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एनआरएचएम में भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत पर विभाग ने शुरू की जांच
Updated Mon, 29 Oct 2018 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेशों को दरकिनार कर प्रदेश में एनआरएचएम में मेंटल हेल्थ स्टाफ में भर्ती के लिए प्रदेश स्तर पर अपने ही नियम बना लिए गए और कई जिलों में निर्धारित योग्यता के बिना ही स्टॉफ सदस्यों की नियुक्ति कर दी गई। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। सीएम विंडो पर पहुंची शिकायत के बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम में साइकियाट्रिक नर्स व कम्यूनिटी नर्स के चयन में आदेश दिए गए थे कि इन पदों के लिए बीएससी नर्सिंग की योग्यता होनी चाहिए। साथ में दो साल का अनुभव भी अनिवार्य था। लेकिन प्रदेश स्तर पर इसे बदलकर बीएससी नर्सिंग, जीएनएम भी जोड़ दिया गया। साथ ही दो साल के अनुभव की शर्त भी हटा दी गई। जिससे दोनों ही स्तर की नर्सों के काम काज को एक ही लेवल पर ला दिया गया। जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। कई जिलों में जिन उम्मीदवारों के पास केवल जीएनएम की डिग्री थी, वह साइकियाट्रिक नर्स के तौर पर चयनित हो गई। तो क्या वह अपने काम से न्याय कर सकेंगी? कई जिलों में ऐसी भर्ती कर दी गई हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी जीएमएम डिग्री धारक उम्मीदवार हैं, जिन्हें कई जिलों में इस भर्ती में भाग लेने से मना कर दिया गया। जबकि कई जिलों में इसी योग्यता वाली उम्मीदवार भर्ती हो गई और विभाग में काम कर रही हैं। सीएम विंडो पर शिकायत करने वाले व्यक्ति के भी परिवार से ऐसी ही उम्मीदवार भर्ती से वंचित रह गई। अब शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस भर्ती की जांच की जाए और जिन उम्मीदवारों का नियमों का उल्लंघन कर चयन हुआ है, उनके कांट्रेक्ट को आगे ना बढ़ाया जाए।
इस संबंध में विभाग में एनएचएम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. वीना सिंह ने कहा कि ऐसी एक शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
कैथल। केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेशों को दरकिनार कर प्रदेश में एनआरएचएम में मेंटल हेल्थ स्टाफ में भर्ती के लिए प्रदेश स्तर पर अपने ही नियम बना लिए गए और कई जिलों में निर्धारित योग्यता के बिना ही स्टॉफ सदस्यों की नियुक्ति कर दी गई। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। सीएम विंडो पर पहुंची शिकायत के बाद विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम में साइकियाट्रिक नर्स व कम्यूनिटी नर्स के चयन में आदेश दिए गए थे कि इन पदों के लिए बीएससी नर्सिंग की योग्यता होनी चाहिए। साथ में दो साल का अनुभव भी अनिवार्य था। लेकिन प्रदेश स्तर पर इसे बदलकर बीएससी नर्सिंग, जीएनएम भी जोड़ दिया गया। साथ ही दो साल के अनुभव की शर्त भी हटा दी गई। जिससे दोनों ही स्तर की नर्सों के काम काज को एक ही लेवल पर ला दिया गया। जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। कई जिलों में जिन उम्मीदवारों के पास केवल जीएनएम की डिग्री थी, वह साइकियाट्रिक नर्स के तौर पर चयनित हो गई। तो क्या वह अपने काम से न्याय कर सकेंगी? कई जिलों में ऐसी भर्ती कर दी गई हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी जीएमएम डिग्री धारक उम्मीदवार हैं, जिन्हें कई जिलों में इस भर्ती में भाग लेने से मना कर दिया गया। जबकि कई जिलों में इसी योग्यता वाली उम्मीदवार भर्ती हो गई और विभाग में काम कर रही हैं। सीएम विंडो पर शिकायत करने वाले व्यक्ति के भी परिवार से ऐसी ही उम्मीदवार भर्ती से वंचित रह गई। अब शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस भर्ती की जांच की जाए और जिन उम्मीदवारों का नियमों का उल्लंघन कर चयन हुआ है, उनके कांट्रेक्ट को आगे ना बढ़ाया जाए।
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इस संबंध में विभाग में एनएचएम की प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. वीना सिंह ने कहा कि ऐसी एक शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।