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किसान की पुण्यतिथि पर जनसभा का आयोजन
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किसान की पुण्यतिथि पर जनसभा का आयोजन
किसानों ने की कर्जमुक्त कर लागत के आधार पर मूल्य देने की मांग
फोटो संख्या-1 व 2
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रविवार को पाई की अनाज मंडी में किसान कलीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर एक जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा में प्रदेश भर की किसान यूनियनों व किसानों ने भाग लिया। जनसभा की अध्यक्षता किसान यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी ने की और मंच संचालक वीरेंद्र पाई ने किया।
बता दें कि कली राम 27 जनवरी 1993 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के समांतर जींद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए हृदय गति रुकने से मौत हो गई थी। हाबड़ी ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज किसान बर्बादी के कगार पर आ खड़ा है। कोई भी किसान ऐसा नहीं है जिसके सिर पर कर्जा न हो। मंडियों में किसानों की फसलें लुटी जाती है तो बैंकों में किसानों के कर्ज वाले खातों में बीमा योजना के नाम पर लूटा जाता है। जनसभा में भजनी ईश्वर सिंह छात्तर भी किसान कौम पर अपने भजन सुनाकर समा बांध दिया। इस अवसर पर किसान समिति पाई से बलवान, करतारा, जगदीश, ईश्वर रोड़, धीरा, सत्ता, मालाराम, जय कुमार शेख पुरा, भूरा राम पबनावा, जियालाल, मामराज पबनावा, सुखपाल कुलतारन, सतपाल दिलोवली, श्रीराम गोहना, पाला राम संगरौली, सुभाष पिलनी, सुरेश दहिया पानीपत, सुखा राम करनाल, सेवा सिंह आर्य सैकड़ों किसान उपस्थित थे।
किसानों ने ये रही मुख्य मांगे:-
1. सरकार किसानों को कर्ज मुक्त करे।
2. सरकार लागत मूल्य पर लाभकारी मूल्य दे।
3. प्राइवेट बैंकों द्वारा किसानों से फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों रुपया एकत्र करने के उपरांत भी किसानों को उनकी फसलों का बीमा नहीं मिला। सरकार यह बीमा जल्दी दिलवाये।
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4. 50 वर्ष की उम्र से ऊपर के किसानों को सरकार अपने कर्मचारियों की पेंशन के समान पेंशन दे।
5. सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे।
6. किसानों को नुकसान से बचाने के लिये सरकार अपने खर्चे पर गोशाला बनाये और गो के चारे के लिये ग्रांट दी जाये।
7. हर किसान का बुढ़ापे में बीमार किसान का इलाज सरकार अपने खर्चे पर करे।
8. जो किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है तो ऐसे में सरकार उस किसान को मुआवजा व सब्सीडी जे फार्म पर दे।
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किसानों ने की कर्जमुक्त कर लागत के आधार पर मूल्य देने की मांग
फोटो संख्या-1 व 2
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। रविवार को पाई की अनाज मंडी में किसान कलीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर एक जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा में प्रदेश भर की किसान यूनियनों व किसानों ने भाग लिया। जनसभा की अध्यक्षता किसान यूनियन के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत सिंह हाबड़ी ने की और मंच संचालक वीरेंद्र पाई ने किया।
बता दें कि कली राम 27 जनवरी 1993 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजन लाल के समांतर जींद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए हृदय गति रुकने से मौत हो गई थी। हाबड़ी ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज किसान बर्बादी के कगार पर आ खड़ा है। कोई भी किसान ऐसा नहीं है जिसके सिर पर कर्जा न हो। मंडियों में किसानों की फसलें लुटी जाती है तो बैंकों में किसानों के कर्ज वाले खातों में बीमा योजना के नाम पर लूटा जाता है। जनसभा में भजनी ईश्वर सिंह छात्तर भी किसान कौम पर अपने भजन सुनाकर समा बांध दिया। इस अवसर पर किसान समिति पाई से बलवान, करतारा, जगदीश, ईश्वर रोड़, धीरा, सत्ता, मालाराम, जय कुमार शेख पुरा, भूरा राम पबनावा, जियालाल, मामराज पबनावा, सुखपाल कुलतारन, सतपाल दिलोवली, श्रीराम गोहना, पाला राम संगरौली, सुभाष पिलनी, सुरेश दहिया पानीपत, सुखा राम करनाल, सेवा सिंह आर्य सैकड़ों किसान उपस्थित थे।
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किसानों ने ये रही मुख्य मांगे:-
1. सरकार किसानों को कर्ज मुक्त करे।
2. सरकार लागत मूल्य पर लाभकारी मूल्य दे।
3. प्राइवेट बैंकों द्वारा किसानों से फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों रुपया एकत्र करने के उपरांत भी किसानों को उनकी फसलों का बीमा नहीं मिला। सरकार यह बीमा जल्दी दिलवाये।
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4. 50 वर्ष की उम्र से ऊपर के किसानों को सरकार अपने कर्मचारियों की पेंशन के समान पेंशन दे।
5. सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करे।
6. किसानों को नुकसान से बचाने के लिये सरकार अपने खर्चे पर गोशाला बनाये और गो के चारे के लिये ग्रांट दी जाये।
7. हर किसान का बुढ़ापे में बीमार किसान का इलाज सरकार अपने खर्चे पर करे।
8. जो किसान ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है तो ऐसे में सरकार उस किसान को मुआवजा व सब्सीडी जे फार्म पर दे।