फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Emotional description of Shri Krishna-Rukmani marriage episode

Kaithal News: श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन

Sat, 21 Jun 2025 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 21 Jun 2025 12:57 AM IST
विज्ञापन
Emotional description of Shri Krishna-Rukmani marriage episode
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कलायत। ग्यारह रुद्री मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को कथा वाचक कृष्णानंद ने गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग, महारास लीला, रासलीला में भगवान शंकर की उपस्थिति और श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा व्यास ने रास पंचाध्यायी की व्याख्या करते हुए कहा कि भागवत के ये पांच अध्याय, जिनमें गोपी गीत गाए जाते हैं, स्वयं श्रीमद्भागवत के पंच प्राण हैं। उन्होंने कहा कि जो भक्त भावपूर्वक इन गीतों का गान करता है, उसे भवसागर से पार होने का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त हो जाता है और वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त होती है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि महारास लीला के माध्यम से ही जीवात्मा का परमात्मा से मिलन संभव हुआ। श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और रास के दिव्य आयोजन के माध्यम से प्रेम, भक्ति और आत्मिक एकत्व का मार्ग प्रशस्त किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस विवाह उत्सव में सम्मिलित होने वाले भक्तों की वैवाहिक समस्याएं दूर होती हैं। उन्होंने कहा कि जीव, परमात्मा का अंश है और उसमें अपार शक्तियां निहित हैं। केवल संकल्प की दृढ़ता और कपट रहित भक्ति की आवश्यकता होती है, शेष ईश्वर स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं।

गोपी गीत की महिमा बताते हुए कथा वाचक ने कहा कि जब भी जीव में अभिमान आता है, भगवान उससे दूर हो जाते हैं। लेकिन जब वह विरह में रोता है, तो भगवान कृपा कर दर्शन देते हैं।

रासलीला की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई सांसारिक प्रेम कथा नहीं, बल्कि आत्मा के शिव से मिलन की दिव्य कथा है। यह कामना को बढ़ाने नहीं, बल्कि उस पर विजय पाने की प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि रासलीला में कामदेव ने श्रीकृष्ण पर अपना संपूर्ण सामर्थ्य आजमाया, परंतु हार गया।


मथुरा गमन प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब अक्रूर भगवान श्रीकृष्ण को लेने आए और वे मथुरा जाने लगे, तब समस्त ब्रज की गोपियां रथ के आगे खड़ी हो गईं और बोलीं—“हे कन्हैया, जब हमें छोड़ ही जाना था तो प्रेम क्यों किया?” कथा के अंत में श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया गया। पंडाल में बधाइयों की गूंज रही और महिलाएं भक्ति भाव से झूम उठीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed