{"_id":"621fc1f3a26c6d50bf2fab29","slug":"four-minors-waiting-to-be-rebuilt-for-30-years-will-be-built-anew-kaithal-news-knl1006635189","type":"story","status":"publish","title_hn":"करीब 30 वर्ष से पुनर्निर्माण की बाट जोह रही जिले की चार माइनरों का होगा नए सिरे से निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करीब 30 वर्ष से पुनर्निर्माण की बाट जोह रही जिले की चार माइनरों का होगा नए सिरे से निर्माण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। करीब 30 वर्ष से पुनर्निर्माण की बाट जोह रहीं जिले की चार माइनरों का नए सिरे से निर्माण होगा। सिंचाई विभाग ने चारों माइनरों को कंकरीट से बनाने का निर्णय लिया है। इनमें जाखौली, सोंगरी, कोटड़ा और किच्छाना माइनर का नाम शामिल है। विभाग धान का सीजन शुरू होने से पहले इन माइनरों को बनाने की तैयारी में है। किसानों की मांग को देखते हुए सिंचाई विभाग ने इन माइनरों के निर्माण के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है।
सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इन चारों माइनरों का निर्माण वर्ष 1980 से पहले किया गया था। उस समय इन्हें ईंटों से बनाया गया था। निर्माण के 10 वर्ष तक तो ये ठीकठाक रहीं लेकिन पिछले 30 वर्ष से कभी लीकेज तो कभी माइनरों के किनारे टूटने की समस्याएं सामने आईं। इसके कारण किसानों को भी साथ लगे खेतों में पानी घुसने और फसल को नुकसान होने का डर रहता है।
चारों माइनरों में हाबड़ी और सिरसा ब्रांच नहर से पानी आता है। माइनर पुरानी और इनकी लंबाई ज्यादा होने के कारण अंतिम छोर तक पानी भी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में विभाग ने इनका नए सिरे से निर्माण करने की कार्ययोजना तैयार की है। धान के सीजन में किसानों को पानी की जरूरत भी ज्यादा पड़ती है। इसलिए विभाग किसानों की सुविधा को देखते हुए इस कार्य को जल्द से जल्द करने के प्रयास में है।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन बलराज चौहान व एसडीओ अरुण कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से इन माइनरों के निर्माण से संबंधित प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। प्रस्ताव पास होते ही निर्माण से संबंधित प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इन चारों माइनरों का निर्माण वर्ष 1980 से पहले किया गया था। उस समय इन्हें ईंटों से बनाया गया था। निर्माण के 10 वर्ष तक तो ये ठीकठाक रहीं लेकिन पिछले 30 वर्ष से कभी लीकेज तो कभी माइनरों के किनारे टूटने की समस्याएं सामने आईं। इसके कारण किसानों को भी साथ लगे खेतों में पानी घुसने और फसल को नुकसान होने का डर रहता है।
विज्ञापन
चारों माइनरों में हाबड़ी और सिरसा ब्रांच नहर से पानी आता है। माइनर पुरानी और इनकी लंबाई ज्यादा होने के कारण अंतिम छोर तक पानी भी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में विभाग ने इनका नए सिरे से निर्माण करने की कार्ययोजना तैयार की है। धान के सीजन में किसानों को पानी की जरूरत भी ज्यादा पड़ती है। इसलिए विभाग किसानों की सुविधा को देखते हुए इस कार्य को जल्द से जल्द करने के प्रयास में है।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन बलराज चौहान व एसडीओ अरुण कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से इन माइनरों के निर्माण से संबंधित प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। प्रस्ताव पास होते ही निर्माण से संबंधित प्रक्रिया शुरू की जाएगी।