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बिना आर्डर के आया सामान, बिल आया सामने तो ठनका अधिकारियों का माथा
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Tue, 28 Mar 2017 11:41 PM IST
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लैब के लिए मंगाए गए सामान के 42 लाख रुपये के बिल पर लगा सवालिया निशान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल स्थित लैब के लिए करीब 42 लाख रुपये के बिलों पर सवालिया निशान लग गया है। आवश्यक ऑर्डर संबंधी कागजात के बिना विभाग के पास पहुंचे बिलों को देखकर आला अधिकारियों ने इन्हें पास करने से इंकार कर दिया। सीएमओ ने मामले की आवश्यक छानबीन, कार्रवाई व मार्गदर्शन के लिए विभाग मुख्यालय को लिखा है। आशंका जताई जा रही है कि काफी सारे बिलों के लिए कोई ऑर्डर जारी नहीं किया गया। इस पूरे मामले में वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।
जिला अस्पताल में होते हैं हर रोज हजारों की संख्या में टेस्ट
जिला अस्पताल में 24 घंटे लैब खुली रहती है। इसमें हर रोज करीब 1000 से अधिक की ओपीडी में आने वाले मरीजों के हजारों टेस्ट होते हैं। इसमें करीब 50 तरह के अलग-अलग टेस्ट करने में काफी उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है।
स्थानीय स्तर पर होती है उपकरणों और आवश्यक सामग्री की खरीद
लैब सूत्रों ने बताया कि विभाग द्वारा लैब में प्रयोग होने वाला सामान नहीं भेजा जाता। इसे स्थानीय स्तर पर ही कंपनियों के माध्यम से खरीदा जाता है। हर रोज हजारों की संख्या में लोगों के खून और यूरीन के टेस्ट होते हैं। जिसमें यूरिक किट, शुगर किट, लिपिड प्रोफाइल, हेपेटाइटिस-सी सहित कई तरह के टेस्ट होते हैं। इसके लिए लैब अधिकारी सामान की जरूरत के लिए अस्पताल इंचार्ज एसएमओ कार्यालय को अवगत करवाते हैं। एसएमओ कार्यालय से ही ऑर्डर बनाकर कंपनियों को भेजा जाता है। इसी कार्यालय से इन कंपनियों को भुगतान हो जाता है।
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वर्ष 2016-17 के 42 लाख रुपये के बिलों पर सवालिया निशान
विभागीय सूत्रों ने बताया कि कुछ दिनों के लिए जिला अस्पताल में प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर के पद का कार्यभार सीएमओ डा. मनीष बंसल को दिया गया था। उन्होंने इसी अवधि में इन बिलों के पास करने पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 42 लाख रुपये के बिलों के लिए आवश्यक ऑर्डर संबंधी कागजात पूरे नहीं हैं। काफी सारे बिल ऐसे हैं, जिनके लिए ऑर्डर ही नहीं किया गया। ना ही यह पता लगा कि ये सामान किसके ऑर्डर पर भेजा गया है। इस तरह से किसी न किसी स्तर पर कागजों की कमी के अलावा वित्तीय अनियमितताओं की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। सीएमओ ने बिलों को पास करने पर रोक लगाते हुए विभाग मुख्यालय रिपोर्ट भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। साथ ही मामले की विस्तृत जांच करते हुए कार्रवाई के लिए लिखा है।
लैब का नहीं होता ऑर्डर या भुगतान से कोई लेन-देन
लैब इंचार्ज डा. सचिन के अनुसार लैब में जिस भी सामान की जरूरत होती है, उसके लिए एसएमओ कार्यालय में रिपोर्ट भेज दी जाती है। वहीं से ऑर्डर बनता है और वहीं से भुगतान होता है। इसलिए लैब का ऑर्डर जारी करने या फिर इसके भुगतान से कोई लेना-देना नहीं होता। वहां केवल उपकरण पहुंचते हैं, जिन्हें रिकॉर्ड व नियमों के अनुसार ही प्रयोग किया जाता है।
करीब तीन माह पहले जिला अस्पताल के लैब में आए सामान के लिए लगभग 40 से 42 लाख रुपये के बिल रोके गए थे। काफी सारे बिलों में ऑर्डर संबंधी कागजात पूरे नहीं थे। यह नहीं पता चल पाया कि काफी सारे बिलों का जो सामान भेजा गया था, वह किसके ऑर्डर पर भेजा गया। इसी कारण इन्हें रोक कर विभाग मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है।
डा. मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।
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जिला अस्पताल में होते हैं हर रोज हजारों की संख्या में टेस्ट
जिला अस्पताल में 24 घंटे लैब खुली रहती है। इसमें हर रोज करीब 1000 से अधिक की ओपीडी में आने वाले मरीजों के हजारों टेस्ट होते हैं। इसमें करीब 50 तरह के अलग-अलग टेस्ट करने में काफी उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है।
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स्थानीय स्तर पर होती है उपकरणों और आवश्यक सामग्री की खरीद
लैब सूत्रों ने बताया कि विभाग द्वारा लैब में प्रयोग होने वाला सामान नहीं भेजा जाता। इसे स्थानीय स्तर पर ही कंपनियों के माध्यम से खरीदा जाता है। हर रोज हजारों की संख्या में लोगों के खून और यूरीन के टेस्ट होते हैं। जिसमें यूरिक किट, शुगर किट, लिपिड प्रोफाइल, हेपेटाइटिस-सी सहित कई तरह के टेस्ट होते हैं। इसके लिए लैब अधिकारी सामान की जरूरत के लिए अस्पताल इंचार्ज एसएमओ कार्यालय को अवगत करवाते हैं। एसएमओ कार्यालय से ही ऑर्डर बनाकर कंपनियों को भेजा जाता है। इसी कार्यालय से इन कंपनियों को भुगतान हो जाता है।
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वर्ष 2016-17 के 42 लाख रुपये के बिलों पर सवालिया निशान
विभागीय सूत्रों ने बताया कि कुछ दिनों के लिए जिला अस्पताल में प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर के पद का कार्यभार सीएमओ डा. मनीष बंसल को दिया गया था। उन्होंने इसी अवधि में इन बिलों के पास करने पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 42 लाख रुपये के बिलों के लिए आवश्यक ऑर्डर संबंधी कागजात पूरे नहीं हैं। काफी सारे बिल ऐसे हैं, जिनके लिए ऑर्डर ही नहीं किया गया। ना ही यह पता लगा कि ये सामान किसके ऑर्डर पर भेजा गया है। इस तरह से किसी न किसी स्तर पर कागजों की कमी के अलावा वित्तीय अनियमितताओं की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। सीएमओ ने बिलों को पास करने पर रोक लगाते हुए विभाग मुख्यालय रिपोर्ट भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। साथ ही मामले की विस्तृत जांच करते हुए कार्रवाई के लिए लिखा है।
लैब का नहीं होता ऑर्डर या भुगतान से कोई लेन-देन
लैब इंचार्ज डा. सचिन के अनुसार लैब में जिस भी सामान की जरूरत होती है, उसके लिए एसएमओ कार्यालय में रिपोर्ट भेज दी जाती है। वहीं से ऑर्डर बनता है और वहीं से भुगतान होता है। इसलिए लैब का ऑर्डर जारी करने या फिर इसके भुगतान से कोई लेना-देना नहीं होता। वहां केवल उपकरण पहुंचते हैं, जिन्हें रिकॉर्ड व नियमों के अनुसार ही प्रयोग किया जाता है।
करीब तीन माह पहले जिला अस्पताल के लैब में आए सामान के लिए लगभग 40 से 42 लाख रुपये के बिल रोके गए थे। काफी सारे बिलों में ऑर्डर संबंधी कागजात पूरे नहीं थे। यह नहीं पता चल पाया कि काफी सारे बिलों का जो सामान भेजा गया था, वह किसके ऑर्डर पर भेजा गया। इसी कारण इन्हें रोक कर विभाग मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया है।
डा. मनीष बंसल, सीएमओ, कैथल।