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Kaithal News: वकील न होने से 874 केस में सुनवाई का इंतजार
Sun, 24 May 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 24 May 2026 01:06 AM IST
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सोनू थुआ
कैथल। जिला अदालत में लंबित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में करीब 5 हजार मामले विभिन्न कारणों से अदालत में लंबित हैं। कई मामलों में वकीलों की अनुपस्थिति, गवाहों के पेश न होने, अधूरे दस्तावेज और तकनीकी कारणों के चलते सुनवाई प्रभावित हो रही है।
नेशनल ज्यूडिशियरी डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, 874 मामलों में पक्षकारों की ओर से वकील उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
वहीं 110 मुकदमों में गवाह अदालत में पेश नहीं हो रहे, जिससे ये मामले लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
अदालत में 609 मामले ऐसे हैं, जिनमें आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं हैं। कागजात की कमी के चलते इन मामलों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके अलावा 145 मामलों में आरोपी फरार बताए गए हैं, जिससे सुनवाई और जटिल हो गई है। वहीं 94 मामलों में दोनों पक्षों की ओर से रुचि नहीं लिए जाने के कारण मुकदमे आगे नहीं बढ़ रहे हैं।
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उच्च न्यायालय के स्टे आदेश भी बन रहे बाधा : नेशनल ज्यूडिशियरी डाटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार 78 मामले उच्च न्यायालय के स्थगन (स्टे) आदेश के कारण लंबित हैं। इसके अलावा 4 मामले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और 4 मामले जिला
प्रशासन (डीसी) के आदेश के चलते रुके हुए हैं।
8 मामलों में कानूनी उत्तराधिकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, जबकि 3 मामलों में डिक्री निष्पादन लंबित है। 2 मामलों में विभिन्न आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। संवाद
वर्ष के अनुसार लंबित मामलों का विवरण
जिला अदालत में पुराने मामलों का निपटारा अब भी चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2008 का एक मामला आज भी लंबित है। इसके अलावा 2010 के 2, 2013 के 16, 2014 के 21, 2015 के 20, 2016 के 46, 2017 के 173, 2018 के 606, 2019 के 1333, 2020 के 1515, 2021 के 1252, 2022 के 1030, 2023 के 811 और 2024 के 279 मामले अब भी अदालत में विचाराधीन हैं। यह सभी आंकड़े नेशनल ज्यूडिशियरी डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार हैं।
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कैथल। जिला अदालत में लंबित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में करीब 5 हजार मामले विभिन्न कारणों से अदालत में लंबित हैं। कई मामलों में वकीलों की अनुपस्थिति, गवाहों के पेश न होने, अधूरे दस्तावेज और तकनीकी कारणों के चलते सुनवाई प्रभावित हो रही है।
नेशनल ज्यूडिशियरी डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, 874 मामलों में पक्षकारों की ओर से वकील उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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वहीं 110 मुकदमों में गवाह अदालत में पेश नहीं हो रहे, जिससे ये मामले लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
अदालत में 609 मामले ऐसे हैं, जिनमें आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं हैं। कागजात की कमी के चलते इन मामलों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके अलावा 145 मामलों में आरोपी फरार बताए गए हैं, जिससे सुनवाई और जटिल हो गई है। वहीं 94 मामलों में दोनों पक्षों की ओर से रुचि नहीं लिए जाने के कारण मुकदमे आगे नहीं बढ़ रहे हैं।
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उच्च न्यायालय के स्टे आदेश भी बन रहे बाधा : नेशनल ज्यूडिशियरी डाटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार 78 मामले उच्च न्यायालय के स्थगन (स्टे) आदेश के कारण लंबित हैं। इसके अलावा 4 मामले सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और 4 मामले जिला
प्रशासन (डीसी) के आदेश के चलते रुके हुए हैं।
8 मामलों में कानूनी उत्तराधिकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, जबकि 3 मामलों में डिक्री निष्पादन लंबित है। 2 मामलों में विभिन्न आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। संवाद
वर्ष के अनुसार लंबित मामलों का विवरण
जिला अदालत में पुराने मामलों का निपटारा अब भी चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2008 का एक मामला आज भी लंबित है। इसके अलावा 2010 के 2, 2013 के 16, 2014 के 21, 2015 के 20, 2016 के 46, 2017 के 173, 2018 के 606, 2019 के 1333, 2020 के 1515, 2021 के 1252, 2022 के 1030, 2023 के 811 और 2024 के 279 मामले अब भी अदालत में विचाराधीन हैं। यह सभी आंकड़े नेशनल ज्यूडिशियरी डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के अनुसार हैं।