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Kaithal News: माता गेट स्थित सूर्यकुंड डेरे में कल से लगेगा दो दिवसीय मेला

Fri, 28 Mar 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 28 Mar 2025 01:06 AM IST
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A two-day fair will be held from tomorrow at Suryakund camp located at Mata Gate
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। माता गेट स्थित सूर्यकुंड डेरे में 29 मार्च से दो दिवसीय मेला लगेगा। चैत्र नवरात्र के पहले अमावस्या को मेले का शुभारंभ होता है और नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा पर समापन होता है। डेरा प्रबंधन ने मेले की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं।

गौरतलब है कि शहर के माता गेट स्थित ऐतिहासिक डेरा बाबा परमहंस पुरी सूर्यकुंड काली माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस बार इसमें करीब एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है। न केवल हरियाणा के विभिन्न जिलों से, बल्कि पंजाब, राजस्थान, दिल्ली सहित अन्य प्रांतों से भी लोग इस मेले में आते हैं। यह मेला 30 मार्च को संपन्न होगा।
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मेले की तैयारी के लिए मंदिर प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। मंदिर के बाहर अभी से मेला भी लगने लगा, जिसमें बच्चे खिलौनों की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं प्रसाद की दुकानें भी लगाई जा रही हैं।
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यह है मंदिर का इतिहास ः डेरे के महंत रमन पुरी महाराज ने बताया कि करीब 150 वर्ष पहले सूर्यकुंड डेरे में पंजाब निवासी बाजीगर समाज का एक बुजुर्ग व्यक्ति यहां पर विश्राम करने के लिए ठहरा। उसने पूरी रात यहां पर बिताई। यहां पर काली माता ने बुजुर्ग को सुबह के समय दर्शन दिए। उन्होंने कहा कि आज के बाद से हर वर्ष चैत्र नवरात्र पर्व के पहले दिन बाजीगर समाज के लोगों की पूजा-अर्चना करने पर वे उनकी मनोकामनाएं पूरी करेंगी। तभी से यह मंदिर बाजीगर समाज के लोगों के लिए कुल देवी का मंदिर बन गया। बाजीगर समाज में विवाह के बाद पहले नवविवाहित जोड़ा यहां माथा टेकता है और इसके बाद गृहस्थ जीवन में प्रवेश करता है।
मान्यता ः डेरा का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा
महंत रमनपुरी ने बताया कि मान्यता के अनुसार, डेरे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि का तीर्थ है। मान्यता है कि ज्येष्ठ पांडव पुत्र युधिष्ठिर ने कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था। यहां पर स्थित माता काली देवी के मंदिर को बाजीगर समाज की कुलदेवी माना जाता है।


रमनपुरी ने बताया कि मंदिर परिसर में इस बार लंगर कमेटी भी तैयारियों में जुटी हुई है। 40 जगहों पर अलग-अलग जगहों पर भंडारा भक्तों के लिए लगाया जाएगा। हलवा, पूड़ी, खीर का प्रसाद रहेगा। हरियाणा सहित अन्य प्रांतों से आने वाले साधुओं के लिए भी मेले में ठहरने व खाने-पीने की भी व्यवस्था रहेगी। मेले में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले लोगों के लिए भी विशेष प्रबंध रहेंगे।
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