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विद्युती करण के बाद भी दौड़ रहे डीजल इंजन
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electricity trian
- फोटो : Kaithal
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। रेलवे लाइन का विद्युतीकरण के बावजूद जींद-कुरुक्षेत्र मार्ग पर डीजल इंजन चल रहा है। जिससे रेलवे को काफी खर्च उठाना पड़ रहा है। तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल में योजना बनाई गई थी कि दिल्ली डिविजन के अधीन आने वाली रेल लाइनों में जो लाइन विद्युतीकरण से अधूरी है। उन पर विद्युतीकरण लाइन बिछाकर इलेक्ट्रिक इंजन का संचालन किया जाए। जिसके चलते जींद से कुरुक्षेत्र रेल लाइन पर भी करीब पिछले साल भर पहले विद्युतीकरण से जोड़ा गया था। जिसमें विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में रेलगाड़ी की शुरूआत हुई।
शाम के समय जींद से कुरुक्षेत्र जाने वाली गाड़ियों में होता इलेक्ट्रिकल इंजन: शाम सवा सात बजे जींद से कैथल पहुंचने वाली रेल गाड़ी में इलेक्ट्रिकल इंजन लगा होता है। यात्रियों की बजाय माल गाड़ियों में ही इलेक्ट्रिकल इंजन प्रयोग में लाया जा रहा है। परंतुु पैसेंजर गाड़ी डीजल इंजन के ही लाइन पर दौड़ रही है। जिससे यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान पर देरी से पहुंचना पड़ रहा हैै।
इलेक्ट्रिकल इंजन की बजाय डीजन इंजन पड़ता है महंगा: रेल कल्याण समिति के चेयरमैन सतपाल गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिकल इंजन कम खर्चीला होता है जबकि डीजल इंजन काफी महंगा होता है। जिससे रेलवे विभाग पर आर्थिक मंदी का बोझ पड़ता है। उन्होंने बताया कि अगर इंजन बिजली से चलेगा तो गाड़ियां भी समय पर आएंगी। यात्रियों को भी किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। उन्होंनेे ये भी कहा कि अगर डीजल वाले ही इंजन चलने थे, तो फिर ये विद्युतीकरण किस लिए किया गया।
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समय में नहीं कोई फर्क : रेलवे स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने बताया कि इलेक्ट्रिकल और डीजल इंजन गाड़ियां दोनों स्टेशन पर बराबर समय पर पहुंचती हैं। समय में कोई अंतराल नहीं होता। लेकिन विभाग अपने हिसाब से इलेक्ट्रिकल इंजन का संचालन करते हैं। उन्होंने बताया कि पिहोवा रोड और कुरुक्षेत्र के बीच लाइन पर काम चला हुआ। सर्दियों में धुंध की वजह से कभी कभार गाड़ी लेट हो आती है।
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शाम के समय जींद से कुरुक्षेत्र जाने वाली गाड़ियों में होता इलेक्ट्रिकल इंजन: शाम सवा सात बजे जींद से कैथल पहुंचने वाली रेल गाड़ी में इलेक्ट्रिकल इंजन लगा होता है। यात्रियों की बजाय माल गाड़ियों में ही इलेक्ट्रिकल इंजन प्रयोग में लाया जा रहा है। परंतुु पैसेंजर गाड़ी डीजल इंजन के ही लाइन पर दौड़ रही है। जिससे यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान पर देरी से पहुंचना पड़ रहा हैै।
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इलेक्ट्रिकल इंजन की बजाय डीजन इंजन पड़ता है महंगा: रेल कल्याण समिति के चेयरमैन सतपाल गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिकल इंजन कम खर्चीला होता है जबकि डीजल इंजन काफी महंगा होता है। जिससे रेलवे विभाग पर आर्थिक मंदी का बोझ पड़ता है। उन्होंने बताया कि अगर इंजन बिजली से चलेगा तो गाड़ियां भी समय पर आएंगी। यात्रियों को भी किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। उन्होंनेे ये भी कहा कि अगर डीजल वाले ही इंजन चलने थे, तो फिर ये विद्युतीकरण किस लिए किया गया।
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समय में नहीं कोई फर्क : रेलवे स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने बताया कि इलेक्ट्रिकल और डीजल इंजन गाड़ियां दोनों स्टेशन पर बराबर समय पर पहुंचती हैं। समय में कोई अंतराल नहीं होता। लेकिन विभाग अपने हिसाब से इलेक्ट्रिकल इंजन का संचालन करते हैं। उन्होंने बताया कि पिहोवा रोड और कुरुक्षेत्र के बीच लाइन पर काम चला हुआ। सर्दियों में धुंध की वजह से कभी कभार गाड़ी लेट हो आती है।