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Kaithal News: जिला उपभोक्ता फोरम ने खारिज की बीमा कंपनी के खिलाफ दर्ज याचिका
Sun, 31 May 2026 03:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 31 May 2026 03:35 AM IST
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कैथल। जिला उपभोक्ता फोरम ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़े एक मामले में शिकायतकर्ता टिंकू की याचिका खारिज कर दी है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी की ओर से पूर्व में दिए गए आदेशों का पूर्ण पालन किया जा चुका है और मामले में हुई देरी के लिए शिकायतकर्ता स्वयं जिम्मेदार रहा। आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप तथा सदस्य सुनील मोहन त्रिखा और हरिषा मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रिकॉर्ड का अवलोकन किया।
आयोग की ओर से पहले दिए गए आदेश में बीमा कंपनी ने शिकायतकर्ता को 1,77,500 रुपये की बीमित राशि, उस पर निर्धारित ब्याज, 10 हजार रुपये मुआवजा तथा 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ता को दुर्घटनाग्रस्त वाहन बीमा कंपनी को सौंपने और वाहन की आरसी रद्द करवाकर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता ने 28 अक्तूबर 2025 को याचिका दायर की थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2025 को ही 2,08,956 रुपये का चेक शिकायतकर्ता को सौंप दिया था। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शिकायतकर्ता ने वाहन की आरसी निर्धारित समय में रद्द नहीं करवाई। आरसी रद्द कराने की प्रक्रिया 7 मई 2026 को पूरी हुई। इसके अतिरिक्त वाहन का मलबा, बैटरी, स्टेपनी और चाबी भी समय पर बीमा कंपनी को नहीं सौंपी गई।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अनुपालना प्रक्रिया में हुई देरी के लिए शिकायतकर्ता स्वयं जिम्मेदार स्वयं है। इसलिए अतिरिक्त खर्च और अधिवक्ता शुल्क की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी ने आदेश के अनुरूप सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं और भुगतान भी कर दिया गया है। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने शिकायतकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया। संवाद
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आयोग की ओर से पहले दिए गए आदेश में बीमा कंपनी ने शिकायतकर्ता को 1,77,500 रुपये की बीमित राशि, उस पर निर्धारित ब्याज, 10 हजार रुपये मुआवजा तथा 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ता को दुर्घटनाग्रस्त वाहन बीमा कंपनी को सौंपने और वाहन की आरसी रद्द करवाकर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता ने 28 अक्तूबर 2025 को याचिका दायर की थी। इसके बाद बीमा कंपनी ने 30 अक्तूबर 2025 को ही 2,08,956 रुपये का चेक शिकायतकर्ता को सौंप दिया था। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि शिकायतकर्ता ने वाहन की आरसी निर्धारित समय में रद्द नहीं करवाई। आरसी रद्द कराने की प्रक्रिया 7 मई 2026 को पूरी हुई। इसके अतिरिक्त वाहन का मलबा, बैटरी, स्टेपनी और चाबी भी समय पर बीमा कंपनी को नहीं सौंपी गई।
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आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अनुपालना प्रक्रिया में हुई देरी के लिए शिकायतकर्ता स्वयं जिम्मेदार स्वयं है। इसलिए अतिरिक्त खर्च और अधिवक्ता शुल्क की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी ने आदेश के अनुरूप सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर दी हैं और भुगतान भी कर दिया गया है। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने शिकायतकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया। संवाद
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