फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Benefits of doing natural farming explained in awareness camp

Kaithal News: जागरूकता शिविर में बताए प्राकृतिक खेती करने के फायदे

Sat, 04 Jan 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 04 Jan 2025 01:20 AM IST
विज्ञापन
Benefits of doing natural farming explained in awareness camp
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र, कैथल की ओर से गांव जसवंती में खंड स्तरीय प्राकृतिक खेती जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया गया। इसमें प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभ भी बताए गए। 

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि खेती में रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से रसायन मनुष्य की खाद्य शृंखला में चले गए हैं, जिससे समाज को कैंसर जैसे घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रसायन मुक्त खेती आज समय की मांग हैं। तभी हम स्वस्थ रहेंगे और समाज भी।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि किसानों के पास खुद की जमीन हैं, इसलिए वे सौभाग्यशाली है कि वे अपना शुद्ध अनाज व सब्जियां पैदा करके खा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि चारा फसलों पर कीटनाशकों के प्रयोग से ये कीटनाशक दूध के माध्यम से सीधे ही शरीर में चले जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ते है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे सबसे पहले अपने खेत में हर रोज प्रयोग होने वाली सब्जियों तथा चारा फसलों को प्राकृतिक खेती प्रणाली से उगाकर इन्हें जहरमुक्त करें व अपना व अपने परिवार की खानपान की आदत में सुधार लाएं।

केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार ने किसानों को मिट्टी व पानी जांच करवाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम अपने खेत कि मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं, क्योंकि प्राकृतिक खेती में रासायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से तैयार किए गए उत्पादों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र व दशपर्णी अर्क इत्यादि का उपयोग किया जाता हैं। ये प्राकृतिक उत्पाद मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों कि संख्या बढ़ने में मदद करते हैं और इस पद्धति से पैदा होने वाली फसलें भी स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं।


इस मौके पर केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार ने किसानों को कहा कि गेहूं एवं सरसों की फसलों की अधिक उपज लेने के लिए खरपतवारों का नियंत्रण करें व फसल में पानी व पोषक तत्वों की कमी न होने दे। इस गांव के प्राकृतिक खेती के प्रगतिशील किसान प्रदीप कुमार ने कार्यक्रम समापन पर कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों का धन्यवाद किया। इस मौके पर जसवंती गांव के 100 से अधिक किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed