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Kaithal News: भोले बाबा का सावन शृंगार बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 12:20 AM IST
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Bhole Baba's 'Sawan' adornment became the center of attraction for devotees.
खटवांगेश्वर मंदिर में सजे महाकाल
कलायत। प्रकृति की गोद में बसे पौराणिक स्वयंभू शिव मंदिर खडालवा में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर तैयारियां पूरी जोरों पर हैं। सावन माह शुरू होते ही खडालवा के शिव मंदिर में भोलेबाबा का चंदन आदि के साथ किया गया शृंगार श्रद्धालुओं को बहुत भा रहा है। प्राचीन शिव मंदिर महंत रघुनाथ गिरि ने बताया कि मंदिर में महाकांत का हर रोज अलग से शृंगार किया जाता है। कलायत के बेचिराग गांव खंडालवा स्थित शिवलिंग करीब 5 हजार वर्ष पुराना है।
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मंदिर में स्थापित पवित्र शिवलिंग को पाताल लोक से प्रकट हुआ बताया जाता है। यही कारण है कि यहां शिवशंभु को पातालेश्वर और खट्वांगेश्वर के नाम से जाना जाता है। मंदिर एक टीले पर बना है। बेशक गांव में कोई परिवार नहीं रहता। लेकिन इस स्थान की धार्मिक महिमा दूर-दूर तक है। मान्यता के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव का संबंध भगवान राम की वंशावली से जुड़ा है। महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि प्राचीन शिव मंदिर की ऊंचाई 151 फुट जिसमें 30 फुट जमीन के अंदर, 110 फुट मंदिर की ऊंचाई और 11 फुट कलश की ऊंचाई है। प्रबंध समिति प्रधान मास्टर बलबीर मटौर ने बताया कि राजा खट्वांग द्वारा राजकाज का परित्याग कर खड़ालवा में भगवान शिव का तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर स्वयं शिव भगवान प्रकट हुए। खटवांग ने भगवान शिव से हर जन्म में प्रभु भक्ति की कामना जाहिर की। उसी का परिणाम था कि वे यहां खटवांग के नाम से जाने गए।
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पंडित विशाल शांडिल्य ने कहा कि शिव भक्तों के लिए पूरा सावन माह बहुत ही पवित्र होता है। इस माह में आने वाली शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि के समान ही होता है। दरअसल सावन का महीना भगवान शिव को प्रिय है और शिवरात्रि यानी इस माह की चतुर्दशी तिथि के प्रतिनिधि देव भगवान शंकर हैं। ऐसे में माह और तिथि दोनों शिव पूजा के लिए उत्तम है। सावन माह में रुद्राभिषेक का भी विशेष महत्व है। इस पूरे माह शिववास हर दिन होता है। सावन के अतिरिक्त अन्य महीनों में आप किसी भी दिन रुद्राभिषेक नहीं करा सकते हैं। उसके लिए आपको शिववास देखना पड़ता है।
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