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स्कूलों में आने वाले बच्चों के सेफ्टी प्रोटोकॉल पर रहेगी कमेटी की निगरानी
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शिक्षा विभाग 16 जुलाई से कक्षा नौवीं से 12वीं तक के स्कूलों को खोलने की तैयारी में है। जिस प्रकार कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर में बच्चों को खतरा ज्यादा बताया जा रहा है, उसको देखते हुए शिक्षा विभाग ने पहले ही स्कूलों में कक्षाएं शुरू करवाने के प्रबंधों को पुख्ता करना शुरू कर दिया है। अब स्कूलों में एक दिन में केवल 50 प्रतिशत बच्चों की कक्षाएं लगाने की ही अनुमति होगी। ऐसे में बाकी 50 प्रतिशत बच्चों को दूसरे दिन बुलाया जाएगा। स्कूलों में आने वाले इन बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए स्कूलों के प्रबंधन को कमेटियां बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूल में बनी नई कमेटी की बच्चों के सेफ्टी प्रोटोकॉल को देखेगी। इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान के अलावा, मुख्य शिक्षक अथवा प्रिंसिपल, एक पीटीआई शिक्षक, एक डीपीई, दो शिक्षक, एनएसएस, एनसीसी या स्काउट से संबंधित शिक्षक व एक सक्षम युवा को शामिल किया जाएगा। इनके अलावा कंप्यूटर शिक्षक व स्कूलों में बने हाउसेज में से उसका हेड कमेटी में शामिल किया जाएगा।
दोनों डोज लगवाए बिना शिक्षक को नहीं होगी बच्चे पढ़ाने की अनुमति :- वैक्सीन की दोनों डोज लगवाए बिना शिक्षकों को बच्चे पढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। इसी प्रकार स्कूलों में आने वाले बच्चों की भी रोजाना स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। बच्चों की थर्मल स्कैनिंग करने और तापमान से संबंधित डाटा प्रतिदिन अवसर एप पर डाला जाएगा। यहां तक कि बच्चों को पानी पीने के लिए बोतलें तक घर से लानी होंगी। स्कूल में नलों से पानी की बोतलें भरने की अनुमति होगी। नलों पर पानी नहीं पानी होगा। बोतल से ही बच्चे पानी लेंगे और एक दूसरे को बोतल भी नहीं देंगे।
रोजाना एक ही बेंच पर बैठेंगे बच्चे :-बच्चों को बैठने के रोजाना एक ही बैंच उपलब्ध करवाया जाएगा। किसी भी दूसरे बेंच पर बैठने की बच्चे को अनुमति नहीं होगी। अगर स्कूल में ज्यादा बड़े कमरे हैं तो बच्चों को कमरों में बैठाया जाएगा, अन्यथा बरामदे में खुले स्थानों पर बैठाया जाएगा। प्रत्येक बच्चे के बीच में कम से कम 6 फीट की दूरी अनिवार्य रहेगी। बच्चों को मास्क, सैनिटाइजर व साबुन स्कूलों में ही उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा व डिप्टी डीईओ कुलदीप सिंह ने बताया कि स्कूल के मुख्य द्वार को भी दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें से एक हिस्से से बच्चों को स्कूल में प्रवेश करवाया जाएगा, जबकि दूसरा हिस्सा निकास के लिए होगा। अभिभावकों की अनुमति के बाद ही बच्चों को स्कूल में बुलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों का नंबर भी स्कूलों में उपलब्ध रहेगा।
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दोनों डोज लगवाए बिना शिक्षक को नहीं होगी बच्चे पढ़ाने की अनुमति :- वैक्सीन की दोनों डोज लगवाए बिना शिक्षकों को बच्चे पढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। इसी प्रकार स्कूलों में आने वाले बच्चों की भी रोजाना स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। बच्चों की थर्मल स्कैनिंग करने और तापमान से संबंधित डाटा प्रतिदिन अवसर एप पर डाला जाएगा। यहां तक कि बच्चों को पानी पीने के लिए बोतलें तक घर से लानी होंगी। स्कूल में नलों से पानी की बोतलें भरने की अनुमति होगी। नलों पर पानी नहीं पानी होगा। बोतल से ही बच्चे पानी लेंगे और एक दूसरे को बोतल भी नहीं देंगे।
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रोजाना एक ही बेंच पर बैठेंगे बच्चे :-बच्चों को बैठने के रोजाना एक ही बैंच उपलब्ध करवाया जाएगा। किसी भी दूसरे बेंच पर बैठने की बच्चे को अनुमति नहीं होगी। अगर स्कूल में ज्यादा बड़े कमरे हैं तो बच्चों को कमरों में बैठाया जाएगा, अन्यथा बरामदे में खुले स्थानों पर बैठाया जाएगा। प्रत्येक बच्चे के बीच में कम से कम 6 फीट की दूरी अनिवार्य रहेगी। बच्चों को मास्क, सैनिटाइजर व साबुन स्कूलों में ही उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा व डिप्टी डीईओ कुलदीप सिंह ने बताया कि स्कूल के मुख्य द्वार को भी दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें से एक हिस्से से बच्चों को स्कूल में प्रवेश करवाया जाएगा, जबकि दूसरा हिस्सा निकास के लिए होगा। अभिभावकों की अनुमति के बाद ही बच्चों को स्कूल में बुलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों का नंबर भी स्कूलों में उपलब्ध रहेगा।
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