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Kaithal News: किसानों को बारिश का इंतजार, धीमी रफ्तार से चल रही धान की रोपाई
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देवबन के एक खेत में धान की रोपाई करते हुए मजदूर। संवाद
- फोटो : 1
कैथल। जिले में धान की रोपाई का सीजन 15 जून से शुरू हो चुका है लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से रोपाई का काम अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी की व्यवस्था ट्यूबवेल पर निर्भर है जबकि नहरों में भी अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। जिले में इस वर्ष करीब एक लाख 55 हजार एकड़ क्षेत्र में धान की रोपाई का लक्ष्य है। यहां मुख्य रूप से पीआर, 1121, मुच्छल और बासमती किस्मों की खेती की जाती है। हालांकि पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण कई किसान अभी तक रोपाई शुरू नहीं कर सके हैं। जिन किसानों ने कार्य शुरू किया है, उन्हें भी सिंचाई के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
आठ घंटे बिजली से नहीं चल पा रहा काम
किसानों का कहना है कि इस समय खेतों के लिए केवल आठ घंटे बिजली मिल रही है जिससे ट्यूबवेल के जरिये सिंचाई करना भी आसान नहीं है। किसानों को करीब 15 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। दूसरी ओर मजदूरों की कमी भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। मजदूरी महंगी होने और पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध नहीं होने से रोपाई की गति और धीमी पड़ गई है। किसान रामफल, रणधीर और जसवंत ने बताया कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल की रोपाई का काम प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि नहरों में समय पर पानी छोड़ा जाए और बिजली आपूर्ति बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक बारिश होने से ट्यूबवेल पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत भी घटेगी।-
मौसम समन्वयक रमेश चंद्र ने बताया कि धान की फसल के लिए वर्तमान समय में बारिश अत्यंत आवश्यक है। यदि जल्द अच्छी वर्षा होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी बनेगी और रोपाई का कार्य तेजी से पूरा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियां बनने पर किसानों को काफी राहत मिलेगी और फसल की बेहतर शुरुआत संभव होगी।
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आठ घंटे बिजली से नहीं चल पा रहा काम
किसानों का कहना है कि इस समय खेतों के लिए केवल आठ घंटे बिजली मिल रही है जिससे ट्यूबवेल के जरिये सिंचाई करना भी आसान नहीं है। किसानों को करीब 15 घंटे बिजली मिलनी चाहिए। दूसरी ओर मजदूरों की कमी भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। मजदूरी महंगी होने और पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध नहीं होने से रोपाई की गति और धीमी पड़ गई है। किसान रामफल, रणधीर और जसवंत ने बताया कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल की रोपाई का काम प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि नहरों में समय पर पानी छोड़ा जाए और बिजली आपूर्ति बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक बारिश होने से ट्यूबवेल पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत भी घटेगी।-
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मौसम समन्वयक रमेश चंद्र ने बताया कि धान की फसल के लिए वर्तमान समय में बारिश अत्यंत आवश्यक है। यदि जल्द अच्छी वर्षा होती है तो खेतों में पर्याप्त नमी बनेगी और रोपाई का कार्य तेजी से पूरा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि मौसम की अनुकूल परिस्थितियां बनने पर किसानों को काफी राहत मिलेगी और फसल की बेहतर शुरुआत संभव होगी।

देवबन के एक खेत में धान की रोपाई करते हुए मजदूर। संवाद- फोटो : 1
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