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नागरिकता कानून पर किसी के बहकावे में ना आएं लोग-सांसद नायब सैनी
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सांसद नायब सैनी ने सलीमपुर महदूद, सोलु माजरा व कौल से नागरिकता संशोधन के पक्ष में चलाए गए जनसंपर्क अभियान व पैदल मार्च का किया शुभारंभ किया। उनके साथ प्रदेश महामंत्री वेदपाल, भाजपा जिला अध्यक्ष अशोक गुज्जर भी मौजूद थे। जिन्होंने इस संबंध में लिखित सामग्री भी वितरित की। इस अवसर पर सांसद ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून मुसलमानों से देश की नागरिकता छीन लेने का कानून नहीं है बल्कि यह नागरिकता देने का कानून है। विपक्ष को जनता के बीच में भ्रम नहीं फैलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को इस कानून के संबंध में किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
सांसद ने कहा कि विपक्ष वोट बैंक की राजनीति करने के लिए भ्रम फैलाकर मुसलमानों में यह दुष्प्रचार कर रहा है कि यह कानून मुसलमानों की देश से नागरिकता छीन लेने का कानून है जबकि यह कानून केवल नागरिकता देने का कानून है। लोगों के विपक्ष के बयानों की परवाह नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ननकाना साहिब में जो हुआ, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान, बंग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और फारसी भाई-बहनों के साथ कितना दुर्व्यवहार होता होगा। उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 प्रतिशत थी, परंतु 2011 में घटकर वह संख्या मात्र 3.7 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को इसका अनुमान लगाना होगा कि यह लोग कहां गए। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल संसद में पास हो गया, अब यह पूरे देश में लागू होगा। इस कानून के लागू होने से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और फारसी और ईसाई धर्म के वो लोग, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था, वो ही नागरिकता के पात्र होंगे। उन्होंने बताया कि इस कानून के बारे में जनता को जानकारी देने के लिए जनजागरण अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत सामाजिक संगठन और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर नागरिकता संशोधन बिल के बारे में लोगों को जानकारी देंगे।
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सांसद ने कहा कि विपक्ष वोट बैंक की राजनीति करने के लिए भ्रम फैलाकर मुसलमानों में यह दुष्प्रचार कर रहा है कि यह कानून मुसलमानों की देश से नागरिकता छीन लेने का कानून है जबकि यह कानून केवल नागरिकता देने का कानून है। लोगों के विपक्ष के बयानों की परवाह नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ननकाना साहिब में जो हुआ, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान, बंग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और फारसी भाई-बहनों के साथ कितना दुर्व्यवहार होता होगा। उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 प्रतिशत थी, परंतु 2011 में घटकर वह संख्या मात्र 3.7 प्रतिशत रह गई। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को इसका अनुमान लगाना होगा कि यह लोग कहां गए। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल संसद में पास हो गया, अब यह पूरे देश में लागू होगा। इस कानून के लागू होने से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और फारसी और ईसाई धर्म के वो लोग, जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था, वो ही नागरिकता के पात्र होंगे। उन्होंने बताया कि इस कानून के बारे में जनता को जानकारी देने के लिए जनजागरण अभियान चलाया गया है। इस अभियान के तहत सामाजिक संगठन और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर नागरिकता संशोधन बिल के बारे में लोगों को जानकारी देंगे।
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