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Kaithal News: पांच किलो चूरापोस्त रखने पर दो दोषियों पर 15 हजार रुपये लगाया जुर्माना
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कैथल। पांच किलो चूरापोस्त रखने के मामले में कैथल की विशेष एनडीपीएस अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल में बिताई अवधि को ही पर्याप्त सजा माना है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की कुल 30 हजार रुपये की राशि जमा करने के बाद दोनों को रिहा करने के आदेश दिए गए।
मामले के अनुसार 30 मार्च 2021 को सीवन थाना पुलिस ने जोगा सिंह निवासी गांव बलमगढ़ और जगतार सिंह निवासी गांव ककराला, जिला पटियाला के कब्जे से पांच किलो चूरापोस्त बरामद किया था। दोनों के पास मादक पदार्थ रखने का कोई वैध परमिट या लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने इस संबंध में दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने अदालत में स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद विशेष अदालत ने उन्हें एनडीपीएस एक्ट की धारा 15(बी) के तहत दोषी करार दिया।
पहले किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं थे
सजा पर सुनवाई के दौरान दोनों दोषियों ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे गरीब परिवारों से हैं और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले वे किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं रहे हैं। अपराध स्वीकार करने और अपनी परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने कम सजा देने की गुहार लगाई।
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जेल में बिताई अवधि को माना पर्याप्त
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं एनडीपीएस विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी मोहित अग्रवाल ने मामले की परिस्थितियों और दोषियों के आपराधिक रिकॉर्ड पर विचार किया। अदालत ने माना कि बरामद चूरापोस्त की मात्रा व्यावसायिक मात्रा से कम थी। दोषियों की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने जोगा सिंह की 30 मार्च से 12 मई 2021 तक और जगतार सिंह की 30 मार्च से 7 मई 2021 तक जेल में बिताई अवधि को ही सजा के रूप में पर्याप्त माना। इसके साथ ही दोनों पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। दोनों ने जुर्माने की राशि जमा कर दी जिसके बाद अदालत ने उन्हें रिहा करने के आदेश जारी किए।
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मामले के अनुसार 30 मार्च 2021 को सीवन थाना पुलिस ने जोगा सिंह निवासी गांव बलमगढ़ और जगतार सिंह निवासी गांव ककराला, जिला पटियाला के कब्जे से पांच किलो चूरापोस्त बरामद किया था। दोनों के पास मादक पदार्थ रखने का कोई वैध परमिट या लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने इस संबंध में दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने अदालत में स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद विशेष अदालत ने उन्हें एनडीपीएस एक्ट की धारा 15(बी) के तहत दोषी करार दिया।
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पहले किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं थे
सजा पर सुनवाई के दौरान दोनों दोषियों ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे गरीब परिवारों से हैं और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले वे किसी आपराधिक मामले में दोषी नहीं रहे हैं। अपराध स्वीकार करने और अपनी परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने कम सजा देने की गुहार लगाई।
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जेल में बिताई अवधि को माना पर्याप्त
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं एनडीपीएस विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी मोहित अग्रवाल ने मामले की परिस्थितियों और दोषियों के आपराधिक रिकॉर्ड पर विचार किया। अदालत ने माना कि बरामद चूरापोस्त की मात्रा व्यावसायिक मात्रा से कम थी। दोषियों की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने जोगा सिंह की 30 मार्च से 12 मई 2021 तक और जगतार सिंह की 30 मार्च से 7 मई 2021 तक जेल में बिताई अवधि को ही सजा के रूप में पर्याप्त माना। इसके साथ ही दोनों पर 15-15 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। दोनों ने जुर्माने की राशि जमा कर दी जिसके बाद अदालत ने उन्हें रिहा करने के आदेश जारी किए।