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एजेंसी की कार्यप्रणाली बनी परेशानी का सबब
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कैथल। सेक्टर-19 के ग्रीनबेल्ट में बने पार्क में देखभाल करने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली ही लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी है। नगर परिषद ने पार्क की देखरेख के लिए टेंडर छोड़ा है, जिसमें एजेंसी को पार्क की देखभाल करनी है लेकिन एजेंसी जिस तरह से पार्क की देखरेख कर रही है, उससे लोग परेशान हैं।
पार्क में प्रतिदिन सुबह सैर करने वाले शहरवासी मनोहर लाल, जयबीर सिंह, संदीप कुमार व अन्य ने कहा कि सेक्टर 19 के ग्रीन बेल्ट में बने पार्क की देखरेख करने वाली एजेंसी के कर्मचारी हर रोज कच्चे ट्रैक में पानी छोड़ देते हैं। इसके कारण लोगों को पक्के ट्रैक पर ही दौड़ना पड़ता है। पार्क में केवल सीमेंट का ट्रैक ही खाली रहता है। इसके अलावा पूरे पार्क में पेड़ों के सूखे पत्तों का अंबार लगा रहता है। यदि गलती से कोई चिंगारी पार्क में पहुंच गई तो पूरा का पूरा पार्क आग की चपेट में आएगा। क्योंकि इस समय इतनी भीषण गर्मी है कि पत्ते पूरी तरह सूख चुके हैं।
यहां कर्मचारी हर रोज पानी की पाइप को कभी किसी दिशा में तो कभी किसी दिशा में चला कर छोड़ देते हैं। कोई कर्मचारी पाइप को लेकर पौधों में पानी देने का काम नहीं करता। जिस तरह से खेत में सिंचाई की जाती है, उस तरह से पानी छोड़ दिया जाता है, जिससे किसी जगह तो बड़ी मात्रा में पानी एकत्रित हो जाता है। बाकी जगह सूखा रहता है। पौधों में भी अव्यवस्थित ढंग से पानी दिया जाता है। न ही छोटे पौधों की ठीक ढंग से कटाई-छंटाई की जा रही। इन सभी कारणों से सुबह-शाम के समय सैर करने वाले लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं।
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लोगों ने नगर परिषद प्रशासन से मांग की है कि पार्क की देखरेख करने वाली एजेंसी को निर्देशित किया जाए कि लोगों के दौड़ने वाले ट्रैक में पानी न छोड़ा जाए। एक-एक पौधे में पानी देने के लिए कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाए ताकि पानी भी बर्बाद न हो। साथ ही पौधों को ठीक ढंग से पानी मिल सके।
नगर परिषद के सचिव मोहन लाल ने कहा कि इस स्थिति के संबंध में जिम्मेदार एजेंसी से जवाब तलब किया जाएगा। एजेंसी के काम में कमी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
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पार्क में प्रतिदिन सुबह सैर करने वाले शहरवासी मनोहर लाल, जयबीर सिंह, संदीप कुमार व अन्य ने कहा कि सेक्टर 19 के ग्रीन बेल्ट में बने पार्क की देखरेख करने वाली एजेंसी के कर्मचारी हर रोज कच्चे ट्रैक में पानी छोड़ देते हैं। इसके कारण लोगों को पक्के ट्रैक पर ही दौड़ना पड़ता है। पार्क में केवल सीमेंट का ट्रैक ही खाली रहता है। इसके अलावा पूरे पार्क में पेड़ों के सूखे पत्तों का अंबार लगा रहता है। यदि गलती से कोई चिंगारी पार्क में पहुंच गई तो पूरा का पूरा पार्क आग की चपेट में आएगा। क्योंकि इस समय इतनी भीषण गर्मी है कि पत्ते पूरी तरह सूख चुके हैं।
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यहां कर्मचारी हर रोज पानी की पाइप को कभी किसी दिशा में तो कभी किसी दिशा में चला कर छोड़ देते हैं। कोई कर्मचारी पाइप को लेकर पौधों में पानी देने का काम नहीं करता। जिस तरह से खेत में सिंचाई की जाती है, उस तरह से पानी छोड़ दिया जाता है, जिससे किसी जगह तो बड़ी मात्रा में पानी एकत्रित हो जाता है। बाकी जगह सूखा रहता है। पौधों में भी अव्यवस्थित ढंग से पानी दिया जाता है। न ही छोटे पौधों की ठीक ढंग से कटाई-छंटाई की जा रही। इन सभी कारणों से सुबह-शाम के समय सैर करने वाले लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं।
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लोगों ने नगर परिषद प्रशासन से मांग की है कि पार्क की देखरेख करने वाली एजेंसी को निर्देशित किया जाए कि लोगों के दौड़ने वाले ट्रैक में पानी न छोड़ा जाए। एक-एक पौधे में पानी देने के लिए कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाए ताकि पानी भी बर्बाद न हो। साथ ही पौधों को ठीक ढंग से पानी मिल सके।
नगर परिषद के सचिव मोहन लाल ने कहा कि इस स्थिति के संबंध में जिम्मेदार एजेंसी से जवाब तलब किया जाएगा। एजेंसी के काम में कमी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।