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Kaithal News: सावधान, एनीडेस्क एप से हो सकती है ठगी
Mon, 02 Dec 2024 02:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 02 Dec 2024 02:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। ऑनलाइन खरीदारी करनी हो या बैंक खाते से पैसा ट्रांसफर करना हो, ज्यादातर लोग इसके लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर आपके मोबाइल पर किसी सोशल मीडिया के जरिये एनीडेस्क मोबाइल एप का लिंक फारवर्ड होकर आए तो उस पर क्लिक करने से बचें। यह मोबाइल एप आपके बैंक खाते के लिए घातक हो सकता है। साइबर शातिर आजकल ऑनलाइन ठगी के लिए इसी एप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह कहना पुलिस अधीक्षक राजेश कालिया का। साइबर अपराध से बचाव के लिए टिप्स देते हुए एसपी राजेश कालिया ने बताया कि आप किसी भी दूरस्थ डेस्कटॉप एप को अपने डिवाइस में डाउनलोड न करें। किसी भी व्यक्ति को अपनी आईडी, पासवर्ड, पिन, खाता संख्या आदि की जानकारी न दें। उन्होंने एनीडेस्क नाम के एक रिमोट डेस्कटॉप एप के बारे में आगाह किया है।
एसपी का कहना है कि कुछ व्यक्ति गूगल पर मौजूद कस्टमर केयर का नंबर सर्च करके इस्तेमाल करते हैं और कुछ मामलों में पीड़ित खुद कुछ समस्याओं के समाधान के लिए कस्टमर केयर को कॉल करता है। ऐसे में धोखाधड़ी करने वाले का मकसद पीड़ित के मोबाइल फोन पर एनी डेस्क या टीम विवर एप डाउनलोड करने के लिए बाध्य करना होता है। कोई भी एप डाउनलोड करने के बाद धोखाधड़ी करने वाले को नौ अंकों के रिमोट डेस्क कोड की आवश्यकता होती है। इसलिए वह उसके लिए पीड़ित से पूछताछ करेगा। एक बार जब पीडि़त नौ अंकों वाला कोड बता देता है और एप की अनुमति दे देता है तो धोखाधड़ी करने वाले को अपने डिवाइस पर पीड़ित के डिवाइस की स्क्रीन देखने को मिल जाएगी और इसे वह रिकॉर्ड भी कर सकता है।
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एसपी ने यह भी बताया कि जब वह अपने बैंकिंग या यूपीआई एप का आईडी या पासवर्ड टाइप करता है तो ठग उसे नोट कर लेता है। यह एप फोन के लॉक होने पर भी बैकग्राउंड में काम करता है। एंड्रॉयड फोन पर एनीडेस्क एप आसानी से धोखेबाज व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना पीड़ित के फोन की स्क्रीन को देखने और रिकॉर्ड करने की अनुमति देता है। कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध से संबंधित किसी प्रकार की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट कर नजदीकी थाने में शिकायत दें।
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कैथल। ऑनलाइन खरीदारी करनी हो या बैंक खाते से पैसा ट्रांसफर करना हो, ज्यादातर लोग इसके लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अगर आपके मोबाइल पर किसी सोशल मीडिया के जरिये एनीडेस्क मोबाइल एप का लिंक फारवर्ड होकर आए तो उस पर क्लिक करने से बचें। यह मोबाइल एप आपके बैंक खाते के लिए घातक हो सकता है। साइबर शातिर आजकल ऑनलाइन ठगी के लिए इसी एप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह कहना पुलिस अधीक्षक राजेश कालिया का। साइबर अपराध से बचाव के लिए टिप्स देते हुए एसपी राजेश कालिया ने बताया कि आप किसी भी दूरस्थ डेस्कटॉप एप को अपने डिवाइस में डाउनलोड न करें। किसी भी व्यक्ति को अपनी आईडी, पासवर्ड, पिन, खाता संख्या आदि की जानकारी न दें। उन्होंने एनीडेस्क नाम के एक रिमोट डेस्कटॉप एप के बारे में आगाह किया है।
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एसपी का कहना है कि कुछ व्यक्ति गूगल पर मौजूद कस्टमर केयर का नंबर सर्च करके इस्तेमाल करते हैं और कुछ मामलों में पीड़ित खुद कुछ समस्याओं के समाधान के लिए कस्टमर केयर को कॉल करता है। ऐसे में धोखाधड़ी करने वाले का मकसद पीड़ित के मोबाइल फोन पर एनी डेस्क या टीम विवर एप डाउनलोड करने के लिए बाध्य करना होता है। कोई भी एप डाउनलोड करने के बाद धोखाधड़ी करने वाले को नौ अंकों के रिमोट डेस्क कोड की आवश्यकता होती है। इसलिए वह उसके लिए पीड़ित से पूछताछ करेगा। एक बार जब पीडि़त नौ अंकों वाला कोड बता देता है और एप की अनुमति दे देता है तो धोखाधड़ी करने वाले को अपने डिवाइस पर पीड़ित के डिवाइस की स्क्रीन देखने को मिल जाएगी और इसे वह रिकॉर्ड भी कर सकता है।
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एसपी ने यह भी बताया कि जब वह अपने बैंकिंग या यूपीआई एप का आईडी या पासवर्ड टाइप करता है तो ठग उसे नोट कर लेता है। यह एप फोन के लॉक होने पर भी बैकग्राउंड में काम करता है। एंड्रॉयड फोन पर एनीडेस्क एप आसानी से धोखेबाज व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना पीड़ित के फोन की स्क्रीन को देखने और रिकॉर्ड करने की अनुमति देता है। कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध से संबंधित किसी प्रकार की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट कर नजदीकी थाने में शिकायत दें।