खुद बीमार है समान्य अस्पताल

ब्यूरो कैथ्‍ाल Updated Sun, 05 Mar 2017 12:05 AM IST
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अस्पताल में मरीजों को नहीं मिलती पूरी स्वास्थ्य सुविधाएं - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 सरकारी अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां मरीजों को इलाज के लिए पूरी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हैं। अस्पताल में डाक्टरों की संख्या आवश्यकता के अनुसार एक तिहाई भी नहीं है। अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 53 पद हैं लेकिन केवल 14 डॉक्टर ही तैनात हैं। जो यहां आने वाले मरीजों के लिहाज से काफी कम है। अल्ट्रासाउंड केंद्र में हमेशा ताला ही लटका रहता है। इसलिए मरीजों को प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों में अधिक रुपये देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। साथ ही मुफ्त इलाज के तहत दी जाने वाली दवाइयों का टोटा है। जिससे मरीजों को इलाज के लिए मजबूरन निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।

सुविधा न होने पर 400 की बजाय लगे 600
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे शहरवासी अरुण ने कहा कि उसका तीन साल का बेटा बीमार है। जिसे शुक्रवार शाम के समय दाखिल करवाया था। उसका अल्ट्रासाउंड करवाना था जिसके लिए वे सुबह से शहर में घूम रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं है। जिस कारण समय तो अधिक लगा ही लेकिन साथ में रुपये में दोगुने लगे। सरकार को इस पर ध्यान देकर गरीब जनता के हित के बारे सोचना चाहिए। यहां 400 की बजाए 600 रुपये लिए जा रहे हैं।

सरकारी योजनाओं के तहत नहीं मिल रही दवाएं
गांव भागल से इलाज के लिए पहुंचे बलविंद्र सिंह ने बताया कि उसे दो महीने पहले काला पीलिया हो गया था। सरकार की स्कीम के तहत इलाज के लिए पीजीआई रोहतक के लिए रेफर किया गया लेकिन रोहतक के डॉक्टरों ने उसे दोबारा सिविल अस्पताल में इलाज के लिए वापस भेज दिया। लेकिन यहां इलाज ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। यहां बीमारी की दवा तक नहीं मिलती। वैसे सरकार अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाएं देने की बात करती है। बजट में सरकार विशेष स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान दें।

कागजों में 200 बेड, लेकिन मिले 100
सरकारी कागजों के मुताबिक अस्पताल में 200 बेडों की संख्या है। लेकिन यहां केवल 100 बेड ही हैं। कांग्रेस सरकार की घोषणा के बाद सामान्य अस्पताल को सुपर स्पेश्लिटी मल्टी हॉस्पिटल बनाने की घोषणा हुई थी। इस घोषणा में अस्पताल को सरकारी कागजों में तो सुपर स्पेश्लिटी बना दिया। लेकिन मरीजों की सुविधाओं के लिए यहां अभी भी काफी सुधार की जरूरत है।

दस साल बीते नहीं मिली सिटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा
सरकार द्वारा सिटी स्कैन और एमआरआई की घोषणा की गई है। अभी तक यहां ऐसी कोई सुविधा नहीं आई है। प्रतिदिन अस्पताल में सात सौ से आठ सौ ओपीडी की पर्चियां कटती है। लेकिन तीन से चार सौ मरीजों का इलाज हो पाता है।

यह है जिला में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति
जिला में सामान्य अस्पताल केवल एक है। जबकि छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं जो गुहला, सीवन, पूंडरी, कलायत, राजौंद और कौल में स्थित है। इसके अलावा 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केेेंद्र है। जो चार ब्लाकों में स्थित है। इनमें गुहला ब्लाक में भागल, कांगथली, खंरका। सीवन ब्लॉक में क्योड़क और पाडला। कलायत में देवबन, बालू, बाता। कौल में ढांड, रसीना, टीक। राजौंद में जखौली, किठाना, करोड़ा शामिल है। इसके अलावा पूरे जिले में 143 सब स्वास्थ्य केंद्र स्थित है।
 
मशीनों और स्टाफ के अभाव से जूझ रही लैब
जहां अस्पताल में दवाओं और डाक्टरों की कमी से मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही वहीं मरीजों के ठीक ढंग से टेस्ट भी नहीं हो रहे। मरीजों के टेस्ट के लिए यहां स्टाफ के साथ मशीनों की भी भारी कमी है। लैब इंचार्ज कर्मबीर सिंह ने बताया कि लैब में मेन पावर के साथ मशीनें भी नहीं है। उन्होंने बताया कि लैब में 20 लैब टेक्रिशयन के स्टाफ के पद है। लेकिन यहां महज 7 लैब टेक्रिशयन ही कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां कम कार्यक्षमता वाली मशीनें हैं। लेकिन इससे अधिक कार्यक्षमता वाली मशीनें चाहिए। जहां एक ही मशीन वहां तीन से चार मशीने होनी चाहिए।

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