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हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति में बढ़ा विवाद
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हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में पैसों को लेकर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। एक तरफ कमेटी के अध्यक्ष जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने कहा कि उन्हें गुरु घर के बेहतर प्रबंधन की जरूरत है, नाकि प्रधानगी की। यदि इसके बदले में राष्ट्रपति का पद भी दिया जाए तो वे ठोकर मार सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य मकसद गुरु घर का प्रचार करना है।
दादूवाल ने कहा कि उन्हेें हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष का पद सभी सदस्यों ने 13 अगस्त 2020 को अपने मत का प्रयोग करके सौंपा था, जिसे पूरी निष्ठा व ईमानदारी से निभाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे इस दायित्व को बिना किसी दबाव निभाने का प्रयत्न कर रहे हैं, लेकिन भ्रष्ट किस्म के लोग इस सेवा को निभाने में उनके सामने बाधाएं खड़ी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अपार सिंह किशनगढ़ जो भूतपूर्व प्रधान जगदीश सिंह झींड़ा के समय गुरुद्वारा मंजी साहब बनी बदरपुर और गुरुद्वारा ड्योडी साहब की देखरेख करते थे। उनसे बकाया पैसे को गुरु घर की गोलक में जमा करवाने के लिए बार-बार कहा जा रहा था तो उन्होंने 6 मार्च की बैठक में आकर गुरुद्वारे में ही हंगामा शुरू कर दिया था। इस संबंध में 6 मार्च को कमेटी के सचिव सर्वजीत सिंह द्वारा पैसा जमा करवाने का नोटिस भी जारी कर दिया गया है, जिसमें पंद्रह दिनों में लंबित पैसा जमा करवाने के लिए कहा गया है।
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दूसरी ओर अपार सिंह किशनगढ़ ने कहा कि उनको जो पैसा जमा करवाने का नोटिस दिया गया है, उसके लिए कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर बातचीत की जाए, जो राशि उनकी ओर लंबित होगी, वह दे दी जाएगी। उन्होंने अध्यक्ष दादूवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी स्वयं की कार्यप्रणाली संदिग्ध है। बैंकों से लेन-देन का कार्य कोषाध्यक्ष या सचिव की बजाए वह खुद कर रहे हैं। उम्मीद थी कि दादूवाल गुरुद्वारों की आमदनी बढ़ाएंगे और खर्चा कम करेंगे, लेकिन खर्चा बढ़ा दिया गया है और आमदनी कम हो गई है।
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दादूवाल ने कहा कि उन्हेें हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष का पद सभी सदस्यों ने 13 अगस्त 2020 को अपने मत का प्रयोग करके सौंपा था, जिसे पूरी निष्ठा व ईमानदारी से निभाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे इस दायित्व को बिना किसी दबाव निभाने का प्रयत्न कर रहे हैं, लेकिन भ्रष्ट किस्म के लोग इस सेवा को निभाने में उनके सामने बाधाएं खड़ी कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि अपार सिंह किशनगढ़ जो भूतपूर्व प्रधान जगदीश सिंह झींड़ा के समय गुरुद्वारा मंजी साहब बनी बदरपुर और गुरुद्वारा ड्योडी साहब की देखरेख करते थे। उनसे बकाया पैसे को गुरु घर की गोलक में जमा करवाने के लिए बार-बार कहा जा रहा था तो उन्होंने 6 मार्च की बैठक में आकर गुरुद्वारे में ही हंगामा शुरू कर दिया था। इस संबंध में 6 मार्च को कमेटी के सचिव सर्वजीत सिंह द्वारा पैसा जमा करवाने का नोटिस भी जारी कर दिया गया है, जिसमें पंद्रह दिनों में लंबित पैसा जमा करवाने के लिए कहा गया है।
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दूसरी ओर अपार सिंह किशनगढ़ ने कहा कि उनको जो पैसा जमा करवाने का नोटिस दिया गया है, उसके लिए कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर बातचीत की जाए, जो राशि उनकी ओर लंबित होगी, वह दे दी जाएगी। उन्होंने अध्यक्ष दादूवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी स्वयं की कार्यप्रणाली संदिग्ध है। बैंकों से लेन-देन का कार्य कोषाध्यक्ष या सचिव की बजाए वह खुद कर रहे हैं। उम्मीद थी कि दादूवाल गुरुद्वारों की आमदनी बढ़ाएंगे और खर्चा कम करेंगे, लेकिन खर्चा बढ़ा दिया गया है और आमदनी कम हो गई है।