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फुटबॉल में छुपा कर जेल के भीतर पहुंचाए जा रहे मोबाइल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
Updated Fri, 24 Jun 2016 11:40 PM IST
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जेल
- फोटो : ब्यूरो
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कैथल। दशक भर पहले सरकार ने जेलों में जैमर लगाए जाने के दावे किए थे लेकिन आज तक जेलों में जैमर लगना तो दूर जिला जेल में अभी तक वॉच टावर (बुर्ज) तक नहीं है। इसका फायदा शरारती तत्व उठाते हैं। ऐसे लोग फुटबाल या फिर अन्य वस्तुओं में मोबाइल लपेट कर जेलों के भीतर बंदियों तक पहुंचा रहे हैं।
पिछले तीन महीने में आधा दर्जन से अधिक ऐसे मामले पुलिस के सामने आ चुके हैं जिसमें कैदियों के पास मोबाइल मिला है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि ये मोबाइल बाहर से गेंद या अन्य किसी वस्तु में छुपा कर फेंके जाते हैं। जेल के दो ओर रिहायशी कालोनियां होने से भी प्रतिबंधित वस्तुओं को जेल के भीतर पहुंचाने में आसानी हो रही है।
जिला जेल में आज तक भी जैमर नहीं लगाया जा सका है। जैमर से मोबाइल का प्रयोग करना मुश्किल हो जाता है। जिला जेल में चारों कोनों पर बुर्ज भी नहीं हैं तो फिर कैदियों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखी भी जाए तो कैसे?
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मोबाइल मिलने के बाद बढ़ाई निगरानी
जिला जेल में मोबाइल मिलने की एक के बाद एक घटनाओं के बाद इस समय निगरानी बढ़ा दी गई है। दिन में एक बार तलाशी जरूर होती है। वहीं जेल के बाहर भी सादी वर्दी में कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है।
सुरक्षा के चलते मुलाकात का तरीका बदला
जिला जेल में इस समय सुरक्षा के चलते मुलाकात का तरीका बदल दिया गया है। कैदियों व बंदियों से मुलाकात के लिए आने वाले परिजनों का प्रत्यक्ष संपर्क पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। मुलाकात के लिए बने कक्ष में बीच में एक मोटी कांच की दीवार बना दी गई है। इसके आर-पार से ही वे एक-दूसरे को देख सकते हैं। बातचीत के लिए दोनों ओर इंटरकॉम टेलीफोन रख दिए गए हैं।
अब जेल में नहीं दी जा सकती कोई भी खाद्य सामग्री
जेल में कैदियों व बंदियों के लिए परिजनों के खाने-पीने की सामग्री ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल कपड़े ही गहन जांच-पड़ताल के बाद कैदियों व बंदियों तक पहुंच पाते हैं।
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पिछले तीन महीने में आधा दर्जन से अधिक ऐसे मामले पुलिस के सामने आ चुके हैं जिसमें कैदियों के पास मोबाइल मिला है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि ये मोबाइल बाहर से गेंद या अन्य किसी वस्तु में छुपा कर फेंके जाते हैं। जेल के दो ओर रिहायशी कालोनियां होने से भी प्रतिबंधित वस्तुओं को जेल के भीतर पहुंचाने में आसानी हो रही है।
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जिला जेल में आज तक भी जैमर नहीं लगाया जा सका है। जैमर से मोबाइल का प्रयोग करना मुश्किल हो जाता है। जिला जेल में चारों कोनों पर बुर्ज भी नहीं हैं तो फिर कैदियों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखी भी जाए तो कैसे?
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मोबाइल मिलने के बाद बढ़ाई निगरानी
जिला जेल में मोबाइल मिलने की एक के बाद एक घटनाओं के बाद इस समय निगरानी बढ़ा दी गई है। दिन में एक बार तलाशी जरूर होती है। वहीं जेल के बाहर भी सादी वर्दी में कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है।
सुरक्षा के चलते मुलाकात का तरीका बदला
जिला जेल में इस समय सुरक्षा के चलते मुलाकात का तरीका बदल दिया गया है। कैदियों व बंदियों से मुलाकात के लिए आने वाले परिजनों का प्रत्यक्ष संपर्क पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। मुलाकात के लिए बने कक्ष में बीच में एक मोटी कांच की दीवार बना दी गई है। इसके आर-पार से ही वे एक-दूसरे को देख सकते हैं। बातचीत के लिए दोनों ओर इंटरकॉम टेलीफोन रख दिए गए हैं।
अब जेल में नहीं दी जा सकती कोई भी खाद्य सामग्री
जेल में कैदियों व बंदियों के लिए परिजनों के खाने-पीने की सामग्री ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल कपड़े ही गहन जांच-पड़ताल के बाद कैदियों व बंदियों तक पहुंच पाते हैं।