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Kaithal News: मौसम परिवर्तन से किसान परेशान

Tue, 04 Mar 2025 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 04 Mar 2025 01:28 AM IST
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Farmers troubled by climate change
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। मौसम में हो रहे परिवर्तन के कारण किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हैं। मौसम के संदर्भ में गेहूं की फसल के लिए कृषि विभाग ने एडवाजरी जारी की है। डाॅ. जगबीर लांबा का कहना है कि गेहूं का दाना बनने के लिए उत्तम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस होता है। अभी तापमन ज्यादा नहीं हो, इसलिए किसान परेशान न हों।

उन्होंने बताया कि इस समय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बार बार परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि गेहूं एवं जौ की फसल में दाना बनते समय सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। यदि बारिश की संभावना है तो सिंचाई न करें ताकि खेतों में अनावश्यक जलभराव को रोका जा सके।
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डा.लांबा ने बताया कि जिस समय गेहूं की बालियों में दाना बन रहा होता है उस समय तापमान 22 डिग्री सेल्सियस सबसे अच्छा माना जाता है। इस समय दिन-रात का औसत तापमान 23 डिग्री चल रहा है तो ऐसे में पैदावार को लेकर किसान को घबराने की जरूरत नहीं है।
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गौरतलब है कि तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल जल्दी पक जाती है, जिससे दाने छोटे रह जाते हैं और पैदावार में कमी आती है। गेहूं की फसल में अच्छे जमान के लिए तापमान 16 से 20 डिग्री सेल्सियस माना जाता है। गेहूं की खेती के लिए ठंडी जलवायु और मध्यम वर्षा की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि यदि तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाए तो गेहूं में तापमान से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए दो किलो पोटाशियम नाइट्रेट को 100 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें।

डा.लांबा ने यह भी बताया कि अधिक नमी और तापमान यदि 25 डिग्री से ऊपर जाता है तो गेहूं की फसल में भूरा रतुआ रोग आने की आशंका हो जाती है। ऐसे में किसान अपनी गेहूं की फसल पर नजर रखें और यदि बीमारी के लक्षण फसल में नजर आएं तो जिनेब या मेन्कोजेब नामक दवा 600 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें और छिडक़ाव को 15 दिनों के बाद फिर से दोहराएं।


उन्होंने कहा कि तापमान में अचानक बढ़ोतरी होने और बादलवाई के कारण से यदि गेहूं की फसल में चेपा नामक कीट नजर आए तो 400मिली लीटर क्विनलफास नामक दवा 200 लीटर पानी में स्प्रे करें।
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