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नगर परिषद की जमीन कब्जाने के मामले में कमेटी गठित, तीन दिन में जवाब तलब
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Committee formed in the matter of grabbing the land of the city council, called for a reply in three days
- फोटो : Kaithal
कैथल। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के निकट स्थित मुख्य मार्ग के एक प्लाट के मामले में डीसी के आदेश पर पिछले तीन दिनों से नगर परिषद प्रशासन छानबीन में जुटा है। डीसी ने मामले में जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन कर तीन दिन में जवाब तलब किया है। वहीं सोमवार को नगर परिषद को न्यायालय से प्लाट को लेकर यथा स्थिति बनाए रखने के लिए स्टे ऑर्डर मिल गया है। अब मामले की सुनवाई आगामी 25 मार्च को होगी। वहीं ईओ नगर परिषद ने इस मामले में डीसी को पत्र लिखकर प्लाट की रजिस्टरी रद्द करने की मांग की है। इतना ही नहीं ईओ ने अपनी जांच में वर्ष 2015 से 2020 तक प्रॉपर्टी टैक्स शाखा में असेसमेंट करने वाले कर्मचारियों की सूची डीसी कार्यालय को सौंप दी है। इन सभी को जांच में शामिल कर संबंधित प्लाट की रजिस्टरी करने वाले कर्मचारी की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी।
विदित हो कि राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के निकट मुख्य मार्ग पर स्थित बेशकीमती प्लाट को लेकर 16 मार्च को कैथल की एक अदालत ने फैसला दिया था कि नगर परिषद इस प्लाट में निर्माण करने के लिए हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके बाद जब नरवाना निवासी रामनारायण नामक व्यक्ति ने निर्माण कार्य शुरू किया तो मामले की सूचना डीसी प्रदीप दहिया तक पहुंची। डीसी के आदेश पर ईओ नगर परिषद कुलदीप मलिक ने थाना शहर में शिकायत देकर काम रुकवाने की मांग की। साथ ही पूर्व डीसी द्वारा इसी प्लाट के संबंध में की गई सिफारिश पर केस दर्ज करने के लिए भी पत्र लिखा। पुलिस ने 19 मार्च को इस मामले में प्लाट बेचने वाले, खरीदने वाले सहित रजिस्टरी लिखने वाले वसीका नवीस व अधिवक्ता के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था।
अब सोमवार को इस मामले में डीसी प्रदीप दहिया की ओर से जारी निर्देश ईओ कार्यालय में पहुंचे, जिसमें डीसी ने निर्देश दिए हैं कि नगर परिषद की जमीन में असेसमेंट रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर कब्जा किए जाने की बात सामने आई है। इस मामले की जांच के लिए डीएमसी कुलधीर सिंह की अध्यक्षता में ईओ कुलदीप मलिक, डीआरओ चांदी राम व नायब तहसीलदार आशीष कुमार को शामिल किया गया। जांच समिति को तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। इस मामले की पूरी जांच की जा रही है। निष्पक्ष जांच के उपरांत तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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न्यायालय से मिला स्टे-
ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि डीसी महोदय के निर्देश पर प्लाट मामले में की जा रही कार्रवाई में सोमवार को संबंधित न्यायालय में अपील की गई, जिसमें प्लाट पर स्टे मिल गया है। अब संबंधित व्यक्ति 25 मार्च तक इस प्लाट पर निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकता। 25 मार्च को मामले की अगली सुनवाई होगी।
रजिस्टरी रद करने के लिए डीसी को भेजा मांग पत्र-
ईओ के अनुसार प्लाट की रजिस्टरी असेसमेंट के आधार पर हुई है। पूर्व में की जा चुकी जांच में इस मामले में फर्जीवाड़ा पाया गया है, इसीलिए इस रजिस्टरी को रद करने की मांग के लिए डीसी को पत्र लिखा गया है। दूसरी ओर रामनारायण द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है कि यह प्लाट उसका है। इसके लिए उसके पास सारे कागजात हैं, जिनके आधार पर उसने न्यायालय के आदेश के बाद निर्माण कार्य शुरू किया था।
नप व तहसील कार्यालय के आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों पर गिरेगी गाज-
डीसी के आदेश पर असेसमेंट करने वाले कर्मचारियों की छानबीन की जा रही है। ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि उन्होंने आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों के नाम दिए हैं, जिन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। मामले में जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आशंका जताई जा रही कि मामले में तहसील कार्यालय से भी कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है।
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विदित हो कि राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के निकट मुख्य मार्ग पर स्थित बेशकीमती प्लाट को लेकर 16 मार्च को कैथल की एक अदालत ने फैसला दिया था कि नगर परिषद इस प्लाट में निर्माण करने के लिए हस्तक्षेप नहीं करेगी। इसके बाद जब नरवाना निवासी रामनारायण नामक व्यक्ति ने निर्माण कार्य शुरू किया तो मामले की सूचना डीसी प्रदीप दहिया तक पहुंची। डीसी के आदेश पर ईओ नगर परिषद कुलदीप मलिक ने थाना शहर में शिकायत देकर काम रुकवाने की मांग की। साथ ही पूर्व डीसी द्वारा इसी प्लाट के संबंध में की गई सिफारिश पर केस दर्ज करने के लिए भी पत्र लिखा। पुलिस ने 19 मार्च को इस मामले में प्लाट बेचने वाले, खरीदने वाले सहित रजिस्टरी लिखने वाले वसीका नवीस व अधिवक्ता के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था।
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अब सोमवार को इस मामले में डीसी प्रदीप दहिया की ओर से जारी निर्देश ईओ कार्यालय में पहुंचे, जिसमें डीसी ने निर्देश दिए हैं कि नगर परिषद की जमीन में असेसमेंट रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर कब्जा किए जाने की बात सामने आई है। इस मामले की जांच के लिए डीएमसी कुलधीर सिंह की अध्यक्षता में ईओ कुलदीप मलिक, डीआरओ चांदी राम व नायब तहसीलदार आशीष कुमार को शामिल किया गया। जांच समिति को तीन दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा। इस मामले की पूरी जांच की जा रही है। निष्पक्ष जांच के उपरांत तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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न्यायालय से मिला स्टे-
ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि डीसी महोदय के निर्देश पर प्लाट मामले में की जा रही कार्रवाई में सोमवार को संबंधित न्यायालय में अपील की गई, जिसमें प्लाट पर स्टे मिल गया है। अब संबंधित व्यक्ति 25 मार्च तक इस प्लाट पर निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकता। 25 मार्च को मामले की अगली सुनवाई होगी।
रजिस्टरी रद करने के लिए डीसी को भेजा मांग पत्र-
ईओ के अनुसार प्लाट की रजिस्टरी असेसमेंट के आधार पर हुई है। पूर्व में की जा चुकी जांच में इस मामले में फर्जीवाड़ा पाया गया है, इसीलिए इस रजिस्टरी को रद करने की मांग के लिए डीसी को पत्र लिखा गया है। दूसरी ओर रामनारायण द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है कि यह प्लाट उसका है। इसके लिए उसके पास सारे कागजात हैं, जिनके आधार पर उसने न्यायालय के आदेश के बाद निर्माण कार्य शुरू किया था।
नप व तहसील कार्यालय के आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों पर गिरेगी गाज-
डीसी के आदेश पर असेसमेंट करने वाले कर्मचारियों की छानबीन की जा रही है। ईओ कुलदीप मलिक ने बताया कि उन्होंने आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों के नाम दिए हैं, जिन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। मामले में जो भी कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आशंका जताई जा रही कि मामले में तहसील कार्यालय से भी कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है।