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क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के विरोध में गरजे किसान
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former protest
- फोटो : Kaithal
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केंद्र सरकार द्वारा 15 देशों के साथ किए जाने वाले क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते के विरोध में किसानों ने लघु सचिवालय में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार से समझौते पर हस्ताक्षर न करने की मांग को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा। किसानों ने एसडीएम कमलप्रीत कौर को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन में शामिल किसान होशियार गिल, जसविंद्र सिंह, बलवान सिंह, सतपाल, कृष्ण, जगवीर सिंह व शमशेर ने बताया कि सरकार इस समझौते के तहत 15 देशों के साथ मुफ्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर विचार कर रही है। इससे किसानों और मजदूरों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस समझौते से कृषि व अन्य उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे देश में विदेशी उत्पादों की भरमार हो जाएगी। कृषि, डेयरी, फार्मिंग व छोटे उद्योगों में देश में बनने वाले उत्पादों की महता खत्म हो जाएगी और उनके स्थानों पर विदेशी उत्पाद आ जाएंगे। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
समझौते के कारण पहले ही घाटे से जूझ रहे हैं कई देश :
किसानों ने कहा कि इस समझौते के कारण 11 देश तो वर्तमान में भी घाटे से जूझ रहे हैं। भारी मात्रा में देश में बाहर के उत्पाद आने के कारण वहां ऐसी स्थिति बनी है। इसके माध्यम से कृषि को अन्य क्षेत्रों में लाभ पाने के लिए बली का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों में इसका विरोध है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार इस समझौते पर हस्ताक्षर न करे। उन्होंने ज्ञापन की एक प्रति प्रधानमंत्री के नाम भी प्रेषित की।
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एसडीएम कमलप्रीत कौर ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके मांगपत्र को वाणिज्य मंत्री तक पहुंचाया जाएगा। किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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प्रदर्शन में शामिल किसान होशियार गिल, जसविंद्र सिंह, बलवान सिंह, सतपाल, कृष्ण, जगवीर सिंह व शमशेर ने बताया कि सरकार इस समझौते के तहत 15 देशों के साथ मुफ्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर विचार कर रही है। इससे किसानों और मजदूरों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस समझौते से कृषि व अन्य उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे देश में विदेशी उत्पादों की भरमार हो जाएगी। कृषि, डेयरी, फार्मिंग व छोटे उद्योगों में देश में बनने वाले उत्पादों की महता खत्म हो जाएगी और उनके स्थानों पर विदेशी उत्पाद आ जाएंगे। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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समझौते के कारण पहले ही घाटे से जूझ रहे हैं कई देश :
किसानों ने कहा कि इस समझौते के कारण 11 देश तो वर्तमान में भी घाटे से जूझ रहे हैं। भारी मात्रा में देश में बाहर के उत्पाद आने के कारण वहां ऐसी स्थिति बनी है। इसके माध्यम से कृषि को अन्य क्षेत्रों में लाभ पाने के लिए बली का बकरा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों में इसका विरोध है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार इस समझौते पर हस्ताक्षर न करे। उन्होंने ज्ञापन की एक प्रति प्रधानमंत्री के नाम भी प्रेषित की।
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एसडीएम कमलप्रीत कौर ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनके मांगपत्र को वाणिज्य मंत्री तक पहुंचाया जाएगा। किसानों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से हर संभव प्रयास किया जाएगा।