बीकानेर, सिरसा, हिसार, पंचकूला, चंडीगढ़, जींद, असंध और कुरुक्षेत्र रूटों पर बसों की कमी साफ दिखाई दे रही है। बसों की संख्या घटने के कारण कई रूटों के चक्कर बंद कर दिए गए हैं। दोपहर बाद यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बसों में अत्यधिक भीड़ उमड़ रही है और कई बार यात्रियों को खिड़कियों के पास खड़े होकर या लटककर सफर करना पड़ता है।