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एक्यूआई बढ़कर हुआ 402, फानों में आग लगाने पर प्रशासन सख्त
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AQI increased to 402, administration strict on setting fire to fans
- फोटो : Kaithal
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पिछले सप्ताह जिले में अचानक से आग लगने की घटनाओं में तेजी आई है। दिवाली के दिन जिले में एयर क्वालिटी इंडेक्टस 254 था, जो अब बढ़कर 402 हो गया है। डीसी प्रदीप दहिया ने ऑनलाइन बैठक लेते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर औचक निरीक्षण करें। यदि कहीं लापरवाही मिलती है तो संबंधित ग्राम सचिव या पटवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। जिसमें चार्जशीट तक किया जा सकता है।
डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि जिला में धान की फसल कटने के बाद कहीं भी फानों में कहीं भी आग नहीं लगनी चाहिए। इसके लिए संबंधित पटवारी और ग्राम सचिव अपने-अपने क्षेत्र में सावधानी पूर्वक कार्य करें और यदि कहीं आग लगने की घटना नजर आती है तो तुरंत प्रभाव से फानों में लगी आग को बुझवाया जाए। चूंकि आग लगने से जहां एक ओर पर्यावरण दूषित होता है, वहीं दूसरी ओर जमीन की उपजाऊ ताकत भी कमजोर पड़ती है। इसलिए हम सबके लिए यह जरूरी है कि व्यवस्था पर पूरी नजर रखें और संबंधित विभागों के अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण भी करते रहें। लघु सचिवालय में आयोजित इस बैठक के दौरान कुछ कर्मचारी ऑनलाइन भी जुड़े हुए थे।
डीसी ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के डयूटी क्षेत्र में फानों में आग लगने की घटना नजर आती है तो संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। लगातार लापरवाही बरतने के चलते संबंधित को चार्ज सीट भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं भी व्यवस्था पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सभी संबंधित अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण करते रहें और किए गए कार्यों की रिपोर्ट डीसी कार्यालय को अवश्य भेजें।
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डीडीए डॉ. कर्मचंद को निर्देश दिए कि सभी 278 धान के गांवों में कहीं भी आग लगने की घटना न हो, इसके लिए विभाग के कर्मचारी सतर्कता से कार्य करते रहें। डीसी ने डीडीपीओ जसविंद्र सिंह को भी निर्देश देते हुए कहा कि वे अपनी टीम का मार्ग दर्शन करते हुए आग लगने की घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के कार्य को कार्य रूप में परिणत करें। सांझे प्रयासों के चलते ही आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। इस मौके पर सीटीएम अमित कुमार, डीआरओ टीआर गौतम, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह, तहसीलदार सुदेश मेहरा व सुनील कुमार, डीआईओ दीपक खुराना सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जिले में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। बुधवार को एक्यूआई औसत 402 रही। बारिश होगी तो प्रदूषण का स्तर घटेगा, लेकिन अगले 10 दिनों तक बारिश के आसार नहीं हैं।
पराली जलाने की घटनाएं कम होने की बजाय पिछले कुछ दिनों से बढ़ती जा रही हैं। वहीं कृषि अधिकारियों द्वारा खेतों में जाकर फसल अवशेषों में लगी आग को बुझाने को सिलसिला भी जारी है। कृषि विभाग की ओर से भी हरसेक एप के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और किसानों को जुर्माना भी लगाया जा रहा है। बीते वर्ष की बजाय इस वर्ष किसान फसल अवशेषों में अधिक आग लगाने के मामले सामने आए हैं। कृषि विभाग के अनुसार बीते वर्ष करीब 700 जगहों पर पराली जलाने के मामले सामने आए थे, वहीं इस बार एक हजार से अधिक लोकेशन पर पराली जलाने की आ चुकी हैं। इस वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। सुबह शाम प्रदूषण के कारण आंखों में जलन व दमा रोगियों की परेशानी बढ़ गई है।
अगले 10 दिन नहीं होगी बारिश-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि विभाग की ओर से पेड़ों पर पानी छिडक़ने का काम जारी है ताकि पेड़ो की धूल साफ और जाए। प्रदूषण से राहत तभी मिलेगी, जब बारिश होगी। लेकिन अगले 10 दिन तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। इसलिए यह स्थिति ऐसे ही बनी रहेगी। पराली जलने की घटनाएं कम होंगी तो वायु प्रदूषण धीरे-धीरे कम होगा। जो बड़े कण हैं, उनसे छुटकारा जल्द मिल जाएगा, लेकिन छोटे कण को हवा से हटने में समय लगता है।
पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए खेतों में पहुंचे तहसीलदार
गुहला-चीका। तहसीलदार प्रदीप कुमार ने बुधवार को गुहला, भूना, खरौदी, खरकड़ा, सैर, कांगथली, थेह मुकेरियां, मांडी सदरां, रसूलपुर गांवों का दौरा किया और गांव खरौदी के खेतों में धान के फानों में आग लगने वाली घटना स्थल पर पहुंचकर आग बुझवाई।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा किसानों को धान की पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है तथा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने मौके पर किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि वे फानों में आग नही लगाएं, क्योंकि इससे प्रदूषण फैलता है। इस मौके पर कानूनगो प्रवीन कुमार, पटवारी अनिल कुमार व गुरचरण भाटिया, एग्रीकल्चर सुपरवाइजर अभिषेक, सहायक तकनीकी प्रबंधक रीना, नंबरदार जसबीर सिंह मौजूद रहे।
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डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि जिला में धान की फसल कटने के बाद कहीं भी फानों में कहीं भी आग नहीं लगनी चाहिए। इसके लिए संबंधित पटवारी और ग्राम सचिव अपने-अपने क्षेत्र में सावधानी पूर्वक कार्य करें और यदि कहीं आग लगने की घटना नजर आती है तो तुरंत प्रभाव से फानों में लगी आग को बुझवाया जाए। चूंकि आग लगने से जहां एक ओर पर्यावरण दूषित होता है, वहीं दूसरी ओर जमीन की उपजाऊ ताकत भी कमजोर पड़ती है। इसलिए हम सबके लिए यह जरूरी है कि व्यवस्था पर पूरी नजर रखें और संबंधित विभागों के अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण भी करते रहें। लघु सचिवालय में आयोजित इस बैठक के दौरान कुछ कर्मचारी ऑनलाइन भी जुड़े हुए थे।
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डीसी ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के डयूटी क्षेत्र में फानों में आग लगने की घटना नजर आती है तो संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। लगातार लापरवाही बरतने के चलते संबंधित को चार्ज सीट भी किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं भी व्यवस्था पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सभी संबंधित अधिकारी समय-समय पर औचक निरीक्षण करते रहें और किए गए कार्यों की रिपोर्ट डीसी कार्यालय को अवश्य भेजें।
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डीडीए डॉ. कर्मचंद को निर्देश दिए कि सभी 278 धान के गांवों में कहीं भी आग लगने की घटना न हो, इसके लिए विभाग के कर्मचारी सतर्कता से कार्य करते रहें। डीसी ने डीडीपीओ जसविंद्र सिंह को भी निर्देश देते हुए कहा कि वे अपनी टीम का मार्ग दर्शन करते हुए आग लगने की घटनाओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के कार्य को कार्य रूप में परिणत करें। सांझे प्रयासों के चलते ही आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। इस मौके पर सीटीएम अमित कुमार, डीआरओ टीआर गौतम, डीआईपीआरओ धर्मवीर सिंह, तहसीलदार सुदेश मेहरा व सुनील कुमार, डीआईओ दीपक खुराना सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
जिले में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। बुधवार को एक्यूआई औसत 402 रही। बारिश होगी तो प्रदूषण का स्तर घटेगा, लेकिन अगले 10 दिनों तक बारिश के आसार नहीं हैं।
पराली जलाने की घटनाएं कम होने की बजाय पिछले कुछ दिनों से बढ़ती जा रही हैं। वहीं कृषि अधिकारियों द्वारा खेतों में जाकर फसल अवशेषों में लगी आग को बुझाने को सिलसिला भी जारी है। कृषि विभाग की ओर से भी हरसेक एप के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और किसानों को जुर्माना भी लगाया जा रहा है। बीते वर्ष की बजाय इस वर्ष किसान फसल अवशेषों में अधिक आग लगाने के मामले सामने आए हैं। कृषि विभाग के अनुसार बीते वर्ष करीब 700 जगहों पर पराली जलाने के मामले सामने आए थे, वहीं इस बार एक हजार से अधिक लोकेशन पर पराली जलाने की आ चुकी हैं। इस वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। सुबह शाम प्रदूषण के कारण आंखों में जलन व दमा रोगियों की परेशानी बढ़ गई है।
अगले 10 दिन नहीं होगी बारिश-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि विभाग की ओर से पेड़ों पर पानी छिडक़ने का काम जारी है ताकि पेड़ो की धूल साफ और जाए। प्रदूषण से राहत तभी मिलेगी, जब बारिश होगी। लेकिन अगले 10 दिन तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। इसलिए यह स्थिति ऐसे ही बनी रहेगी। पराली जलने की घटनाएं कम होंगी तो वायु प्रदूषण धीरे-धीरे कम होगा। जो बड़े कण हैं, उनसे छुटकारा जल्द मिल जाएगा, लेकिन छोटे कण को हवा से हटने में समय लगता है।
पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए खेतों में पहुंचे तहसीलदार
गुहला-चीका। तहसीलदार प्रदीप कुमार ने बुधवार को गुहला, भूना, खरौदी, खरकड़ा, सैर, कांगथली, थेह मुकेरियां, मांडी सदरां, रसूलपुर गांवों का दौरा किया और गांव खरौदी के खेतों में धान के फानों में आग लगने वाली घटना स्थल पर पहुंचकर आग बुझवाई।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा किसानों को धान की पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है तथा पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा रही है। उन्होंने मौके पर किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि वे फानों में आग नही लगाएं, क्योंकि इससे प्रदूषण फैलता है। इस मौके पर कानूनगो प्रवीन कुमार, पटवारी अनिल कुमार व गुरचरण भाटिया, एग्रीकल्चर सुपरवाइजर अभिषेक, सहायक तकनीकी प्रबंधक रीना, नंबरदार जसबीर सिंह मौजूद रहे।