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Kaithal News: अखिल भारतीय हिंदू महासंघ ने नवग्रह कुंडों के संरक्षण के लिए सौंपा ज्ञापन
Sun, 27 Jul 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 27 Jul 2025 12:58 AM IST
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कैथल। अखिल भारतीय हिंदू महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारी अमन कुमार को ज्ञापन सौंपकर जिले में स्थित नवग्रह कुंडों के संरक्षण व सुंदरीकरण की मांग की।
महासंघ के चेयरमैन ने बताया कि केवल माता गेट, सीवन गेट और क्योडक गेट के पास स्थित नवग्रह कुंडों में से बृहस्पति कुंड, बुध कुंड, सूर्य कुंड और शुक्र कुंड आज भी मौजूद हैं, लेकिन उनकी स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। वहीं, केतू कुंड (कुम्हार वाला), राहु कुंड (तानु वाला), भौम कुंड (अरणी वाला) और चंद्र कुंड (सोम कुंड) पर पिछले 30-40 वर्षों से अवैध कब्जा हो चुका है, जिससे ये कुंड धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं।
महासंघ के अनुसार, इन ऐतिहासिक कुंडों को बचाने के लिए पिछले 20 वर्षों में पुरातत्व विभाग दिल्ली, चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र सहित कैथल के उपायुक्त और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सचिव को कई पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई बार शिकायतें सीएम विंडो पर भी डाली गईं, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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महासंघ ने मांग की कि जीवित बचे पांच कुंडों का सुंदरीकरण तत्काल किया जाए और शेष चार कुंडों को बतौर प्रतीक 20 से 25 गज क्षेत्रफल के छोटे-छोटे जलाशयों के रूप में पुनर्निर्मित किया जाए।
इन पर तांबे की पट्टियों पर उनके प्राचीन नाम अंकित कर श्रद्धालुओं के लिए एक पहचान स्वरूप संरक्षित किया जाए, ताकि लोग उस पवित्र जल का आचमन या छींटा लेकर आत्मिक संतोष प्राप्त कर सकें।
इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार, पवन शर्मा और ज्ञान चंद भल्ला सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
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महासंघ के चेयरमैन ने बताया कि केवल माता गेट, सीवन गेट और क्योडक गेट के पास स्थित नवग्रह कुंडों में से बृहस्पति कुंड, बुध कुंड, सूर्य कुंड और शुक्र कुंड आज भी मौजूद हैं, लेकिन उनकी स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है। वहीं, केतू कुंड (कुम्हार वाला), राहु कुंड (तानु वाला), भौम कुंड (अरणी वाला) और चंद्र कुंड (सोम कुंड) पर पिछले 30-40 वर्षों से अवैध कब्जा हो चुका है, जिससे ये कुंड धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं।
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महासंघ के अनुसार, इन ऐतिहासिक कुंडों को बचाने के लिए पिछले 20 वर्षों में पुरातत्व विभाग दिल्ली, चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र सहित कैथल के उपायुक्त और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सचिव को कई पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई बार शिकायतें सीएम विंडो पर भी डाली गईं, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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महासंघ ने मांग की कि जीवित बचे पांच कुंडों का सुंदरीकरण तत्काल किया जाए और शेष चार कुंडों को बतौर प्रतीक 20 से 25 गज क्षेत्रफल के छोटे-छोटे जलाशयों के रूप में पुनर्निर्मित किया जाए।
इन पर तांबे की पट्टियों पर उनके प्राचीन नाम अंकित कर श्रद्धालुओं के लिए एक पहचान स्वरूप संरक्षित किया जाए, ताकि लोग उस पवित्र जल का आचमन या छींटा लेकर आत्मिक संतोष प्राप्त कर सकें।
इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार, पवन शर्मा और ज्ञान चंद भल्ला सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।