फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Chaturmas from today, Lord Shiva will govern the creation

Kaithal News: आज से चातुर्मास, भगवान शिव करेंगे सृष्टि का संचालन

Wed, 17 Jul 2024 06:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 17 Jul 2024 06:39 AM IST
विज्ञापन
Chaturmas from today, Lord Shiva will govern the creation
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

पूंडरी/कलायत। चातुर्मास का अर्थ है चार माह धर्म, कर्म, व्रत-उपवास, ईश्वर का ध्यान, साधना, मंत्र, जप और दान, धर्म के पवित्र चार माह चातुर्मास कहलाते हैं। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी और कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवात्थान एकादशी कहा जाता है। चातुर्मास भगवान विष्णु का शयनकाल होता है। यह तिथि बुधवार को है। यह जानकारी पंडित रविदत्त शास्त्री और पंडित विशाल शांडिल्य ने दी है।

पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास के दौरान वह योग निद्रा में रहते हैं, इसलिए इस समय विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन आदि वर्जित रहते हैं। इस दौरान घर का निर्माण प्रारम्भ, गृह प्रवेश, उग्रदेवता की प्रतिष्ठा, नई दुकान का उद्घाटन, वाहनों का क्रय विक्रय नहीं किया जा सकता है। इन महीनों में श्री विष्णु शयन करते हैं। इसलिए इन महीनों में कोई मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।
विज्ञापन


पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया धर्म शास्त्रों के अनुसार, सृष्टि के संचालन का कार्य भगवान विष्णु के हाथ में रहता है, लेकिन उनके शयनकाल में जाने के कारण सारा कार्यभार भगवान शिव और उनके परिवार पर आ जाता है। इसलिए चातुर्मास में भगवान शिव और उनके परिवार से जुड़े व्रत-त्योहार आदि मनाए जाते हैं। श्रावण माह पूरा भगवान शिव को समर्पित रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें श्रद्धालु एक माह उपवास रखते हैं, बाल-दाढ़ी नहीं कटवाते हैं। मंदिरों में विशेष अभिषेक, पूजन किए जाते हैं। भादो माह में दस दिनों तक श्रीगणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है फिर आश्विन माह में देवी दुर्गा की आराधना शारदीय नवरात्र के जरिए की जाती है।

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरु होकर चातुर्मास कार्तिक शुक्ल की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन पूर्ण होता है। पुराणों के अनुसार इस वक्त भगवान विष्णु क्षीर सागर की अनन्त शैय्या पर योगनिद्रा के लिए चल जाते हैं। इसलिए चातुर्मास के प्रारंभ की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं।

इस चौमासे के अंत में जो एकादशी आती है। उसे देव उठनी एकादशी कहते हैं क्योंकि यह समय भगवान के उठने का समय होता है। हमारे हिंदू संस्कृति में चातुर्मास का विशेष महत्व है। पहले बुजुर्ग इसे चौमासा भी कहते थे। इस साल चातुर्मास 17 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है और यह 12 नवंबर तक रहेगा। चातुर्मास यानी 4 माह( श्रावण भाद्रपद अश्विन कार्तिक) से है विष्णु जी की अनुपस्थिति के कारण चातुर्मास में बहुत से लोग मांगलिक कार्य नहीं करते।

पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि जब कार्तिक शुक्ल की एकादशी जिसे देवोत्थान एकादशी कहते हैं। तब विष्णु भगवान जागते हैं और फिर पुनःशुभ कार्य की शुरुआत हो जाती है। ये 4 माह खानपान में अत्यंत सावधानी बरतने के भी होते हैं। इस समय हवा में नमी बढ़ जाती है। इसके कारण बैक्टीरिया, कीडे, जीव जंतु पनपते हैं इस दौरान शरीर की पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है इसीलिए संतुलित और हल्का सुपाच्य भोजन करें।


पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल की एकादशी तिथि का आरंभ 16 जुलाई रात 08:33 से शुरू होगा और इसका समापन 17 जुलाई 2024 रात 09: 02 पर होगा। उदयातिथि के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत 17 जुलाई को रखा जाएगा। देवशयनी एकादशी पर दूजी तिथि का योग नहीं बन रहा है। इसके लिए सामान्य जन और वैष्णवजन एक साथ ही देवशयनी एकादशी मनाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed