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बांके बिहारी के दर्शन से प्रत्येक क्षण आनंदमय : साध्वी आस्था
Sat, 14 Mar 2026 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 14 Mar 2026 12:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से पुराना बस स्टैंड परिसर में 9 से 15 मार्च तक सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन साध्वी आस्था भारती ने बांके बिहारी की बाल लीलाओं के वर्णन से कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रभु की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति का मार्ग बताया।
साध्वी आस्था ने कहा कि यदि मनुष्य वास्तविक शांति प्राप्त करना चाहता है तो उसे अपने विचारों के शोर से मुक्त होना होगा। मन में उठने वाले विचार ही अशांति का मूल कारण होते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का शांत स्वरूप उसके मन से परे होता है और जब मनुष्य अपने स्व पर मनन करता है तो बिखरे हुए विचार स्वतः समाप्त हो जाते हैं तथा व्यक्ति आत्मस्थित हो जाता है। यही सच्ची शांति और मुक्ति का मार्ग है।
उन्होंने गोवर्धन लीला का भी वर्णन किया और कहा कि ‘गो’ का अर्थ इंद्रियां हैं, जो सामान्यतः नीचे की ओर जाती हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें ईश्वर की ओर मोड़ दिया। यही इंद्रियों का वर्धन है और यही गोवर्धन लीला का मुख्य संदेश भी है कि मनुष्य अपनी धारणाओं से ऊपर उठकर ईश्वर की ओर उन्मुख हो।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान रतन गोयल, सौरभ चौधरी, दीपक सेठ और अरविंद खुरानिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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कैथल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से पुराना बस स्टैंड परिसर में 9 से 15 मार्च तक सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के चौथे दिन साध्वी आस्था भारती ने बांके बिहारी की बाल लीलाओं के वर्णन से कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रभु की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति का मार्ग बताया।
साध्वी आस्था ने कहा कि यदि मनुष्य वास्तविक शांति प्राप्त करना चाहता है तो उसे अपने विचारों के शोर से मुक्त होना होगा। मन में उठने वाले विचार ही अशांति का मूल कारण होते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का शांत स्वरूप उसके मन से परे होता है और जब मनुष्य अपने स्व पर मनन करता है तो बिखरे हुए विचार स्वतः समाप्त हो जाते हैं तथा व्यक्ति आत्मस्थित हो जाता है। यही सच्ची शांति और मुक्ति का मार्ग है।
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उन्होंने गोवर्धन लीला का भी वर्णन किया और कहा कि ‘गो’ का अर्थ इंद्रियां हैं, जो सामान्यतः नीचे की ओर जाती हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें ईश्वर की ओर मोड़ दिया। यही इंद्रियों का वर्धन है और यही गोवर्धन लीला का मुख्य संदेश भी है कि मनुष्य अपनी धारणाओं से ऊपर उठकर ईश्वर की ओर उन्मुख हो।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान रतन गोयल, सौरभ चौधरी, दीपक सेठ और अरविंद खुरानिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।