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Kaithal News: कपास फसल के प्रबंधन पर किसानों को किया जागरूक
Fri, 05 Sep 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 05 Sep 2025 01:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कृषि विभाग की ओर से कपास की फसल में पोषक तत्व और कीट प्रबंधन के विषय में किसानों को जागरूक करने के लिए एक दिवसीय कपास दिवस का आयोजन किया गया। इसमें असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान ने किसानों को कपास फसल में पोषक तत्वों और कीट प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बिना आवश्यकता के कीटनाशकों का स्प्रे न करें, क्योंकि इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मित्र कीट भी प्रभावित होते हैं। इस समय अग्रणी कपास की फसल में फूल लगने और टिंडे बनने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. विजय नैन ने बताया कि उपकृषि निदेशक डॉ. बाबू लाल और उपमंडल अधिकारी कृषि डॉ. सतीश नारा के दिशा-निर्देश में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का 0.1 प्रतिशत का 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार प्रति एकड़ छिड़काव करें। यूरिया की खाद की मात्रा एक तिहाई फूल डोडी बनने तक और एक तिहाई फूल से टिंडे बनने तक डालें। अगर बिजाई के समय फास्फोरस और पोटाश न डाला गया हो, तो एनपीके 19:19:19 का स्प्रे करें।
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उन्होंने यह भी बताया कि कपास के पत्तों पर सफेद मक्खी 8 या उससे अधिक और हरा तेला प्रति पत्ता 2 या उससे अधिक दिखाई देने पर ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए कीटनाशकों का स्प्रे करें। शुरुआत में तेज कीटनाशकों का प्रयोग न करें। किसान फैरोमैन ट्रैप लगाकर गुलाबी सुंडी जैसे कीटों की मौजूदगी का पता लगा सकते हैं।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. नरेश नैन ने किसानों को धान फसल में आने वाले कीट और बीमारियों जैसे तेला, सीथ ब्लाइट, तना छेदक आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उनकी रोकथाम के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि स्प्रे करते समय दवा और पानी की मात्रा पूरी रखनी चाहिए, ताकि कीट और बीमारियों की सही रोकथाम हो सके। साथ ही किसानों से आह्वान किया कि दवाइयां खरीदते समय पक्का बिल लें।
खंड प्रौद्योगिकी प्रबंधक जोगिंद्र बिहान ने कहा कि किसान अपनी फसलों का समय पर पंजीकरण कराएं, ताकि बिक्री के समय किसी प्रकार की समस्या न आए। विभाग की लाभकारी योजनाओं की जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग की वेबसाइट पर समय-समय पर अपडेट प्राप्त करें।
इसके साथ ही असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर राजेश मोर और सूर्यकांत शर्मा ने जल शक्ति अभियान के तहत पानी की बचत के उपाय किसानों के साथ साझा किए। उन्होंने समय-समय पर खेत की मिट्टी और पानी की जांच कराने की भी सलाह दी।
कार्यक्रम में कृषि पर्यवेक्षक डॉ. ऋषिपाल राणा, राकेश कुंडू, अजय मोर, डॉ. विवेक, प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, ईश्वर सिंह, प्रदीप कुमार, सोहन लाल, संदीप कुमार, भूपेंद्र सिंह, कुलविंदर सहित महिला किसानों ने भी जानकारी प्राप्त की और फसल प्रबंधन के उपायों को अपनाने का संकल्प लिया।
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कलायत। कृषि विभाग की ओर से कपास की फसल में पोषक तत्व और कीट प्रबंधन के विषय में किसानों को जागरूक करने के लिए एक दिवसीय कपास दिवस का आयोजन किया गया। इसमें असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान ने किसानों को कपास फसल में पोषक तत्वों और कीट प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बिना आवश्यकता के कीटनाशकों का स्प्रे न करें, क्योंकि इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मित्र कीट भी प्रभावित होते हैं। इस समय अग्रणी कपास की फसल में फूल लगने और टिंडे बनने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है।
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खंड कृषि अधिकारी डॉ. विजय नैन ने बताया कि उपकृषि निदेशक डॉ. बाबू लाल और उपमंडल अधिकारी कृषि डॉ. सतीश नारा के दिशा-निर्देश में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी कि पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का 0.1 प्रतिशत का 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार प्रति एकड़ छिड़काव करें। यूरिया की खाद की मात्रा एक तिहाई फूल डोडी बनने तक और एक तिहाई फूल से टिंडे बनने तक डालें। अगर बिजाई के समय फास्फोरस और पोटाश न डाला गया हो, तो एनपीके 19:19:19 का स्प्रे करें।
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उन्होंने यह भी बताया कि कपास के पत्तों पर सफेद मक्खी 8 या उससे अधिक और हरा तेला प्रति पत्ता 2 या उससे अधिक दिखाई देने पर ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए कीटनाशकों का स्प्रे करें। शुरुआत में तेज कीटनाशकों का प्रयोग न करें। किसान फैरोमैन ट्रैप लगाकर गुलाबी सुंडी जैसे कीटों की मौजूदगी का पता लगा सकते हैं।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. नरेश नैन ने किसानों को धान फसल में आने वाले कीट और बीमारियों जैसे तेला, सीथ ब्लाइट, तना छेदक आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उनकी रोकथाम के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि स्प्रे करते समय दवा और पानी की मात्रा पूरी रखनी चाहिए, ताकि कीट और बीमारियों की सही रोकथाम हो सके। साथ ही किसानों से आह्वान किया कि दवाइयां खरीदते समय पक्का बिल लें।
खंड प्रौद्योगिकी प्रबंधक जोगिंद्र बिहान ने कहा कि किसान अपनी फसलों का समय पर पंजीकरण कराएं, ताकि बिक्री के समय किसी प्रकार की समस्या न आए। विभाग की लाभकारी योजनाओं की जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग की वेबसाइट पर समय-समय पर अपडेट प्राप्त करें।
इसके साथ ही असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर राजेश मोर और सूर्यकांत शर्मा ने जल शक्ति अभियान के तहत पानी की बचत के उपाय किसानों के साथ साझा किए। उन्होंने समय-समय पर खेत की मिट्टी और पानी की जांच कराने की भी सलाह दी।
कार्यक्रम में कृषि पर्यवेक्षक डॉ. ऋषिपाल राणा, राकेश कुंडू, अजय मोर, डॉ. विवेक, प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, ईश्वर सिंह, प्रदीप कुमार, सोहन लाल, संदीप कुमार, भूपेंद्र सिंह, कुलविंदर सहित महिला किसानों ने भी जानकारी प्राप्त की और फसल प्रबंधन के उपायों को अपनाने का संकल्प लिया।