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Kaithal News: गणतंत्र दिवस पर किसानों का शक्ति प्रदर्शन, निकाला ट्रैक्टर मार्च
Tue, 28 Jan 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 28 Jan 2025 01:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/गुहला-चीका/पाई/कलायत। गणतंत्र दिवस पर नाराज किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया। इसके तहत उन्होंने चीका, कैथल, राजौंद, पाई व कलायत में ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल समेत अन्य वाहनों से मार्च निकाला।
चीका में निकाले गए ट्रैक्टर मार्च में किसानों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। ट्रैक्टर मार्च निकालने से पहले किसानों ने अरनौली के गुरुद्वारा में अरदास कर माथा टेका। देश भक्ति गीतों के साथ निकले ट्रैक्टर मार्च के साथ किसानों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाय। ट्रैक्टर मार्च के दौरान पुलिस सुरक्षा व खुफिया विभाग पूरी तरह से चाक चौबंद रहा।
भारतीय किसान यूनियन भगत सिंह के स्टेट कोर कमेटी सदस्य जस्सा पूनिया व प्रदेश उपाध्यक्ष तेजेंद्र पूनिया ने कहा कि पिछले 347 दिनों से खनौरी, शंभू बॉर्डरों पर एसपी खरीद गारंटी कानून व किसानों मजदूरों की कर्ज माफी सहित 12 मांगों को लेकर किसान आंदोलन-2 चल रहा है। पिछले 62 दिन से खनौरी मोर्चे पर आमरण अनशन कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सत्याग्रह करके केंद्र सरकार को बातचीत के लिए मजबूर किया है।
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उन्होंने कहा कि अभी हमने एमएसपी गारंटी कानून बनवाने की तरफ कदम रखा है। केंद्र सरकार की बातचीत के लिए चिट्ठी आने के बाद 7 दिनों से सिर्फ डॉक्टरी सहायता ले रहे हैं। मांगें लागू होने तक उनका आमरण-अनशन जारी रहेगा। बताया कि 14 फरवरी को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक के लिए संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) एवं किसान मजदूर मोर्चा के नेता तैयार हैं।
बैठक में मजबूती से तर्क सहित किसानों का पक्ष रखा जाएगा। कहा कि कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति ढांचे (एनपीएफएएम) को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने और ऋण माफी की मांग कर रहे है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार किसानों के साथ विश्वासघात कर रही है। किसान कानून वापस होने के बाद भाजपा सरकार ने जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं किए। इस वजह से गैर-राजनीतिक, केएमएम किसान मोर्चा लगातार आंदोलनरत हैं। इस अवसर पर दलबारा सिंह, मिंया सिंह, गुरप्रीत सिंह, सरपंच कमलप्रीत सिंह, टोनी, सेवा सिंह मौजूद रहे।
वहीं, गणतंत्र दिवस पर पाई के किसानों ने भी ट्रैक्टर मार्च निकाला। सबसे पहले किसान पाई की अनाज मंडी में एकत्र हुए। मंडी में किसानों ने नारेबाजी कर सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्सा जताया। कहा कि उनकी फसल को न तो समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है और न ही एमएसपी घोषित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार भी जहां 24 फसलों को एमएसपी पर खरीद करने का दावा कर रही है, उनमें से कुछ फसल तो प्रदेश में होती ही नहीं है और कुछ काफी कम संख्या में होती है।
मार्च के दौरान जिन किसानों के पास अपने ट्रैक्टर नही थे, उन्होंने अपनी कारों व मोटर साइकिलों के साथ उनका साथ दिया। इस अवसर पर भाकियू के कार्यकारी प्रधान बलवान पाई, अजीत सिंह हाबडी, करतारा राम, दिलबाग,बाला राम, जगदीश, कश्मीर सिंह, किताब सिंह, मुन्ना राम जगमाल बरसाना आदि उपस्थित रहे।
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कैथल/गुहला-चीका/पाई/कलायत। गणतंत्र दिवस पर नाराज किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया। इसके तहत उन्होंने चीका, कैथल, राजौंद, पाई व कलायत में ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल समेत अन्य वाहनों से मार्च निकाला।
चीका में निकाले गए ट्रैक्टर मार्च में किसानों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। ट्रैक्टर मार्च निकालने से पहले किसानों ने अरनौली के गुरुद्वारा में अरदास कर माथा टेका। देश भक्ति गीतों के साथ निकले ट्रैक्टर मार्च के साथ किसानों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाय। ट्रैक्टर मार्च के दौरान पुलिस सुरक्षा व खुफिया विभाग पूरी तरह से चाक चौबंद रहा।
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भारतीय किसान यूनियन भगत सिंह के स्टेट कोर कमेटी सदस्य जस्सा पूनिया व प्रदेश उपाध्यक्ष तेजेंद्र पूनिया ने कहा कि पिछले 347 दिनों से खनौरी, शंभू बॉर्डरों पर एसपी खरीद गारंटी कानून व किसानों मजदूरों की कर्ज माफी सहित 12 मांगों को लेकर किसान आंदोलन-2 चल रहा है। पिछले 62 दिन से खनौरी मोर्चे पर आमरण अनशन कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल ने सत्याग्रह करके केंद्र सरकार को बातचीत के लिए मजबूर किया है।
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उन्होंने कहा कि अभी हमने एमएसपी गारंटी कानून बनवाने की तरफ कदम रखा है। केंद्र सरकार की बातचीत के लिए चिट्ठी आने के बाद 7 दिनों से सिर्फ डॉक्टरी सहायता ले रहे हैं। मांगें लागू होने तक उनका आमरण-अनशन जारी रहेगा। बताया कि 14 फरवरी को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक के लिए संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) एवं किसान मजदूर मोर्चा के नेता तैयार हैं।
बैठक में मजबूती से तर्क सहित किसानों का पक्ष रखा जाएगा। कहा कि कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति ढांचे (एनपीएफएएम) को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी देने और ऋण माफी की मांग कर रहे है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार किसानों के साथ विश्वासघात कर रही है। किसान कानून वापस होने के बाद भाजपा सरकार ने जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं किए। इस वजह से गैर-राजनीतिक, केएमएम किसान मोर्चा लगातार आंदोलनरत हैं। इस अवसर पर दलबारा सिंह, मिंया सिंह, गुरप्रीत सिंह, सरपंच कमलप्रीत सिंह, टोनी, सेवा सिंह मौजूद रहे।
वहीं, गणतंत्र दिवस पर पाई के किसानों ने भी ट्रैक्टर मार्च निकाला। सबसे पहले किसान पाई की अनाज मंडी में एकत्र हुए। मंडी में किसानों ने नारेबाजी कर सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्सा जताया। कहा कि उनकी फसल को न तो समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है और न ही एमएसपी घोषित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार भी जहां 24 फसलों को एमएसपी पर खरीद करने का दावा कर रही है, उनमें से कुछ फसल तो प्रदेश में होती ही नहीं है और कुछ काफी कम संख्या में होती है।
मार्च के दौरान जिन किसानों के पास अपने ट्रैक्टर नही थे, उन्होंने अपनी कारों व मोटर साइकिलों के साथ उनका साथ दिया। इस अवसर पर भाकियू के कार्यकारी प्रधान बलवान पाई, अजीत सिंह हाबडी, करतारा राम, दिलबाग,बाला राम, जगदीश, कश्मीर सिंह, किताब सिंह, मुन्ना राम जगमाल बरसाना आदि उपस्थित रहे।