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शौक ने दिला दी बस परिचालक को अलग पहचान

Tue, 13 Sep 2016 12:49 AM IST
ब्यूरो कैथल
ब्यूरो कैथल Updated Tue, 13 Sep 2016 12:49 AM IST
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सिक्कों का कलेक्‍शन दिखाता राजाराम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
गांव करोड़ा निवासी राजाराम ने कभी नहीं सोचा था कि उनका सिक्के एकत्रित करने का शौक उन्हें ऐसी पहचान दिलवा देगा कि सभी आश्चर्यचकित हो जाएंगे। 33 साल में करीब 4 सदियों के इतिहास को सिक्कों के माध्यम से समेट कर रखने वाले राजाराम ने सोमवार को पहली बार अपने सिक्के जब जिले के अधिकारियों के सामने रखा तो सभी हैरान रह गए। यह जानकारी भी उस समय मिली, जब उन्हें स्वर्ण जयंती समारोह में जाने के लिए प्रशासन की अनुमति चाहिए थी। अभी तक उन्होंने अपने सिक्कों का कहीं प्रदर्शन भी नहीं किया है। लेकिन गांव के अलावा खुद रोडवेज विभाग में उन्हें इन सिक्कों ने अलग पहचान दिलवा दी है।
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सुभाष बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 1983 में गांव करोड़ा में करियाणे की दुकान की थी। जहां बच्चे सिक्के लेकर चीजें खरीदने आते थे। उस समय वे प्राचीन महत्व के सिक्के एकत्रित करने शुरू कर दिए। उसने बताया कि इसके बाद जो भी प्राचीन या पहली बार प्रयोग हुआ सिक्का उसे मिलता, वह उसे अपने पास रख लेता। इस तरह से वर्ष 2012 में उसकी रोडवेज में नौकरी लगने तक उसके पास अच्छे खासे सिक्के एकत्रित हो गए। उसने यह शौक बाद में भी नहीं छोड़ा। इसके बाद उसे जहां भी पता लगा, वह वहीं सिक्के लेने पहुंच गया। राजाराम ने बताया कि उसने आगरा, दिल्ली, हरिद्वार सहित कई शहरों से सिक्के एकत्रित किए हैं। अब उसके पास करीब 500 से ज्यादा सिक्के हैं। जिन्हें एकत्रित करने के लिए एक लाख रुपये से भी ज्यादा का खर्च आ चुका है। लेकिन अपने शौक के आगे वह इसे कुछ नहीं मानते।
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4 सदी पुराने सिक्कों से लेकर आधुनिक 1000 रुपये का सिक्का भी है राजाराम के पास
करोड़ा निवासी राजाराम के पास वर्ष 1816 से लेकर वर्तमान में 1000 रुपये तक के लेटेस्ट सिक्के हैं। 1000, 125, 500, 100, 60, 50 व 20 रुपये के आधुनिक सिक्के तो अभी मार्केट में भी कम आए हैं। लेकिन राजाराम के संग्रह में ये कई-कई प्रकार के हैं। जिन्हें वह दिल्ली से विशेष रूप से लेकर आया है। इसके अलावा विदेशी सिक्कों में जर्मनी, कनाडा, फ्रांस, नेपाल, भूटान, अमेरिका के सिक्के हैं। वहीं 18वीं शताब्दी के सिक्कों के अलावा इसके बाद के काल के चार आने, दो आने, आधा आना, 1919 के सिक्के भी हैं। साथ ही वर्ष 1948 में पहली बार आया दस रुपये का सिक्का, 1972 में आया 10 रुपये का सिक्का, हनुमान की फोटो वाले सिक्के, सीता-माता की रामचंद्र की फोटो वाले सिक्के, इंदिरा गांधी की फोटो वाले सिक्के, विवेकानंद, राजीव गांधी, जवाहर लाल, भगत सिंह, रविंद्रनाथ टैगोर, बाबा साहब अंबेडकर के सिक्के हैं।
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स्वर्ण जयंती समारोह में करेगा प्रदर्शित
सुभाष ने कहा कि उसने अभी तक कहीं भी इनका प्रदर्शन नहीं किया है। वह पहली बार हरियाणा स्वर्ण जयंती समारोह में इनका प्रदर्शन करेगा। इसलिए वह अनुमति हेतु डीसी के पास आया था। जहां डीसी व खुद एससपी ने उसके हुनर की खूब सराहना की। अब वह इन सिक्कों का प्रदर्शन स्वर्ण जयंती समारोह में करेगा।
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