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Kaithal News: अक्षय तृतीया कल, बाजारों में बढ़ी रौनक
Sat, 18 Apr 2026 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 18 Apr 2026 03:36 AM IST
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कैथल। हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माने जाने वाले अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस खास अवसर को लेकर शहर के बाजारों में इन दिनों खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग सोना-चांदी, नए कपड़े और वाहन खरीदने की तैयारियों में जुटे हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देता है और जीवन में समृद्धि लाता है। त्योहार के मद्देनजर सर्राफा बाजार में विशेष चहल-पहल बनी हुई है। हालांकि सोने के बढ़ते दामों के कारण इस बार अधिकतर लोग चांदी की वस्तुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, चांदी के गिलास, चम्मच, सिक्के और छोटे आभूषणों की बिक्री में तेजी आई है। इसके अलावा रेडीमेड कपड़ों की दुकानों और ऑटोमोबाइल शोरूम में भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि अक्षय तृतीया के दिन खरीदारी को शुभ मानने की परंपरा के चलते हर साल बाजार में रौनक रहती है। इस बार भी त्योहार से पहले ही ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है।
धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व
धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है। 11 रुद्री मंदिर के पंडित मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन दान-पुण्य, जप-तप और पूजा-अर्चना का विशेष फल मिलता है। उन्होंने कहा कि इस तिथि पर बिना मुहूर्त के भी विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति खरीद जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पंडित मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि अक्षय तृतीया का संबंध सतयुग और त्रेतायुग के प्रारंभ से भी माना जाता है, इसलिए यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन अन्न, जल, वस्त्र और धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व
धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है। 11 रुद्री मंदिर के पंडित मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन दान-पुण्य, जप-तप और पूजा-अर्चना का विशेष फल मिलता है। उन्होंने कहा कि इस तिथि पर बिना मुहूर्त के भी विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या संपत्ति खरीद जैसे शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पंडित मुनींद्र मिश्रा ने बताया कि अक्षय तृतीया का संबंध सतयुग और त्रेतायुग के प्रारंभ से भी माना जाता है, इसलिए यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन अन्न, जल, वस्त्र और धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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