फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Annadata landed on the streets leaving six months' earnings in the fields

छह माह की कमाई को खेतों में छोड़ सड़कों पर उतरा अन्नदाता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Sep 2021 12:39 AM IST
विज्ञापन
Annadata landed on the streets leaving six months' earnings in the fields
कृषि कानूनों को लेकर यह किसानों का रोष ही तो है, जो छह माह की कमाई पीले सोने को खेतों में, मंडियों में छोड़कर अन्नदाता सड़कों पर आ डटा। सोमवार को जिले भर में 30 से अधिक मुख्य व छोटे रास्तों पर किसानों ने जाम लगाकर भारत बंद का समर्थन किया। इतना ही नहीं अनाज मंडियों में भी धान की कोई खरीद नहीं हुई। किसी समय में खरीदारों को किसान ढूंढते हैं। लेकिन सोमवार को खरीदार मंडियों में भटकते नजर आए, लेकिन न तो किसानों ने और न ही आढ़तियों ने फसल की बिक्री की।
विज्ञापन

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को भारत बंद का आह्वान किया गया था। जिसमें किसानों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। कैथल जिले में करीब 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की फसल की रोपाई की गई थी। जिसमें से इस समय 60 प्रतिशत से अधिक फसल निसर कर पक चुकी है। पिछले पंद्रह दिनों से 1509 की आवक हो रही है। जिसे खरीदार हाथों हाथ खरीद रहे हैं। पीआर ग्रुप की आवक भी अधिकतर मंडियों में शुरू हो चुकी है। सरकारी खरीद 1 अक्तूबर से शुरू होनी है। प्राइवेट खरीदार इस बार मंडियों में धान के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन किसानों में कृषि कानूनों को लेकर इस कदर रोष व्याप्त है कि वे खेतों में पकी हुई फसल की कटाई छोड़कर, कटी हुई फसल को ट्रालियों में लदा हुआ छोड़कर, ट्रालियों में मंडियों में लाई हुई फसल को कई मंडियों की फीड़ पर छोड़कर सड़कों पर जा पहुंचे।
विज्ञापन

किसान मनोज कुमार ने कहा कि फसलों को बचाने की ही लड़ाई तो किसान लड़ रहे हैं। इस समय जो फसल पकी हुई है, वह तो आज नहीं तो कल बिक ही जाएगी। लेकिन यदि हर फसल के लिए किसानों की दुर्गति होगी तो आने वाली नसलें उन्हें माफ नहीं करेंगी। इसीलिए वे इन फसलों को सही दाम मिले, इसके लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसी प्रकार से तितरम मोड पर बैठे किसान भारत सिंह ने कहा कि किसान खेतों में पके हुए पीले सोने को छोड़कर सड़कों पर है। पूरे जिले में जाम लगाकर किसान खुश नहीं है। लेकिन सरकार उन्हें इस बात के लिए मजबूर कर रही है। सरकार को चाहिए कि जबरन थोपे जा रहे कृषि कानूनों को रद्द करे और किसानों को उनके खेतों में काम करने दे। अन्यथा अन्नदाता चैन से नहीं बैठेगा। तितरम मोड पर हजारों की संख्या में किसान पहुंचे थे। कई किसान तो बैल बुग्गी तक लाए हुए थे। वहीं कई हुक्का आदि गुड़गुड़ाते हुए आंदोलन में पहुंचे। धरने में किसानों ने खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की।
युवा किसान मनजीत करोड़ा ने कहा कि फसलें बचेंगी तो नसलें बचेंगी। वे एक बार की नहीं बल्कि हर बार की फसल के लिए अच्छे दामों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार जब तक इन कानूनों को वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
खरीदार ढूंढते नजर आए किसानों को
अनाज मंडी में पंजाब से आए एक एजेंसी के खरीदार ने कहा कि इस बार धान की खूब मांग है। जिस कारण महज 20 मिनट में कैथल अनाज मंडी में 20 हजार बोरी बिक सकती हैं। इस समय भी काफी किसानों की ढेरियां पड़ी हैं। आढ़ती बिक्री का सहयोग करें तो यह सारी बिक सकती हैं। इतने खरीदार इस समय मंडी में हैं, लेकिन किसान आंदोलन के कारण सोमवार को धान की खरीद नहीं हुई।

मंडी एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल गर्ग, जिला आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी शोरेवाला, पुरानी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम बहादुर खुरानिया ने कहा कि आढ़ती व किसान का चोली दामन का साथ है। किसानों को हर संभव सहयोग आढ़ती देता है। इसी कारण किसानों के भारत बंद के आह्वान में आढ़तियों का समर्थन है और सोमवार को इसी कारण खरीद नहीं की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed