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स्मॉग ने लोगों को रुलाया
ब्यूरो कैथल
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:21 AM IST
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दिन भर छाए स्मॉग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मौसम में आए परिवर्तन और खेतों में जलाए गए धान के अवशेष के कारण सुबह-शाम लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी है। वहीं आंखों में जलन के चलते शाम के समय तो लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। बुधवार को तो हालत एकदम से विपरीत हो गया। न्यूनतम तापमान में गिरावट के साथ ही दिन भर छाए स्मॉग के कारण लोग परेशान रहे। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो तापमान में गिरावट के साथ-साथ एक अदद बरसात के बाद ही इस समस्या से निजात मिलने की संभावना है।
धान के अवशेष जलाने के कारण आ रही है ज्यादा परेशानी
मौसम के जानकारों ने बताया कि धान के अवशेष जलाने के कारण पूरे वातावरण में धुआं ही धुआं फैल गया है। जिसके चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। दोपहर बाद तक आग लगाने का सिलसिला तेज होता जाता है। जिस कारण शाम के समय तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। लोगों का घरों में बैठना भी अब मुश्किल होने लगा है।
शहरवासी सचिन धमीजा ने कहा कि वातावरण में फैले धुएं के कारण बाइक पर चलना मुश्किल हो रहा है। आंखों में तेज जलन होती है। जिसके चलते कई बार हादसे भी हो रहे हैं। साथ ही कोहरे की तरह ही स्मॉग में भी दिखाई देना कम हो जाता है। वातावरण में धुएं के फैलने पर रोक लगनी चाहिए।
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पवन शर्मा ने कहा कि यह धुआं एवं मौसम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत हो रही है और आंखों में जलन भी हो रही है। सबसे ज्यादा परेशानी वाहन चलाने में हो रही है।
अभिनव सैनी ने कहा कि इस धुएं के कारण मरीजों को परेशानी आ रही है। दमा व फेफेड़ों के रोग से संबंधित मरीजों के लिए ज्यादा परेशानी बनी हुई है। पूरी रात उन्हें जाग कर बितानी पड़ रही है।
बुधवार को छाया रहा स्मॉग
बुधवार सुबह तापमान में गिरावट देखने को मिली। वहीं वातावरण में फैले धुएं के कारण कोहरे जैसा माहौल बन बन गया। दिनभर स्मॉग का असर देखने को मिला। लोगों को स्मॉग में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब दस बजे के बाद ही स्मॉग हल्का छंट पाया। लेकिन दिन भर इसका असर रहा। शाम के समय लोगों को फिर से काफी परेशानियां हुई। जब अंधेरे के साथ-साथ स्मॉग के कारण सड़कों पर कुछ भी दिखाई नहीं दिया।
मास्क लगाकर बाहर निकलें
यह मौसम अस्थमा, फेफेड़ों से संबंधित रोगियों, जुकाम व खांसी जैसी बीमारियों में ज्यादा परेशान करता है। इन रोगों से पीड़ित लोग जरूरत ना हो तो घर से बाहर ना निकलें। यदि बाहर निकलना पड़े तो मास्क लगाकर निकलें। अस्थमा में डस्ट काफी ज्यादा परेशान करता है।
डा. एमएस शाह, डायरेक्टर, शाह अस्पताल
बरसात से मिल सकती है राहत
वातावरण में फैले स्मॉग के चलते घने कोहरे जैसी स्थिति बन जा रही है। जिस कारण ज्यादा परेशानी हो रही है। एक बरसात हो जाए तो यह खत्म हो जाएगा। तापमान में गिरावट के चलते अब कोहरे की शुरुआत हो गई है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस रहा तो अधिकतम 29.5 रहा।
डा. चंद्रशेखर डागर, मौसम वैज्ञानिक
जिन किसानों ने धान के अवशेष जलाए हैं, उनकी पहचान की जा रही है। जिनकी पहचान हो चुकी है, उन्हें जुर्माने के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। आगे भी नजर रखी जा रही है। किसान भाईयों से अपील है कि वे धान के अवशेष ना जलाएं। इससे ना केवल उनका खुद का बल्कि वातावरण का भारी नुकसान होता है।
डा. महावीर सिंह, कृषि उप-निदेशक, कैथल।
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धान के अवशेष जलाने के कारण आ रही है ज्यादा परेशानी
मौसम के जानकारों ने बताया कि धान के अवशेष जलाने के कारण पूरे वातावरण में धुआं ही धुआं फैल गया है। जिसके चलते लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। दोपहर बाद तक आग लगाने का सिलसिला तेज होता जाता है। जिस कारण शाम के समय तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। लोगों का घरों में बैठना भी अब मुश्किल होने लगा है।
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शहरवासी सचिन धमीजा ने कहा कि वातावरण में फैले धुएं के कारण बाइक पर चलना मुश्किल हो रहा है। आंखों में तेज जलन होती है। जिसके चलते कई बार हादसे भी हो रहे हैं। साथ ही कोहरे की तरह ही स्मॉग में भी दिखाई देना कम हो जाता है। वातावरण में धुएं के फैलने पर रोक लगनी चाहिए।
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पवन शर्मा ने कहा कि यह धुआं एवं मौसम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत हो रही है और आंखों में जलन भी हो रही है। सबसे ज्यादा परेशानी वाहन चलाने में हो रही है।
अभिनव सैनी ने कहा कि इस धुएं के कारण मरीजों को परेशानी आ रही है। दमा व फेफेड़ों के रोग से संबंधित मरीजों के लिए ज्यादा परेशानी बनी हुई है। पूरी रात उन्हें जाग कर बितानी पड़ रही है।
बुधवार को छाया रहा स्मॉग
बुधवार सुबह तापमान में गिरावट देखने को मिली। वहीं वातावरण में फैले धुएं के कारण कोहरे जैसा माहौल बन बन गया। दिनभर स्मॉग का असर देखने को मिला। लोगों को स्मॉग में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब दस बजे के बाद ही स्मॉग हल्का छंट पाया। लेकिन दिन भर इसका असर रहा। शाम के समय लोगों को फिर से काफी परेशानियां हुई। जब अंधेरे के साथ-साथ स्मॉग के कारण सड़कों पर कुछ भी दिखाई नहीं दिया।
मास्क लगाकर बाहर निकलें
यह मौसम अस्थमा, फेफेड़ों से संबंधित रोगियों, जुकाम व खांसी जैसी बीमारियों में ज्यादा परेशान करता है। इन रोगों से पीड़ित लोग जरूरत ना हो तो घर से बाहर ना निकलें। यदि बाहर निकलना पड़े तो मास्क लगाकर निकलें। अस्थमा में डस्ट काफी ज्यादा परेशान करता है।
डा. एमएस शाह, डायरेक्टर, शाह अस्पताल
बरसात से मिल सकती है राहत
वातावरण में फैले स्मॉग के चलते घने कोहरे जैसी स्थिति बन जा रही है। जिस कारण ज्यादा परेशानी हो रही है। एक बरसात हो जाए तो यह खत्म हो जाएगा। तापमान में गिरावट के चलते अब कोहरे की शुरुआत हो गई है। बुधवार को न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस रहा तो अधिकतम 29.5 रहा।
डा. चंद्रशेखर डागर, मौसम वैज्ञानिक
जिन किसानों ने धान के अवशेष जलाए हैं, उनकी पहचान की जा रही है। जिनकी पहचान हो चुकी है, उन्हें जुर्माने के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। आगे भी नजर रखी जा रही है। किसान भाईयों से अपील है कि वे धान के अवशेष ना जलाएं। इससे ना केवल उनका खुद का बल्कि वातावरण का भारी नुकसान होता है।
डा. महावीर सिंह, कृषि उप-निदेशक, कैथल।