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Kaithal News: जिला बनने से पहले आठ गेटों में बसा था कैथल शहर
Sat, 02 Nov 2024 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 02 Nov 2024 02:19 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला बनने से पहले कैथल शहर आठ गेटों में बसा था। शहर में अब तक तीन नए गेट बनकर तैयार हो चुके हैं जबकि इसमें से पहले स्थापित गेट में दो गेट बन चुके हैं।
गौरतलब है कि कैथल शहर में चंदाना गेट, प्रताप गेट, डोगरा गेट, सीवन गेट, माता गेट, कोठी गेट व क्योड़क गेट स्थापित थे। कैथल के जिला बनने के बाद शिक्षण क्षेत्र में इसका रूतबा बढ़ा। जिले के गठन से पहले केवल तीन शिक्षण संस्थान अस्तित्व में था। उस समय आरकेएसडी शिक्षण संस्थान, हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, जाट स्कूल और कमेटी चौक स्थित राजकीय स्कूल थे।
इतिहासकार कमलेश शर्मा ने बताया कि शुरुआत से ही कैथल का व्यापार में काफी योगदान था। यहां स्थापित मंडियां काफी प्रसिद्ध थी। यहां हाथ से ढुलाई होने के कारण दूर-दराज से मजदूर काम करने के लिए पहुंचते थे।
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उन्होंने बताया कि शहर में स्थित रेलवे स्टेशन भी अंग्रेजों के समय का है। इसका निर्माण वर्ष 1890 में हुआ था। वर्तमान में कैथल रेलवे पिछड़ा है। परंतु उस समय ट्रेन नरवाना से अंबाला वाया कैथल होकर जाती थी। जिले के गठन के बाद इस ट्रेन का संचालन कुरुक्षेत्र से नरवाना तक कर दिया गया। कैथल के जिला बनने के बाद यहां पर केवल दो नई ट्रेनें ही चलाई गई। जिसमें दिल्ली-कुरुक्षेत्र और जयपुर-दौलतपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन ही चलाई गई।
सभी आठ गेटों का होना है सुंदरीकरण ः पुराने जमाने की तर्ज पर कैथल के प्राचीन आठ गेटों का सुंदरीकरण होना है। इसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार दो करोड़ रुपये से प्राचीन आठ गेट बनाए जाने हैं। अब तक दो गेटों का जीर्णोद्धार कर सौंदर्यीकरण किया जा चुका है।
2018 में गेटों के जीर्णोद्धार की बनी थी योजना
नगर परिषद कैथल की ओर से वर्ष 2018 में शहर के उन सभी सात गेटों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पारित किया था, जिनके अंदर 100-150 साल पहले शहर बसता था। अब तक रेलवे गेट और कोठी गेट का निर्माण किया जा चुका है। जबकि जींद रोड स्थित मॉडल में टाउन में अलग से तोरण द्वार बनाया गया है।
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कैथल। जिला बनने से पहले कैथल शहर आठ गेटों में बसा था। शहर में अब तक तीन नए गेट बनकर तैयार हो चुके हैं जबकि इसमें से पहले स्थापित गेट में दो गेट बन चुके हैं।
गौरतलब है कि कैथल शहर में चंदाना गेट, प्रताप गेट, डोगरा गेट, सीवन गेट, माता गेट, कोठी गेट व क्योड़क गेट स्थापित थे। कैथल के जिला बनने के बाद शिक्षण क्षेत्र में इसका रूतबा बढ़ा। जिले के गठन से पहले केवल तीन शिक्षण संस्थान अस्तित्व में था। उस समय आरकेएसडी शिक्षण संस्थान, हिंदू वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, जाट स्कूल और कमेटी चौक स्थित राजकीय स्कूल थे।
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इतिहासकार कमलेश शर्मा ने बताया कि शुरुआत से ही कैथल का व्यापार में काफी योगदान था। यहां स्थापित मंडियां काफी प्रसिद्ध थी। यहां हाथ से ढुलाई होने के कारण दूर-दराज से मजदूर काम करने के लिए पहुंचते थे।
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उन्होंने बताया कि शहर में स्थित रेलवे स्टेशन भी अंग्रेजों के समय का है। इसका निर्माण वर्ष 1890 में हुआ था। वर्तमान में कैथल रेलवे पिछड़ा है। परंतु उस समय ट्रेन नरवाना से अंबाला वाया कैथल होकर जाती थी। जिले के गठन के बाद इस ट्रेन का संचालन कुरुक्षेत्र से नरवाना तक कर दिया गया। कैथल के जिला बनने के बाद यहां पर केवल दो नई ट्रेनें ही चलाई गई। जिसमें दिल्ली-कुरुक्षेत्र और जयपुर-दौलतपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन ही चलाई गई।
सभी आठ गेटों का होना है सुंदरीकरण ः पुराने जमाने की तर्ज पर कैथल के प्राचीन आठ गेटों का सुंदरीकरण होना है। इसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार दो करोड़ रुपये से प्राचीन आठ गेट बनाए जाने हैं। अब तक दो गेटों का जीर्णोद्धार कर सौंदर्यीकरण किया जा चुका है।
2018 में गेटों के जीर्णोद्धार की बनी थी योजना
नगर परिषद कैथल की ओर से वर्ष 2018 में शहर के उन सभी सात गेटों के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पारित किया था, जिनके अंदर 100-150 साल पहले शहर बसता था। अब तक रेलवे गेट और कोठी गेट का निर्माण किया जा चुका है। जबकि जींद रोड स्थित मॉडल में टाउन में अलग से तोरण द्वार बनाया गया है।