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Kaithal News: कोशिशों के बावजूद दो साल में नौ बच्चों का नहीं लग सका सुराग
Tue, 10 Feb 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 10 Feb 2026 01:12 AM IST
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सोनू थुआ
कैथल। जिले में बीते दो वर्षों के दौरान बच्चों के लापता होने के 121 मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर किशोर हैं। पुलिस की सक्रियता और लगातार की गई कार्रवाई के चलते इनमें से 112 बच्चों को सकुशल मुक्त कराकर उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है, जबकि 9 बच्चे अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा लगातार की जा रही है।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार लापता होने वाले बच्चों में सबसे अधिक संख्या 15 से 16 वर्ष आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों की है। इनमें लगभग 60 प्रतिशत किशोरियां शामिल हैं। बच्चों के लापता होने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने विशेष मिसिंग सेल और जांच टीमें गठित की हैं, जो लगातार इन मामलों पर काम कर रही हैं।
लापता बच्चों की खोज के लिए पुलिस ने तकनीकी और पारंपरिक दोनों तरीकों का सहारा लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय सूचना तंत्र के माध्यम से कई बच्चों के ठिकानों का पता लगाया गया। पुलिस का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से बच्चों को सुरक्षित बरामद करने में काफी मदद मिलती है।
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जानकारों का मानना है कि बच्चों के लापता होने की घटनाओं को केवल पुलिस प्रयासों से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए समाज के हर स्तर पर जागरूकता और सतर्कता जरूरी है। स्कूल, मोहल्ला समितियों और अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना होगा। कई मामलों में बच्चे खेलने या अन्य गतिविधियों के लिए घर से निकलते हैं और वापस नहीं लौटते, जबकि कुछ बच्चे पारिवारिक या सामाजिक दबाव के कारण घर छोड़ देते हैं। संवाद
परिजन से बातचीत
काफी समय पहले लापता हुआ था बेटा
गांव हाबड़ी निवासी रमेश ने बताया कि उनका 14 वर्षीय बेटा काफी समय पहले लापता हो गया था। उन्होंने पूंडरी थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई। रमेश ने बताया कि बेटा पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन उसकी कहीं भी तलाश नहीं लग पाई। पुलिस ने काफी प्रयास किए, फिर भी अब तक सफलता नहीं मिली। बेटे के इंतजार में पूरा परिवार मानसिक तनाव और निराशा की स्थिति से गुजर रहा है।
बॉक्स
एक साल पहले लड़की हुई थी लापता
गुहला क्षेत्र के एक गांव निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब एक वर्ष पहले उनकी 16 वर्षीय बेटी दोपहर के समय घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में पुलिस की मदद से लड़की को सकुशल बरामद कर लिया गया, जिससे परिवार ने राहत की सांस ली।
बॉक्स
जनवरी में पुलिस की बड़ी उपलब्धि
2024 में लापता किशोर को सकुशल बरामद किया
23 जनवरी को कैथल पुलिस की मिसिंग सेल टीम ने 14 वर्षीय एक किशोर को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सौंपा था। मायापुरी कॉलोनी, करनाल रोड निवासी व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसका 13 वर्षीय पुत्र 24 अक्टूबर 2024 को घर से बिना बताए लापता हो गया था। थाना सिविल लाइन में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि किशोर को एक अज्ञात व्यक्ति नशीला पदार्थ सुंघाकर बहला-फुसलाकर हरिद्वार ले गया था, जहां उससे होटल में काम करवाया गया। बाद में वह वहां से भागकर ट्रेन के जरिए अमृतसर पहुंच गया और एक व्यक्ति के पास रहने लगा। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अमृतसर से किशोर को सकुशल बरामद किया। काउंसलिंग के बाद उसे सुरक्षित रूप से परिजनों के सुपुर्द किया गया। बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए और उन्होंने पुलिस टीम का आभार जताया।
वर्जन
लापता बच्चों को ढूंढकर परिजनों से मिलाया गया : डीएसपी वीरभान
डीएसपी वीरभान ने बताया कि बच्चे के लापता होने की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस द्वारा विशेष मिसिंग सेल टीम गठित की गई है, जो लगातार ऐसे मामलों पर काम कर रही है। अब तक लापता बच्चों को ढूंढकर परिजनों को सौंपा जा चुका है। अभिभावक अपने क्षेत्र के पुलिस थानों में प्राथमिकी दर्ज करवा सकते हैं।
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कैथल। जिले में बीते दो वर्षों के दौरान बच्चों के लापता होने के 121 मामले सामने आए हैं। इनमें ज्यादातर किशोर हैं। पुलिस की सक्रियता और लगातार की गई कार्रवाई के चलते इनमें से 112 बच्चों को सकुशल मुक्त कराकर उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है, जबकि 9 बच्चे अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा लगातार की जा रही है।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार लापता होने वाले बच्चों में सबसे अधिक संख्या 15 से 16 वर्ष आयु वर्ग के किशोर-किशोरियों की है। इनमें लगभग 60 प्रतिशत किशोरियां शामिल हैं। बच्चों के लापता होने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने विशेष मिसिंग सेल और जांच टीमें गठित की हैं, जो लगातार इन मामलों पर काम कर रही हैं।
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लापता बच्चों की खोज के लिए पुलिस ने तकनीकी और पारंपरिक दोनों तरीकों का सहारा लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय सूचना तंत्र के माध्यम से कई बच्चों के ठिकानों का पता लगाया गया। पुलिस का कहना है कि समय पर सूचना मिलने से बच्चों को सुरक्षित बरामद करने में काफी मदद मिलती है।
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जानकारों का मानना है कि बच्चों के लापता होने की घटनाओं को केवल पुलिस प्रयासों से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए समाज के हर स्तर पर जागरूकता और सतर्कता जरूरी है। स्कूल, मोहल्ला समितियों और अभिभावकों को बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना होगा। कई मामलों में बच्चे खेलने या अन्य गतिविधियों के लिए घर से निकलते हैं और वापस नहीं लौटते, जबकि कुछ बच्चे पारिवारिक या सामाजिक दबाव के कारण घर छोड़ देते हैं। संवाद
परिजन से बातचीत
काफी समय पहले लापता हुआ था बेटा
गांव हाबड़ी निवासी रमेश ने बताया कि उनका 14 वर्षीय बेटा काफी समय पहले लापता हो गया था। उन्होंने पूंडरी थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई। रमेश ने बताया कि बेटा पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन उसकी कहीं भी तलाश नहीं लग पाई। पुलिस ने काफी प्रयास किए, फिर भी अब तक सफलता नहीं मिली। बेटे के इंतजार में पूरा परिवार मानसिक तनाव और निराशा की स्थिति से गुजर रहा है।
बॉक्स
एक साल पहले लड़की हुई थी लापता
गुहला क्षेत्र के एक गांव निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब एक वर्ष पहले उनकी 16 वर्षीय बेटी दोपहर के समय घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में पुलिस की मदद से लड़की को सकुशल बरामद कर लिया गया, जिससे परिवार ने राहत की सांस ली।
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जनवरी में पुलिस की बड़ी उपलब्धि
2024 में लापता किशोर को सकुशल बरामद किया
23 जनवरी को कैथल पुलिस की मिसिंग सेल टीम ने 14 वर्षीय एक किशोर को सकुशल बरामद कर उसके परिजनों को सौंपा था। मायापुरी कॉलोनी, करनाल रोड निवासी व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसका 13 वर्षीय पुत्र 24 अक्टूबर 2024 को घर से बिना बताए लापता हो गया था। थाना सिविल लाइन में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि किशोर को एक अज्ञात व्यक्ति नशीला पदार्थ सुंघाकर बहला-फुसलाकर हरिद्वार ले गया था, जहां उससे होटल में काम करवाया गया। बाद में वह वहां से भागकर ट्रेन के जरिए अमृतसर पहुंच गया और एक व्यक्ति के पास रहने लगा। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अमृतसर से किशोर को सकुशल बरामद किया। काउंसलिंग के बाद उसे सुरक्षित रूप से परिजनों के सुपुर्द किया गया। बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए और उन्होंने पुलिस टीम का आभार जताया।
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लापता बच्चों को ढूंढकर परिजनों से मिलाया गया : डीएसपी वीरभान
डीएसपी वीरभान ने बताया कि बच्चे के लापता होने की सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस द्वारा विशेष मिसिंग सेल टीम गठित की गई है, जो लगातार ऐसे मामलों पर काम कर रही है। अब तक लापता बच्चों को ढूंढकर परिजनों को सौंपा जा चुका है। अभिभावक अपने क्षेत्र के पुलिस थानों में प्राथमिकी दर्ज करवा सकते हैं।