फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   रोडवेज कर्मचारी यूनियन करती हैं सरकार को ब्लैकमेल, जनता से अन्याय

रोडवेज कर्मचारी यूनियन करती हैं सरकार को ब्लैकमेल, जनता से अन्याय

Mon, 15 Oct 2018 12:09 AM IST
Updated Mon, 15 Oct 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
रोडवेज कर्मचारी यूनियन करती हैं सरकार को ब्लैकमेल, जनता से अन्याय
रोडवेज हड़ताल पर आरोप प्रत्यारोप
विज्ञापन

रोडवेज कर्मचारी यूनियन करती है ब्लैकमेल : सरकार
अधिकारी करना चाहते हैं घोटाला : कर्मचारी यूनियन
नसीब सैनी
कैथल। निजी बस परमिटों के विरोध में 16 व 17 अक्तूबर को प्रस्तावित हड़ताल के बीच सरकार ने विज्ञापन जारी करके रोडवेज कर्मचारी यूनियन को ब्लैकमेल करने वाली व जनता से अन्याय करने वाली करार दिया है। हरियाणा परिवहन विभाग चंडीगढ़ की ओर से जारी विज्ञापन में सीधा कहा गया है कि यूनियन पदाधिकारियों पर ड्यूटी में कोताही पर कार्रवाई की बात कही जाए तो तुरंत चक्का जाम की धमकी दी जाती है। सरकार ने रोडवेज चालक व परिचालकों को दी जाने वाली सुविधाओं का भी बखान किया है। साथ ही जनता से ही सवाल किया है कि क्या यूनियनों द्वारा की जा रही हड़ताल न्यायोचित है? उधर, कर्मचारी यूनियन का

सरकार का पक्ष
1. हरियाणा सरकार 4500 बसों के स्वीकृत स्टाफ से 4083 बसें चलवा रही हैं। नई नीति से स्वीकृत अतिरिक्त स्टाफ के पद खत्म नहीं होंगे। 980 अतिरिक्त कंडक्टरों को सरकारी रोजगार मिलेगा। नई नीति से 700 बसें चलाए जाने से सरकार को पांच रुपये प्रति किलोमीटर लाभ होगा।
विज्ञापन

2. सरकार कर्मचारियों को चालक परिचालकों को 30 से 70 हजार रुपये वेतन देती है। ओवरटाइम अलग से। सात प्रतिशत महंगाई भत्ता भी।
3. कर्मचारियों व परिवारों को सरकारी व प्राइवेट अस्पताल से निशुल्क चिकित्सा दी जाती है।
4. रोडवेज कर्मचारियों को बसों में निशुल्क यात्रा व परिवार के साथ साल में दो बार जहां तक बसें जाती हैं, वहां तक घूमने का पास दिया जाता है। इतना ही नहीं सरकार ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के परिजन भी बसों मेें निशुल्क यात्रा करते हैं और तो ओर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निशुल्क यात्रा स्वीकृत नहीं हैं। लेकिन वे भी निशुल्क यात्रा करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5. कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी अपनी ड्यूटी नहीं करते। अपनी ड्यूटी पर नहीं होते और बायोमीट्रिक मशीन में हाजिरी नहीं लगाते।
6. 680 करोड़ के घाटे के बावजूद कर्मचारियों को हर साल बोनस मिलता है।

कर्मचारी यूनियन के जवाब
1. 4500 बसों के स्टाफ की बात पूरी तरह से झूठी है। यह गुमराह करने वाली बात है। यदि निजी बसें दी जाती हैं तो उससे फोरमैन, मैकेनिक, वर्कशॉप के सारे काम खत्म हो जाएंगे।
2. अकेले रोडवेज में ड्राइवर नहीं हैं, अन्य विभागों में भी चालक काम करते हैं। सभी के बराबर वेतन हैं। लेकिन रोडवेज में रिस्क लेकर कर्मचारी काम कर रहे हैं। निशुल्क चिकित्सा भी सभी कर्मचारियों को मिलती है। मेडिकल कैशलेस की सुविधा पूरी नहीं दे रही है।
3. रोडवेज का कर्मचारी सरकार द्वारा स्वीकृति नीति से निशुल्क यात्रा करता है। परिवार के सदस्य व सेवानिवृत्त कर्मचारियों यदि निशुल्क यात्रा करते हुए पाया जाता है तो सरकार दस गुणा किराया ले सकती है।
4. कर्मचारी नेताओं पर आरोप बेबुनियाद हैं। हर कर्मचारी संगठन को अपनी आवाज उठाने का हक है। आजादी से पहले भी ट्रेड यूनियन थीं। पदाधिकारी अपनी ड्यूटी के साथ-साथ संगठन का भी काम करते हैं। कर्मचारियों की एकता को तोड़ने का प्रयास है।
5. जो विभाग का घाटा है, वह सही है। लेकिन सरकार अपने-अपने वोट बैंक के लालच में जनता को निशुल्क यात्राएं दी हैं। 662 करोड़ रुपये की राशि से निशुल्क यात्रा का किराया बनता है। यदि यह निशुल्क यात्रा ना करवाई जाए तो घाटा नहीं रहेगा। जैसा की रोडवेज तालमेल समिति के वरिष्ठ सदस्य पहल सिंह तंवर ने अमर उजाला को बताया।


मुख्यमंत्री को गुमराह कर रहे हैं उच्च अधिकारी
इस आंदोलन में कर्मचारियों की अपनी कोई आर्थिक मांग नहीं है। यह जनता को अच्छी सुविधा व आने वाली पीढ़ियों को स्थायी रोजगार मिलता रहे, इसके लिए संघर्ष है। परिवहन विभाग के अधिकारी मुख्यमंत्री को भी गुमराह कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से अपील है कि 720 निजी बसों की नीति की रोडवेज को छोड़कर किसी अन्य एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो 1310 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आ सकता है। इसी तथ्य के आधार पर इसका विरोध किया जा रहा है और डटकर किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed