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Kaithal News: कलायत में आंगनबाड़ी का दूध लॉकअप में रखा
Fri, 12 Dec 2025 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 12 Dec 2025 01:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। महिला एवं बाल विकास विभाग कलायत में आंगनबाड़ी बच्चों को वितरित किए जाने वाले मिल्क पाउडर (सूखा दूध) को मजबूरी में उपमंडल कार्यालय के पुरुष व महिला लॉकअप (हवालात) में स्टोर किया जा रहा है। यह चौंकाने वाला मामला आया है। दरअसल, विभाग के पास पर्याप्त भंडारण स्थान न होने के कारण ऐसा करना मजबूरी बन गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय लघु सचिवालय की पहली मंजिल पर स्थित है। दूध के भारी कार्टून ऊपर ले जाने के लिए मजदूर तैयार नहीं होते, जिसके चलते विभाग ने यह असुरक्षित विकल्प अपनाया है। इस मजबूरी की पुष्टि खुद सीडीपीओ शशि बाला ने की। उन्होंने बताया कि सुरक्षित स्टोर रूम के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिल पाया।
स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। लॉकअप में लोहे की सलाखों वाले दरवाजों से चूहे और अन्य जीव-जंतु आसानी से अंदर आ-जा सकते हैं, जिससे बच्चों के लिए रखे गए इस संवेदनशील पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह लापरवाही सरकार के कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों पर भी सवाल खड़े करती है।
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गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले पूरक पोषण में कई राज्यों में सूखा दूध भी शामिल होता है। इसे अक्सर—विटामिन और मिनरल से फोर्टिफाइड (सशक्त) किया हुआ दूधप्रोटीन और कैल्शियम का बढ़िया स्रोत के रूप में दिया जाता है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर विभाग को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त स्टोर रूम उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों के पोषण से कोई समझौता न हो।
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कलायत। महिला एवं बाल विकास विभाग कलायत में आंगनबाड़ी बच्चों को वितरित किए जाने वाले मिल्क पाउडर (सूखा दूध) को मजबूरी में उपमंडल कार्यालय के पुरुष व महिला लॉकअप (हवालात) में स्टोर किया जा रहा है। यह चौंकाने वाला मामला आया है। दरअसल, विभाग के पास पर्याप्त भंडारण स्थान न होने के कारण ऐसा करना मजबूरी बन गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय लघु सचिवालय की पहली मंजिल पर स्थित है। दूध के भारी कार्टून ऊपर ले जाने के लिए मजदूर तैयार नहीं होते, जिसके चलते विभाग ने यह असुरक्षित विकल्प अपनाया है। इस मजबूरी की पुष्टि खुद सीडीपीओ शशि बाला ने की। उन्होंने बताया कि सुरक्षित स्टोर रूम के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं मिल पाया।
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स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। लॉकअप में लोहे की सलाखों वाले दरवाजों से चूहे और अन्य जीव-जंतु आसानी से अंदर आ-जा सकते हैं, जिससे बच्चों के लिए रखे गए इस संवेदनशील पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह लापरवाही सरकार के कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों पर भी सवाल खड़े करती है।
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गौरतलब है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले पूरक पोषण में कई राज्यों में सूखा दूध भी शामिल होता है। इसे अक्सर—विटामिन और मिनरल से फोर्टिफाइड (सशक्त) किया हुआ दूधप्रोटीन और कैल्शियम का बढ़िया स्रोत के रूप में दिया जाता है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर विभाग को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त स्टोर रूम उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बच्चों के पोषण से कोई समझौता न हो।