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धान से अटी अनाज मंडी, कीमत कम मिलने से किसान परेशान
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आढ़तियों की हड़ताल खुलने के बाद मंडी में धान की आवक ने जोर पकड़ लिया है। बुधवार को नई अनाज मंडी पूरी तरह से धान से अट गई। वहीं पुरानी अनाज मंडी में भी 1509 व पीआर ग्रुप की धान की आवक हो रही है। आवक ज्यादा होने व मार्केट कमेटी फीस में खरीदारों को 3 प्रतिशत की राहत के बावजूद कीमत नहीं बढ़ रही हैं। जिस कारण किसान परेशान हैं। जो धान पिछले साल 2900 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था, वह इस बार 1900 रुपये अधिकतम बिक रहा है।
नई अनाज मंडी में पहुंचे किसान सतनाम ने कहा कि वह तीन दिन से मंडी में धान लेकर बैठा है। मंगलवार को 1900 रुपये से अधिक की कीमत थी। बुधवार को यह कम होकर 1800 रुपये रह गई। आसमान में छाए बादलों के कारण उसे अपनी 5 एकड़ की धान 1770 रुपये प्रति क्विंटल बेचनी पड़ी। इस तरह से एक दिन में सीधा उसे 10000 रुपये का नुकसान है। पिछले साल यही धान 2900 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। जिस कारण उसकी लागत भी पूरी नहीं होगी।
इसी प्रकार से एक अन्य किसान रामचरण ने कहा कि दो दिन पहले तक 1509 धान ही 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। लेकिन अब यह गिरकर 1800 ही रह गया है। कीमत बढ़ने की बजाए घट रही है। जिस कारण किसान परेशान हैं।
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किसान सुरेश कुमार ने कहा कि वह पीआर ग्रुप की धान लेकर आया है। लेकिन अभी इसकी खरीद शुरू नहीं हुई है। जिस कारण वे परेशान हैं। सरकारी खरीद 1 अक्तूबर को शुरू होगी, तब तक यदि मंडी में ही धान पड़ा रहा तो उन्हें भारी नुकसान होगा। इसीलिए इसे कम कीमत पर ही बेचना पड़ेगा।
पीआर ग्रुप के नहीं हैं खरीददार : मंडी में एक और बात सामने आई कि सरकारी खरीद से पहले जिस पीआर धान को व्यापारी हाथों-हाथ लेते थे, उसे इस बार अभी तक कोई नहीं खरीद रहा है। जिस कारण यह है कि सरकार द्वारा केवल उन्हीं किसानों की सरकारी खरीद की बात कही गई है, जिन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर जानकारी दी हुई है। ऐसे में आढ़ती इस डर में सरकारी खरीद से पहले पीआर ग्रुप की खरीद नहीं कर रहे कि कहीं बाद में जांच आदि हो और किसान की जानकारी पोर्टल पर ना हो और उसके लिए एमएसपी ना मिले। ऐसे में सरकारी खरीद शुरू होने तक किसानों को पीआर ग्रुप बेचने में परेशानी आ सकती है।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि सरकार ने मार्केट फीस में तीन प्रतिशत की जो राहत दी है, उससे आढ़तियों को अपनी रोजी-रोटी चलाने का अवसर मिल गया है। क्योंकि यदि मंडी में खरीद पर 4 प्रतिशत की फीस लगती तो व्यापारी मंडी की बजाए बाहर से सीधा खरीद करता। अब 1 प्रतिशत की फीस पर व्यापारी को आढ़ती द्वारा खरीद कार्य की जिम्मेवारी का कवर भी मिलता है। इसीलिए आढ़तियों को राहत मिली है। इस समय 1509 की आवक हो रही है। जिसे निजी खरीददार खरीद रहे हैं। यह सही बात है कि कीमत पिछले साल से कम है। पीआर ग्रुप का इस समय खरीददार ना के बराबर है।
मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार का कहना है कि इस समय 1509 की आवक अधिक है। सांय तक आवक का डाटा अपडेट होगा। सरकारी खरीद 1 अक्तूबर से होगी। निजी व्यापारी मार्केट में मांग और आपूर्ति के हिसाब से कीमत देकर धान की खरीद कर रहे हैं।
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नई अनाज मंडी में पहुंचे किसान सतनाम ने कहा कि वह तीन दिन से मंडी में धान लेकर बैठा है। मंगलवार को 1900 रुपये से अधिक की कीमत थी। बुधवार को यह कम होकर 1800 रुपये रह गई। आसमान में छाए बादलों के कारण उसे अपनी 5 एकड़ की धान 1770 रुपये प्रति क्विंटल बेचनी पड़ी। इस तरह से एक दिन में सीधा उसे 10000 रुपये का नुकसान है। पिछले साल यही धान 2900 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था। जिस कारण उसकी लागत भी पूरी नहीं होगी।
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इसी प्रकार से एक अन्य किसान रामचरण ने कहा कि दो दिन पहले तक 1509 धान ही 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। लेकिन अब यह गिरकर 1800 ही रह गया है। कीमत बढ़ने की बजाए घट रही है। जिस कारण किसान परेशान हैं।
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किसान सुरेश कुमार ने कहा कि वह पीआर ग्रुप की धान लेकर आया है। लेकिन अभी इसकी खरीद शुरू नहीं हुई है। जिस कारण वे परेशान हैं। सरकारी खरीद 1 अक्तूबर को शुरू होगी, तब तक यदि मंडी में ही धान पड़ा रहा तो उन्हें भारी नुकसान होगा। इसीलिए इसे कम कीमत पर ही बेचना पड़ेगा।
पीआर ग्रुप के नहीं हैं खरीददार : मंडी में एक और बात सामने आई कि सरकारी खरीद से पहले जिस पीआर धान को व्यापारी हाथों-हाथ लेते थे, उसे इस बार अभी तक कोई नहीं खरीद रहा है। जिस कारण यह है कि सरकार द्वारा केवल उन्हीं किसानों की सरकारी खरीद की बात कही गई है, जिन्होंने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर जानकारी दी हुई है। ऐसे में आढ़ती इस डर में सरकारी खरीद से पहले पीआर ग्रुप की खरीद नहीं कर रहे कि कहीं बाद में जांच आदि हो और किसान की जानकारी पोर्टल पर ना हो और उसके लिए एमएसपी ना मिले। ऐसे में सरकारी खरीद शुरू होने तक किसानों को पीआर ग्रुप बेचने में परेशानी आ सकती है।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि सरकार ने मार्केट फीस में तीन प्रतिशत की जो राहत दी है, उससे आढ़तियों को अपनी रोजी-रोटी चलाने का अवसर मिल गया है। क्योंकि यदि मंडी में खरीद पर 4 प्रतिशत की फीस लगती तो व्यापारी मंडी की बजाए बाहर से सीधा खरीद करता। अब 1 प्रतिशत की फीस पर व्यापारी को आढ़ती द्वारा खरीद कार्य की जिम्मेवारी का कवर भी मिलता है। इसीलिए आढ़तियों को राहत मिली है। इस समय 1509 की आवक हो रही है। जिसे निजी खरीददार खरीद रहे हैं। यह सही बात है कि कीमत पिछले साल से कम है। पीआर ग्रुप का इस समय खरीददार ना के बराबर है।
मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार का कहना है कि इस समय 1509 की आवक अधिक है। सांय तक आवक का डाटा अपडेट होगा। सरकारी खरीद 1 अक्तूबर से होगी। निजी व्यापारी मार्केट में मांग और आपूर्ति के हिसाब से कीमत देकर धान की खरीद कर रहे हैं।