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ऑनलाइन खरीद के विरोध में अनाज मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल
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कैथल। करीब-करीब इसी सप्ताह के अंत तक शुरू होने वाले गेहूं के सीजन से पहले आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। आढ़तियों ने एलान किया है कि जब तक सरकार अपनी ऑनलाइन खरीद संबंधी नीति को स्पष्ट नहीं करती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। आगामी 15 अप्रैल को करनाल में आढ़तियों द्वारा प्रदेश स्तरीय रैली का आयोजन किया जाएगा। जिसमें अगला फैसला लिया जाएगा। यह फैसला कुरुक्षेत्र में हुई बैठक में लिया गया है।
पहले ये थी व्यवस्था : अनाज मंडियों में आढ़तियों की एक या दो एसोसिएशन बनी हुई हैं। जिन्हें सरकार बतौर बिलिंग कम पेईंग एजेंट की मान्यता देती थी। आढ़ती एक दिन में जितनी भी खरीद होती थी, उसकी जानकारी एसोसिएशन को देता था। एसोसिएशन यह जानकारी संबंधित खरीद एजेंसी में भेजती थी। खरीद एजेंसी एसोसिएशन के खाते में पैसे भेजती थी। इसके बाद एसोसिएशन इस राशि को किसानों को उनकी फसल की मात्रा अनुसार बांट देती थी। साथ ही मंडी से उठान करवाने में एसोसिएशन की ठेकेदार के साथ सामंजस्य बैठाने की भी जिम्मेदारी थी। इस सारे कार्य की एवज में एसोसिएशन को 15 पैसे प्रति कट्टा कमीशन मिलता था। इसका उद्देश्य ये था कि खरीद में सरकार के साथ धोखाधड़ी न हो।
अब यह किया गया है परिवर्तन : जिला मंडी एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी शोरेवाला ने बताया कि अब सरकार ने जो परिवर्तन किया है, उसके अनुसार खरीद एजेंसियां अब भुगतान सीधा आढ़ती के खाते में करेगी। आढ़ती इसे आगे किसानों को उनके जे फार्म की जानकारी के अनुसार बांटेगा। लेकिन इसके अंदर लिफ्टिंग की जिम्मेदारी आढ़ती की होगी और जब तक फसल का उठान नहीं हो जाता, तब तक भुगतान नहीं हो पाएगा। सीजन में कई-कई दिनों तक उठान नहीं होता। आढ़ती भुगतान प्राप्त करने के लिए ठेकेदार के साथ टाई-अप करेंगे। इससे आढ़तियों में आपाधापी मचेगी। जिसका सीधा असर मंडियों में व्यवस्था पर पड़ेगा और रिश्वत का लेन-देन उठान के लिए फिर से शुरू हो जाएगा। आढ़तियों को किसानों की सारी डिटेल देनी पड़ेेगी। नई प्रक्रिया से इतना काम बढ़ जाएगा कि सीजन में गेहूं खरीदना या उठान करवाने में ही आढ़ती उलझ कर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सब आढ़तियों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। ताकि अगले सीजन से किसानों को सीधा भुगतान किया जा सके।
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15 अप्रैल को होगा रैली का आयोजन : आढ़तियों ने बताया कि नई नीति के विरोध में 15 अप्रैल को करनाल में रैली का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आगामी निर्णय होगा। तब तक सभी मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल रहेगी। कैथल से अश्वनी शोरेवाला, सुरेश चौधरी, रामनिवास किच्छानिया, शमशेर मित्तल, पुरानी मंडी से तरसेम, चंद्रभान किठानिया, श्याम बहादुर, रामभज व जयभगवान कुरुक्षेत्र में हुई बैठक में शामिल हुए।
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पहले ये थी व्यवस्था : अनाज मंडियों में आढ़तियों की एक या दो एसोसिएशन बनी हुई हैं। जिन्हें सरकार बतौर बिलिंग कम पेईंग एजेंट की मान्यता देती थी। आढ़ती एक दिन में जितनी भी खरीद होती थी, उसकी जानकारी एसोसिएशन को देता था। एसोसिएशन यह जानकारी संबंधित खरीद एजेंसी में भेजती थी। खरीद एजेंसी एसोसिएशन के खाते में पैसे भेजती थी। इसके बाद एसोसिएशन इस राशि को किसानों को उनकी फसल की मात्रा अनुसार बांट देती थी। साथ ही मंडी से उठान करवाने में एसोसिएशन की ठेकेदार के साथ सामंजस्य बैठाने की भी जिम्मेदारी थी। इस सारे कार्य की एवज में एसोसिएशन को 15 पैसे प्रति कट्टा कमीशन मिलता था। इसका उद्देश्य ये था कि खरीद में सरकार के साथ धोखाधड़ी न हो।
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अब यह किया गया है परिवर्तन : जिला मंडी एसोसिएशन के प्रधान अश्वनी शोरेवाला ने बताया कि अब सरकार ने जो परिवर्तन किया है, उसके अनुसार खरीद एजेंसियां अब भुगतान सीधा आढ़ती के खाते में करेगी। आढ़ती इसे आगे किसानों को उनके जे फार्म की जानकारी के अनुसार बांटेगा। लेकिन इसके अंदर लिफ्टिंग की जिम्मेदारी आढ़ती की होगी और जब तक फसल का उठान नहीं हो जाता, तब तक भुगतान नहीं हो पाएगा। सीजन में कई-कई दिनों तक उठान नहीं होता। आढ़ती भुगतान प्राप्त करने के लिए ठेकेदार के साथ टाई-अप करेंगे। इससे आढ़तियों में आपाधापी मचेगी। जिसका सीधा असर मंडियों में व्यवस्था पर पड़ेगा और रिश्वत का लेन-देन उठान के लिए फिर से शुरू हो जाएगा। आढ़तियों को किसानों की सारी डिटेल देनी पड़ेेगी। नई प्रक्रिया से इतना काम बढ़ जाएगा कि सीजन में गेहूं खरीदना या उठान करवाने में ही आढ़ती उलझ कर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सब आढ़तियों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। ताकि अगले सीजन से किसानों को सीधा भुगतान किया जा सके।
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15 अप्रैल को होगा रैली का आयोजन : आढ़तियों ने बताया कि नई नीति के विरोध में 15 अप्रैल को करनाल में रैली का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आगामी निर्णय होगा। तब तक सभी मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल रहेगी। कैथल से अश्वनी शोरेवाला, सुरेश चौधरी, रामनिवास किच्छानिया, शमशेर मित्तल, पुरानी मंडी से तरसेम, चंद्रभान किठानिया, श्याम बहादुर, रामभज व जयभगवान कुरुक्षेत्र में हुई बैठक में शामिल हुए।