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Kaithal News: ढांड मॉडल स्कूल में 458 छात्रों पर केवल 4 शिक्षक
Tue, 14 Apr 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:30 AM IST
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ढांड के स्कूल का दृश्य। संवाद
- फोटो : एचबीटीयू
संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। प्रदेश में शिक्षा स्तर सुधारने के लिए सरकार जहां राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूलों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही है, वहीं धरातल पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। ढांड के राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक स्कूल में 458 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए महज 4 शिक्षक ही तैनात हैं।
गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 होना चाहिए, लेकिन ढांड स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी के चलते शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। नियमानुसार यहां कम से कम 15 शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में स्कूल मात्र 25 प्रतिशत स्टाफ के सहारे संचालित हो रहा है।
हालांकि अस्थायी तौर पर दो शिक्षकों की और व्यवस्था की गई है, फिर भी निर्धारित अनुपात पूरा नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा मिलने के बाद सुविधाओं और स्टाफ में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन यहां बुनियादी आवश्यकताएं भी पूरी नहीं हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
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यहां चुनौती है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं को संभालना पड़ता है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब चार में से एक-दो शिक्षक अवकाश पर होते हैं या किसी सरकारी बैठक में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में दो या तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर औपचारिकता निभाई जाती है। मॉडल स्कूल का नाम देकर विद्यार्थियों का दाखिला तो कर लिया गया, लेकिन पर्याप्त शिक्षक न होने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक चुनौती बनी हुई है। जिले के 379 प्राथमिक स्कूलों में से कई में कमोबेश यही स्थिति देखने को मिल रही है।
रिक्त पदों और शिक्षकों की कमी के संबंध में मुख्यालय को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य स्कूलों से शिक्षकों की डेपुटेशन पर ड्यूटी लगाई जा रही है।
-सुभाष कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी
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ढांड। प्रदेश में शिक्षा स्तर सुधारने के लिए सरकार जहां राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूलों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रही है, वहीं धरातल पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। ढांड के राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक स्कूल में 458 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए महज 4 शिक्षक ही तैनात हैं।
गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुसार प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 होना चाहिए, लेकिन ढांड स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी के चलते शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। नियमानुसार यहां कम से कम 15 शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में स्कूल मात्र 25 प्रतिशत स्टाफ के सहारे संचालित हो रहा है।
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हालांकि अस्थायी तौर पर दो शिक्षकों की और व्यवस्था की गई है, फिर भी निर्धारित अनुपात पूरा नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मॉडल संस्कृति स्कूल का दर्जा मिलने के बाद सुविधाओं और स्टाफ में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन यहां बुनियादी आवश्यकताएं भी पूरी नहीं हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
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यहां चुनौती है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
शिक्षकों की कमी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं को संभालना पड़ता है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब चार में से एक-दो शिक्षक अवकाश पर होते हैं या किसी सरकारी बैठक में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में दो या तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ बैठाकर औपचारिकता निभाई जाती है। मॉडल स्कूल का नाम देकर विद्यार्थियों का दाखिला तो कर लिया गया, लेकिन पर्याप्त शिक्षक न होने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक चुनौती बनी हुई है। जिले के 379 प्राथमिक स्कूलों में से कई में कमोबेश यही स्थिति देखने को मिल रही है।
रिक्त पदों और शिक्षकों की कमी के संबंध में मुख्यालय को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य स्कूलों से शिक्षकों की डेपुटेशन पर ड्यूटी लगाई जा रही है।
-सुभाष कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी