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गांव धौंस में हजार लड़कों के मुकाबले 1400 बेटियां

Sat, 31 May 2014 12:10 AM IST
कैथल
कैथल Updated Sat, 31 May 2014 12:10 AM IST
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Female ration increased in Kaithal
कैथल। कैथल जिले का गांव धौंस...। कन्या भ्रूण हत्या, आनर किलिंग और घटते लिंगानुपात से जूझ रहे प्रदेश के दूसरे गांवों और जिलों के लिए प्र्रेरणादायक हो सकता है। क्योंकि यहां एक हजार लड़कों के मुकाबले 1400 बेटियां हैं। शुक्रवार को इसी वजह से कैथल जिला सलाहकार समिति की बैठक में गांव को एक लाख रुपये देकर सम्मानित नवाजा गया।
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पीएनडीटी की नोडल अधिकारी डा. रेनू चावला ने बताया कि हरियाणा सरकार की एक योजना के तहत गांव धौंस को लिंगानुपात में एक हजार लड़कों के पीछे 1400 लड़कियां होने पर प्रथम स्थान पाने पर एक लाख रुपये की राशि तथा तितरम को भी एक हजार के पीछे 1200 लड़कियों की उपलब्धि हासिल कर दूसरे स्थान पर रहने के लिए 25 हजार रुपये की धनराशि के पुरस्कार से नवाजा गया है। इसके अतिरिक्त कई गांवों का भी इस बैठक में जिक्र हुआ, जहां लिंगानुपात बराबर यानी एक हजार लड़कों के पीछे एक हजार लड़कियां दर्ज की गई हैं।
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केंद्रीय टीम करेगी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच

सरकार की एक टीम जिला के अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण करेगी। यदि केंद्रों द्वारा अल्ट्रासाउंड के फार्म एफ में अनियमितता बरती गई तो केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी सीएमओ डा. आदित्य स्वरूप गुप्ता ने इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के अपने कार्यालय में पीएनडीटी एक्ट के तहत जिला सलाहकार समिति की बैठक में दी।
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इस बैठक में पीएनडीटी एक्ट की नोडल अधिकारी रेनू चावला सहित समिति के अन्य सदस्यों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि इस माह के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिला में एक हजार लड़कों के पीछे 916 लड़कियां दर्ज करके लिंगानुपात में सुधार दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि इससे पूर्व पिछले माह यह आंकड़ा एक हजार के पीछे 866 लड़कियां आंका गया था। बैठक में हिम्स अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट डा. भावना तथा शाह अस्पताल में डा. अभिषेक अग्रवाल रेडियोलोजिस्ट की नियुक्ति की स्वीकृति पर बैठक में चर्चा की गई। इस अवसर पर पीएनडीटी एक्ट के अन्य सदस्यों में भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान रामप्रसाद बंसल, सहायक सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी महेंद्र खन्ना, विक्रम एडीए, जगमती मलिक, डा. नरेश वर्मा, डा. अनिल अग्रवाल, डा. हमिता, खंड विस्तार शिक्षक राजेश कुमार,  जिला कार्यक्रम प्रबंधक नरेंद्र और पूनम गुगलानी मौजूद रहे।

दो डाक्टर कर रहे हैं शिशु मृत्यु दर के कारणों की जांच
प्रसूति के दौरान जच्चा व बच्चा की मृत्यु दर को कम करने के लिए चंडीगढ़ स्वास्थ्य निदेशालय से विशेष रूप से दो डाक्टर विशेष सर्वेक्षण के लिए भेजे गए हैं। जो प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु के कारणों को जांचकर उसकी रिपोर्ट के आधार पर विशेष कदम उठाने के लिए अपने सुझाव देंगे।


 इन चिकित्सकों में डाक्टर अर्शदीप प्रसव उपरांत माताओं की मृत्यु दर को रोकने तथा डा. जसलीन बच्चों की होने वाली मृत्यु को कम करने के लिए सर्वेक्षण कर रही हैं। इस दौरान ये विभिन्न कारणों से रूबरू होंगी, जिसमें मुख्यतौर पर माताओं में पाई जाने वाली खून की कमी व बच्चों का जरूरी टीकाकरण व अन्य सुविधाओं में पाई जाने वाली कमियों पर पूरी तरह से विचार करके अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। ये दोनों डाक्टर जच्चा-बच्चा को अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेकर उसका आंकलन करके उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
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