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सर्दियों में पानी के लिए मरीजों के छूट रहे पसीने
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 23 Dec 2016 12:33 AM IST
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पानी की कमी से मरीज बेहाल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल में दाखिल मरीजों को सर्दियों के मौसम में भी पीने के पानी व शौचालय के लिए पसीने छूट रहे हैं। मरीजों व उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पीने के पानी पर खाने से ज्यादा खर्च आता है। दिन में कई बोतलें खरीदनी पड़ती हैं। वहीं शौचालयों में पानी ना होने के कारण सुबह शाम काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में दाखिल सुबोध व सुधा ने बताया कि अस्पताल में शौचालयों में पानी को लेकर काफी परेशानियां हैं। यहां मुश्किल से पानी रहता है। जिसके चलते बदबू उठती रहती है। सुबह जरूरत के समय तो पानी मिलता ही नहीं। जिस कारण इधर-उधर भटकना पड़ता है।
पत्नी का इलाज करवाने के लिए पहुंचे हेमन कुमार ने कहा कि यहां खाने से ज्यादा पीने के पानी पर खर्च करना पड़ता है। वार्ड में दाखिल मरीजों व उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए नीचे जाना पड़ता है। वहीं शौचालयों की हालत तो इतनी खस्ता है कि मरीज दोबारा से बीमार हो जाए। उसकी पत्नी का ऑपरेशन होना था, उसे इससे पहले शौचालय में जाना था। लेकिन शौचालयों में पानी नहीं था। जिस कारण वह मजबूरन ऐसे ही ऑपरेशन थियेटर में चली गई।
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एक मरीज के साथ पहुंचे पंडित ऐमना कुमार गौड़ ने कहा कि यहां शौचालय की हालत इतनी खस्ता है कि अंदर भी नहीं जा सकते। अब जब शोर मचाया तो मोटर चला दी गई। पानी की कमी में वार्ड में दाखिल मरीज, महिलाओं को काफी दिक्कतें हो रही हैं।
यहां दाखिल परमेश्वरी देवी ने कहा कि वह तीन दिन से यहां दाखिल है। शौचालयों की हालत इतनी खस्ता है कि वहां जाना भी मुश्किल है। पानी की ज्यादा समस्या है।
कलायत के राजा ने कहा कि पीने का पानी भी नहीं है। काफी कहने के बाद अब एक बजे पानी की मोटर चलाई गई है, तब जाकर पानी आया है।
वार्ड की छत से टपक रहा पानी कर रहा है परेशान
एक वार्ड में छत से पानी टपक रहा है। जिस कारण पूरे वार्ड में पानी बिखरा रहता है। ऐसे में कई मरीज यहां फिसल कर भी गिर चुके हैं। मरीज मेडिकल कचरा डालने वाले डस्टबिन रखकर किसी तरह पानी एकत्रित करते हैं। ताकि पानी पूरे वार्ड में ना फैले।
जितनी देर मोटर चलती है, उतनी देर रहता है पानी
एक सफाई कर्मचारी ने कहा कि यहां जितनी देर मोटर चलती है, उतनी ही देर शौचालयों में पानी रहता है। ऐसे में उनका भी क्या कुसूर है। वे फिर भी इसे साफ करने का प्रयास करते हैं।
इन वार्डों का टंकियों में भी कनेक्शन है। पानी की स्टोरेज भी की जाती है। पता लगाया जाएगा कि पानी क्यों नहीं रहता। मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
डा. ओमप्रकाश, एसएमओ, जिला अस्पताल।
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अस्पताल में दाखिल सुबोध व सुधा ने बताया कि अस्पताल में शौचालयों में पानी को लेकर काफी परेशानियां हैं। यहां मुश्किल से पानी रहता है। जिसके चलते बदबू उठती रहती है। सुबह जरूरत के समय तो पानी मिलता ही नहीं। जिस कारण इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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पत्नी का इलाज करवाने के लिए पहुंचे हेमन कुमार ने कहा कि यहां खाने से ज्यादा पीने के पानी पर खर्च करना पड़ता है। वार्ड में दाखिल मरीजों व उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए नीचे जाना पड़ता है। वहीं शौचालयों की हालत तो इतनी खस्ता है कि मरीज दोबारा से बीमार हो जाए। उसकी पत्नी का ऑपरेशन होना था, उसे इससे पहले शौचालय में जाना था। लेकिन शौचालयों में पानी नहीं था। जिस कारण वह मजबूरन ऐसे ही ऑपरेशन थियेटर में चली गई।
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एक मरीज के साथ पहुंचे पंडित ऐमना कुमार गौड़ ने कहा कि यहां शौचालय की हालत इतनी खस्ता है कि अंदर भी नहीं जा सकते। अब जब शोर मचाया तो मोटर चला दी गई। पानी की कमी में वार्ड में दाखिल मरीज, महिलाओं को काफी दिक्कतें हो रही हैं।
यहां दाखिल परमेश्वरी देवी ने कहा कि वह तीन दिन से यहां दाखिल है। शौचालयों की हालत इतनी खस्ता है कि वहां जाना भी मुश्किल है। पानी की ज्यादा समस्या है।
कलायत के राजा ने कहा कि पीने का पानी भी नहीं है। काफी कहने के बाद अब एक बजे पानी की मोटर चलाई गई है, तब जाकर पानी आया है।
वार्ड की छत से टपक रहा पानी कर रहा है परेशान
एक वार्ड में छत से पानी टपक रहा है। जिस कारण पूरे वार्ड में पानी बिखरा रहता है। ऐसे में कई मरीज यहां फिसल कर भी गिर चुके हैं। मरीज मेडिकल कचरा डालने वाले डस्टबिन रखकर किसी तरह पानी एकत्रित करते हैं। ताकि पानी पूरे वार्ड में ना फैले।
जितनी देर मोटर चलती है, उतनी देर रहता है पानी
एक सफाई कर्मचारी ने कहा कि यहां जितनी देर मोटर चलती है, उतनी ही देर शौचालयों में पानी रहता है। ऐसे में उनका भी क्या कुसूर है। वे फिर भी इसे साफ करने का प्रयास करते हैं।
इन वार्डों का टंकियों में भी कनेक्शन है। पानी की स्टोरेज भी की जाती है। पता लगाया जाएगा कि पानी क्यों नहीं रहता। मरीजों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
डा. ओमप्रकाश, एसएमओ, जिला अस्पताल।